कर्नाटक

खुदाई के दौरान मजदूर को मिले 14 सोने के सिक्के हाथी की आकृति ने बढ़ाया रहस्य

Kavita2
5 Sept 2026 11:04 AM IST
खुदाई के दौरान मजदूर को मिले 14 सोने के सिक्के हाथी की आकृति ने बढ़ाया रहस्य
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बेलगाम। कर्नाटक के बेलगाम जिले के सवदत्ती तालुक के इंचल गांव में काम कर रहे एक मजदूर को बाड़ के पास 14 सोने के सिक्के मिलने का मामला सामने आया है। सिक्कों का कुल वजन करीब 54.8 ग्राम बताया गया है और मौजूदा सोने की कीमत के आधार पर इनका अनुमानित मूल्य लगभग 8.27 लाख रुपये आंका गया है। खास बात यह है कि इन सिक्कों पर हाथी की आकृति दिखाई दे रही है, जिसके कारण इनके ऐतिहासिक महत्व और किसी प्राचीन राजवंश से संबंध को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।

सोने के सिक्के BCM हॉस्टल के पास काम के दौरान मिले। सिक्के मिलने के बाद मजदूरों ने उन्हें अपने पास रखने के बजाय अधिकारियों को इसकी जानकारी दी और सभी सिक्के प्रशासन को सौंप दिए। इसके बाद तहसीलदार मल्लिकार्जुन हेग्गनवारा ने सिक्कों को सरकारी खजाने में जमा करा दिया।

काम करते समय अचानक मिले सोने के सिक्के

जानकारी के मुताबिक इंचल गांव में BCM हॉस्टल के पास मजदूर काम कर रहे थे। इसी दौरान बाड़ के नजदीक उन्हें कुछ सिक्के दिखाई दिए। जांच करने पर ये सोने के सिक्के निकले।

एक साथ इतनी संख्या में सोने के सिक्के मिलने से वहां मौजूद लोगों में उत्सुकता बढ़ गई। बाद में सभी सिक्कों को इकट्ठा किया गया और उनकी संख्या 14 पाई गई।

सिक्कों का वजन किए जाने पर इनका कुल वजन 54.8 ग्राम सामने आया। प्रारंभिक तौर पर इनकी कीमत करीब 8.27 लाख रुपये आंकी गई है। हालांकि यदि ये सिक्के वास्तव में ऐतिहासिक काल से जुड़े पाए जाते हैं तो इनका पुरातात्विक और ऐतिहासिक महत्व केवल सोने की कीमत से कहीं अधिक हो सकता है।

मजदूरों ने दिखाई ईमानदारी

मामले में मजदूरों की ईमानदारी की भी चर्चा हो रही है। लाखों रुपये कीमत के सोने के सिक्के मिलने के बावजूद उन्होंने इन्हें छिपाने के बजाय प्रशासन को सौंपने का फैसला किया।

अधिकारियों को इसकी सूचना दिए जाने के बाद पंचायत विकास अधिकारी (PDO) और तालुक पंचायत के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। उनकी मौजूदगी में सिक्कों को सुरक्षित तरीके से प्रशासन के सुपुर्द किया गया।

इसके बाद सभी 14 सिक्के सवदत्ती के तहसीलदार मल्लिकार्जुन हेग्गनवारा को सौंपे गए। प्रशासन ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत सिक्कों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था की।

सरकारी खजाने में जमा कराए गए सिक्के

तहसीलदार मल्लिकार्जुन हेग्गनवारा ने सभी सिक्कों को सरकारी खजाने में जमा करा दिया। इससे सिक्कों को सुरक्षित रखने के साथ आगे उनकी जांच और ऐतिहासिक महत्व का पता लगाने की प्रक्रिया आसान होगी।

अब विशेषज्ञों की जांच से यह निर्धारित किया जा सकेगा कि सिक्के वास्तव में कितने पुराने हैं, किस काल में बनाए गए थे और उनका संबंध किस शासन या राजवंश से हो सकता है।

