कर्नाटक
सिद्धारमैया के खिलाफ स्टिंग हुआ था कुमारस्वामी ने लगाया बड़ा आरोप
Ratna Netam
7 Oct 2026 9:51 PM IST

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बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में स्टिंग ऑपरेशन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री और जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ कथित स्टिंग ऑपरेशन कराया गया था और इसी के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। कुमारस्वामी ने यह दावा बेंगलुरु स्थित जेडीएस के केंद्रीय कार्यालय जेपी भवन में मीडिया से बातचीत के दौरान किया।
कुमारस्वामी का बयान ऐसे समय सामने आया है, जब कर्नाटक सरकार के मंत्रियों के खिलाफ कथित तौर पर स्टिंग ऑपरेशन किए जाने की खबरों को लेकर पहले से राजनीतिक हलचल मची हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने हाल की कैबिनेट बैठक में अपने मंत्रियों को सतर्क रहने की बात कही थी और कथित स्टिंग ऑपरेशन की आशंका का जिक्र किया था।इसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कुमारस्वामी ने सीधे सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री पद से हटने का मामला उठा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया के खिलाफ भी इसी तरह का एक स्टिंग ऑपरेशन किया गया था। कुमारस्वामी के अनुसार, सिद्धारमैया दिल्ली गए थे और उन्हें उम्मीद थी कि वहां मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक विषयों पर चर्चा होगी, लेकिन कथित स्टिंग ऑपरेशन से जुड़ी सामग्री सामने आने के बाद परिस्थितियां बदल गईं।
कुमारस्वामी ने दावा किया कि इसके बाद कांग्रेस नेतृत्व की ओर से सिद्धारमैया पर पद छोड़ने का दबाव बनाया गया। हालांकि उनके इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और डीके शिवकुमार या कांग्रेस की ओर से इन विशिष्ट आरोपों पर तत्काल विस्तृत जवाब सामने नहीं आया है।कुमारस्वामी ने सिद्धारमैया को कर्नाटक का वरिष्ठ नेता बताते हुए कहा कि उन्होंने लंबे समय तक राज्य का नेतृत्व किया और AHINDA वर्गों में उनका मजबूत आधार रहा है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री देवराज उर्स का भी जिक्र करते हुए सिद्धारमैया के लंबे राजनीतिक कार्यकाल और प्रभाव की बात कही।
जेडीएस नेता ने आरोप लगाया कि इतने वरिष्ठ नेता को जिस तरह मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा, वह उचित नहीं था। उनका दावा है कि कथित स्टिंग ऑपरेशन की जानकारी कांग्रेस के कुछ नेताओं और राजनीतिक हलकों में पहले से थी। उन्होंने यह भी कहा कि इस कथित ऑपरेशन में एक मीडिया संस्थान की भूमिका होने की जानकारी उन्हें मिली है। हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई प्रमाण पेश नहीं किया।जब कुमारस्वामी से पूछा गया कि कथित स्टिंग ऑपरेशन के पीछे कौन था, तो उन्होंने कहा कि राजनीतिक हलकों में इससे जुड़े लोगों के बारे में जानकारी है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने भी उनसे इस मामले से जुड़ी बातें साझा की थीं।
कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की ओर से कैबिनेट सहयोगियों को कथित स्टिंग ऑपरेशन से सतर्क रहने की खबरों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब स्वयं मुख्यमंत्री मंत्रियों को अपनी गतिविधियों और बातचीत को लेकर सावधान रहने के लिए कह रहे हैं, तो यह गंभीर मामला है और इसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए।उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्रियों और राजनीतिक नेताओं को नियंत्रण में रखने के लिए इस तरह के कथित ऑपरेशन का इस्तेमाल किया जा रहा है। कुमारस्वामी ने पुराने राजनीतिक विवादों का उल्लेख करते हुए पूर्व मंत्री रमेश जारकीहोली और केएन राजन्ना से जुड़े मामलों का भी जिक्र किया तथा दावा किया कि पहले भी ऐसी रणनीतियां अपनाई गई थीं। ये सभी कुमारस्वामी के राजनीतिक आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कुमारस्वामी ने कैबिनेट बैठक में कथित स्टिंग और हनीट्रैप जैसे विषयों पर चर्चा होने को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले मंत्रिमंडल की बैठकों में विकास, जनता की समस्याओं और प्रशासन से जुड़े विषयों पर चर्चा होती थी, लेकिन अब स्टिंग ऑपरेशन और राजनीतिक विवादों की चर्चा हो रही है।उन्होंने सरकार से सवाल किया कि यदि वास्तव में मंत्रियों को निशाना बनाने के लिए किसी निजी एजेंसी या अन्य समूह की ओर से स्टिंग ऑपरेशन की तैयारी की जा रही है, तो सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इसके पीछे कौन लोग हैं और इस संबंध में क्या जांच की जा रही है।इस विवाद की शुरुआत उन रिपोर्टों के बाद हुई, जिनमें दावा किया गया कि कर्नाटक मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अपने सहयोगियों को कथित स्टिंग ऑपरेशन के खतरे को लेकर आगाह किया था। रिपोर्टों में कुछ मंत्रियों को संभावित निशाना बनाए जाने की आशंका भी जताई गई।
इसी घटनाक्रम को आधार बनाते हुए कुमारस्वामी ने अब सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री पद से हटने को भी कथित स्टिंग ऑपरेशन से जोड़ दिया है। उनके इस बयान से कर्नाटक की सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी जेडीएस के बीच राजनीतिक टकराव और बढ़ गया है।सिद्धारमैया लंबे समय तक कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में रहे हैं और AHINDA राजनीति से उनका नाम जुड़ा रहा है। मुख्यमंत्री पद से उनके हटने के बाद डीके शिवकुमार ने सरकार की कमान संभाली। अब कुमारस्वामी ने इस सत्ता परिवर्तन की परिस्थितियों पर सवाल खड़े करते हुए इसे कथित स्टिंग ऑपरेशन से जोड़ने का दावा किया है।
हालांकि अभी तक ऐसा कोई सार्वजनिक दस्तावेज या आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है, जिससे यह साबित हो कि सिद्धारमैया के खिलाफ वास्तव में कोई स्टिंग ऑपरेशन कराया गया था या उसी कारण उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा। इसलिए कुमारस्वामी के बयान को फिलहाल राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जा रहा है।कर्नाटक की राजनीति में स्टिंग ऑपरेशन की नई बहस ऐसे समय शुरू हुई है, जब राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा-जेडीएस के बीच पहले से कई मुद्दों पर तीखी बयानबाजी चल रही है। अब कुमारस्वामी के आरोपों के बाद इस बात पर नजर रहेगी कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, सिद्धारमैया और कांग्रेस नेतृत्व की ओर से इस पर क्या जवाब दिया जाता है।
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