कर्नाटक

खुले गड्ढे में फेंका जा रहा था लैब का कचरा

Kavita2
13 Sept 2026 11:55 AM IST
खुले गड्ढे में फेंका जा रहा था लैब का कचरा
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बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार के मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने शनिवार को बेंगलुरु स्थित एनालिटिक्स एंड रिसर्च लैबोरेटरी प्राइवेट लिमिटेड का अचानक निरीक्षण किया। इस दौरान लैबोरेटरी के संचालन में परमिट, कचरा निपटान और कर्मचारियों की संख्या से जुड़े कई नियमों के उल्लंघन सामने आने का दावा किया गया। निरीक्षण में मिली खामियों पर नाराजगी जताते हुए मंत्री ने लैब प्रबंधन को कड़ी चेतावनी दी और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मंत्री रामलिंगा रेड्डी के साथ कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी केएसपीसीबी के अधिकारियों की एक टीम भी मौजूद थी। टीम ने लैबोरेटरी परिसर में पहुंचकर संचालन से संबंधित दस्तावेजों, पर्यावरणीय अनुमति और कचरे के निपटान की व्यवस्था की पड़ताल की। अचानक हुए इस निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने परिसर के विभिन्न हिस्सों का जायजा लिया और वहां अपनाई जा रही कार्यप्रणाली की जानकारी जुटाई।

जांच में सामने आया कि लैबोरेटरी के पास केएसपीसीबी की ओर से जारी एस्टेब्लिशमेंट परमिट केवल वर्ष 2025 तक के लिए वैध था। इसकी अवधि समाप्त होने के बाद भी प्रयोगशाला का संचालन जारी था। अधिकारियों के मुताबिक निरीक्षण के समय लैब के पास आगे की अवधि के लिए आवश्यक वैध परमिट उपलब्ध नहीं था। इस कारण प्रयोगशाला के मौजूदा संचालन पर सवाल खड़े हुए हैं।

किसी लैबोरेटरी के संचालन में प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित अनुमतियां महत्वपूर्ण होती हैं। इन अनुमतियों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि संबंधित संस्थान पर्यावरण संरक्षण, कचरे के सुरक्षित निपटान और निर्धारित संचालन मानकों का पालन करे। लेकिन जांच में लैबोरेटरी के पास वैध अनुमति नहीं मिलने के बाद मंत्री ने प्रबंधन से जवाब मांगा और इस लापरवाही पर नाराजगी जताई।

निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर खामी लैबोरेटरी से निकलने वाले कचरे के निपटान से संबंधित पाई गई। अधिकारियों ने बताया कि परिसर में कचरे को सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से नष्ट करने के लिए उचित व्यवस्था नहीं थी। लैब से निकलने वाले कचरे को बिना किसी प्रक्रिया या उपचार के खुले गड्ढे में फेंका जा रहा था।

अधिकारियों के अनुसार लैबोरेटरी से निकलने वाले कचरे को सीधे खुले स्थान पर डालना पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन की श्रेणी में आता है। ऐसे कचरे की प्रकृति के आधार पर उसका पृथक्करण, उपचार और सुरक्षित निपटान किया जाना जरूरी होता है। निरीक्षण में इन आवश्यक व्यवस्थाओं का अभाव मिलने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने स्थिति को गंभीरता से लिया।

मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कचरा निपटान की व्यवस्था नहीं होने पर लैब प्रबंधन को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और लोगों की सुरक्षा से जुड़े नियमों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती। लैबोरेटरी का संचालन करने वाली संस्था की जिम्मेदारी है कि वह अपने परिसर से निकलने वाले कचरे का निर्धारित नियमों के अनुसार निपटान करे।

निरीक्षण में कर्मचारियों और एनालिस्ट की संख्या को लेकर भी अनियमितता सामने आई। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से लैबोरेटरी में तीन एनालिस्ट के काम करने की अनुमति ली गई थी। लेकिन जब मंत्री और अधिकारियों की टीम ने मौके पर जांच की तो वहां केवल एक एनालिस्ट काम करता हुआ मिला।

तीन एनालिस्ट की अनुमति के बावजूद केवल एक व्यक्ति के कार्यरत मिलने पर अधिकारियों ने लैब की वास्तविक क्षमता और कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए। एनालिस्ट की संख्या किसी प्रयोगशाला में जांच, नमूना विश्लेषण और रिपोर्ट तैयार करने की क्षमता से जुड़ी होती है। ऐसे में स्वीकृत संख्या और मौके पर उपलब्ध कर्मचारियों की संख्या में अंतर मिलने की जांच आवश्यक मानी जा रही है।

निरीक्षण टीम ने लैबोरेटरी के दस्तावेजों और मौके की स्थिति के बीच अंतर पर भी ध्यान दिया। एक ओर प्रयोगशाला के पास तीन एनालिस्ट के कार्य करने की अनुमति थी, जबकि दूसरी ओर निरीक्षण के समय केवल एक एनालिस्ट मिला। यह स्पष्ट किया जाना बाकी है कि अन्य दो पदों पर कर्मचारी पहले से नियुक्त थे या नहीं और निरीक्षण के समय उनकी अनुपस्थिति का कारण क्या था।

मंत्री ने लैब प्रबंधन को सभी आवश्यक नियमों और शर्तों का पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना वैध परमिट संचालन, कचरे का असुरक्षित निपटान और स्वीकृत व्यवस्था के अनुरूप कर्मचारियों की उपलब्धता नहीं होना गंभीर विषय हैं। संबंधित अधिकारियों से इन खामियों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है।

केएसपीसीबी के अधिकारियों की टीम द्वारा निरीक्षण के दौरान जुटाई गई जानकारी के आधार पर लैबोरेटरी से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। अनुमति से संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद यह तय होगा कि प्रयोगशाला ने परमिट के नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था या नहीं। इसी तरह खुले गड्ढे में फेंके गए कचरे की प्रकृति और उससे संभावित पर्यावरणीय प्रभाव की जांच भी महत्वपूर्ण होगी।

इस कार्रवाई से यह संदेश दिया गया है कि प्रयोगशालाओं और अन्य संस्थानों को निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन करना होगा। केवल पुरानी अनुमति के आधार पर संचालन जारी रखना पर्याप्त नहीं माना जाएगा। संचालन की वैधता बनाए रखने के लिए समय पर परमिट का नवीनीकरण और सभी आवश्यक शर्तों की पूर्ति जरूरी है।

लैबोरेटरी परिसर से निकलने वाले कचरे का प्रबंधन इस मामले का अहम पहलू है। अधिकारियों का कहना है कि बिना उपचार कचरे को खुले गड्ढे में डालने से आसपास के पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका हो सकती है। इसलिए लैब प्रबंधन को कचरे के संग्रहण, प्रसंस्करण और निपटान के लिए उचित व्यवस्था तैयार करनी होगी।

फिलहाल मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने लैबोरेटरी प्रबंधन को कड़ी चेतावनी देते हुए नियमों के अनुसार संचालन करने को कहा है। निरीक्षण में मिली खामियों पर केएसपीसीबी की आगे की कार्रवाई और लैब प्रबंधन के जवाब का इंतजार है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि नियमों के उल्लंघन के मामले में प्रयोगशाला के खिलाफ कौन से प्रशासनिक कदम उठाए जाएंगे।

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