सिक्कों की धातु संरचना, वजन, आकार, उन पर बने चिह्न और लेख जैसी विशेषताओं का अध्ययन उनकी वास्तविक पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

सिक्कों पर बनी हाथी की आकृति

इन सिक्कों की सबसे दिलचस्प विशेषता उन पर बनी हाथी की आकृति बताई जा रही है। इसी चिह्न के कारण इनके गंगा राजवंश से संभावित संबंध को लेकर चर्चा शुरू हुई है।

तलकाड के गंगा राजवंश से हाथी के शाही चिह्न को जोड़ा जाता है। इसलिए यह संभावना जताई जा रही है कि मिले हुए सिक्कों का संबंध उस ऐतिहासिक काल से हो सकता है।

हालांकि केवल हाथी की आकृति के आधार पर सिक्कों को किसी विशेष राजवंश का घोषित नहीं किया जा सकता। इसके लिए पुरातत्व और प्राचीन सिक्कों के विशेषज्ञों की विस्तृत जांच जरूरी होगी।

10वीं से 15वीं शताब्दी के होने की संभावना

प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि ये सिक्के 10वीं से 15वीं शताब्दी ईस्वी के बीच के हो सकते हैं। यदि जांच में यह अनुमान सही साबित होता है तो सिक्के कई सौ वर्ष पुराने होंगे।

ऐतिहासिक सिक्के उस दौर की अर्थव्यवस्था, व्यापार, शासन व्यवस्था और संस्कृति को समझने के लिए महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं। उन पर मौजूद आकृतियां और चिह्न तत्कालीन राजवंशों और राजनीतिक परिस्थितियों के बारे में जानकारी दे सकते हैं।

इसी कारण अब विशेषज्ञों की जांच पर विशेष नजर रहेगी।

कैसे पहुंचे जमीन में 14 सोने के सिक्के?

सिक्कों के मिलने के बाद एक बड़ा सवाल यह भी है कि वे बाड़ के पास जमीन में कैसे पहुंचे। क्या किसी व्यक्ति ने उन्हें सैकड़ों साल पहले सुरक्षित रखने के लिए छिपाया था या वे किसी बड़े संग्रह का हिस्सा थे, इसका जवाब अभी नहीं मिला है।

यह भी संभव है कि संबंधित क्षेत्र में आगे जांच करने पर अन्य पुरातात्विक वस्तुएं सामने आएं। हालांकि ऐसी किसी संभावना की पुष्टि विशेषज्ञों और संबंधित विभाग की जांच के बाद ही हो सकती है।

यदि प्रशासन या पुरातत्व विभाग को क्षेत्र में किसी ऐतिहासिक स्थल के संकेत मिलते हैं तो वहां आगे वैज्ञानिक तरीके से सर्वेक्षण किया जा सकता है।

विशेषज्ञ जांच से खुलेगा रहस्य

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल सिक्कों की वास्तविक उम्र और उत्पत्ति को लेकर है। विशेषज्ञ सिक्कों पर मौजूद प्रतीकों, उनके निर्माण की तकनीक, वजन और सोने की शुद्धता जैसे पहलुओं का अध्ययन कर सकते हैं।

यदि सिक्कों पर कोई लिपि या अन्य सूक्ष्म चिह्न मौजूद हैं तो उनका अध्ययन भी किया जाएगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि सिक्के किस शासक या राजवंश के समय जारी किए गए थे।

फिलहाल सभी 14 सोने के सिक्के सरकारी खजाने में सुरक्षित जमा करा दिए गए हैं। प्रशासन और विशेषज्ञों की आगे की जांच के बाद ही इनके इतिहास से पर्दा उठ सकेगा। मजदूरों की ईमानदारी के कारण अब यह संभावित ऐतिहासिक धरोहर सुरक्षित रूप से प्रशासन तक पहुंच गई है।

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