
नई दिल्ली/बेंगलुरु: देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बढ़ती लोकप्रियता के बीच कर्नाटक के नेशनल हाईवे पर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में नेशनल हाईवे के किनारे बने वे-साइड एमेनिटी (WSA) सेंटरों में से केवल चार जगहों पर ही इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन चालू हैं।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देशभर में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, लेकिन नेशनल हाईवे पर चार्जिंग नेटवर्क को मजबूत करने की प्रक्रिया अभी धीमी गति से आगे बढ़ रही है।
राज्यसभा सदस्य जग्गेश सहित कई सदस्यों द्वारा पूछे गए लिखित सवालों के जवाब में मंत्री ने बताया कि कर्नाटक में वर्ष 2023-24 के दौरान एक वे-साइड एमेनिटी सेंटर पर और वर्ष 2024-25 में तीन अन्य वे-साइड एमेनिटी सेंटरों पर EV चार्जिंग सुविधा शुरू की गई। इस तरह राज्य में कुल चार WSA केंद्रों पर इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध हैं।
वे-साइड एमेनिटी सेंटर राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रियों को आराम, भोजन, पार्किंग और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किए जाते हैं। मौजूदा समय में इन केंद्रों को इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग सुविधा से जोड़ने की योजना पर काम किया जा रहा है, ताकि लंबी दूरी की यात्रा करने वाले EV चालकों को आसानी हो सके।
केंद्रीय मंत्री के आंकड़ों के मुताबिक, पूरे देश में अभी केवल 84 वे-साइड एमेनिटी सेंटरों पर EV चार्जिंग सुविधा उपलब्ध है। यह संख्या इलेक्ट्रिक वाहनों की तेजी से बढ़ती मांग की तुलना में काफी कम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि EV अपनाने को बढ़ावा देने के लिए चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार बेहद जरूरी है।
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ी है। सरकार भी प्रदूषण कम करने, पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता घटाने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए सब्सिडी, नीतिगत समर्थन और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने जैसी योजनाएं लागू की जा रही हैं।
हालांकि, EV उपयोगकर्ताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक लंबी दूरी के सफर के दौरान चार्जिंग स्टेशन की उपलब्धता है। खासकर नेशनल हाईवे पर पर्याप्त संख्या में चार्जिंग पॉइंट नहीं होने के कारण कई लोग इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से पहले लंबी यात्रा को लेकर चिंता व्यक्त करते हैं।
कर्नाटक देश के प्रमुख ऑटोमोबाइल और तकनीकी केंद्रों में शामिल है। बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। राज्य में कई दोपहिया और चार पहिया EV कंपनियां सक्रिय हैं, लेकिन हाईवे नेटवर्क पर चार्जिंग सुविधाओं की कमी इस क्षेत्र के विस्तार में बाधा बन सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल शहरों में चार्जिंग स्टेशन बनाना पर्याप्त नहीं है। इलेक्ट्रिक वाहनों को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए शहरों के साथ-साथ हाईवे, औद्योगिक क्षेत्रों और पर्यटन मार्गों पर भी मजबूत चार्जिंग नेटवर्क विकसित करना होगा।
सरकार की ओर से हाईवे पर चार्जिंग सुविधा बढ़ाने के लिए निजी कंपनियों और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में अधिक वे-साइड एमेनिटी सेंटरों को EV चार्जिंग सुविधा से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है।
EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से न केवल इलेक्ट्रिक वाहन चालकों को सुविधा मिलेगी, बल्कि देश के ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र में भी बदलाव को गति मिलेगी। बेहतर चार्जिंग नेटवर्क से लोगों का भरोसा बढ़ेगा और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार तेज हो सकती है।
कुल मिलाकर, इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या के बीच कर्नाटक सहित देश के कई राज्यों में नेशनल हाईवे चार्जिंग नेटवर्क को मजबूत करने की जरूरत स्पष्ट दिखाई दे रही है। सरकार के सामने अब चुनौती यह है कि EV नीति को सफल बनाने के लिए चार्जिंग सुविधाओं का विस्तार भी उसी गति से किया जाए, जिस गति से इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ रही है।





