
मांड्या। कावेरी बेसिन में लगातार हो रही बारिश ने मांड्या जिले के गन्ना उत्पादक किसानों के चेहरों पर एक बार फिर उम्मीद की चमक ला दी है। बारिश में सुधार और जलाशयों में बढ़ते जलस्तर के बाद किसान अब खरीफ फसलों की तैयारी को लेकर उत्साहित हैं। किसानों ने राज्य सरकार से मांग की है कि मॉनसून फसलों की सिंचाई के लिए जल्द से जल्द नहरों में पानी छोड़ा जाए।
कावेरी बेसिन के प्रमुख जल स्रोतों में से एक कृष्णराज सागर (KRS) जलाशय में पानी का स्तर बढ़कर 105 फीट तक पहुंच गया है। जलाशय में लगातार पानी की आवक होने से किसानों को राहत मिली है। मांड्या जिले के गन्ना उत्पादक किसान अब उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराएगी, जिससे खेती का काम तेजी से शुरू किया जा सके।
कुछ समय पहले हालात इसके बिल्कुल विपरीत थे। जब KRS जलाशय का जलस्तर घटकर करीब 81 फीट तक पहुंच गया था, तब राज्य सरकार ने जल संकट को देखते हुए मांड्या जिले के किसानों को नई फसल की बुवाई से बचने की सलाह दी थी। सरकार ने किसानों से कहा था कि उपलब्ध पानी का इस्तेमाल पहले पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा।
उस समय कम बारिश और घटते जलस्तर के कारण किसानों के सामने खेती को लेकर चिंता बढ़ गई थी। विशेष रूप से गन्ना उत्पादक किसानों को डर था कि यदि सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिला तो फसल प्रभावित हो सकती है और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
हालांकि, पिछले कुछ दिनों में कावेरी बेसिन और कोडगु क्षेत्र में अच्छी बारिश हुई है। इसके कारण नदी और जलाशयों में पानी की आवक बढ़ी है। KRS जलाशय में बड़ी मात्रा में पानी पहुंचने से जलस्तर में तेजी से सुधार दर्ज किया गया है।
जलस्तर बढ़ने के बाद किसानों का कहना है कि अब खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि सिंचाई नहरों के माध्यम से जल्द पानी छोड़ा जाए, ताकि मॉनसून फसलों की बुवाई समय पर की जा सके।
मांड्या जिला कावेरी नदी पर आधारित कृषि क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। यहां बड़ी संख्या में किसान गन्ना, धान और अन्य फसलों की खेती करते हैं। सिंचाई के लिए जल उपलब्धता किसानों की आय और फसल उत्पादन पर सीधा असर डालती है।
किसानों का कहना है कि शुरुआती दौर में पानी की कमी के कारण खेती को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी, लेकिन अब जलाशय में बढ़ते पानी से उन्हें नई उम्मीद मिली है। उनका मानना है कि यदि समय पर नहरों में पानी उपलब्ध कराया जाता है तो इस साल फसल उत्पादन बेहतर हो सकता है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मॉनसून के दौरान जल संसाधनों की उपलब्धता खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। खासकर गन्ने जैसी लंबी अवधि वाली फसल के लिए नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है। ऐसे में जलाशय का बढ़ता स्तर किसानों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
राज्य सरकार और जल संसाधन विभाग अब जलाशयों की स्थिति और पानी की उपलब्धता की समीक्षा कर रहे हैं। किसानों की मांग है कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए सिंचाई प्रतिबंधों में राहत दी जाए और खेती के लिए आवश्यक पानी उपलब्ध कराया जाए।
KRS जलाशय का जलस्तर 105 फीट तक पहुंचना न केवल मांड्या के किसानों के लिए राहत की खबर है, बल्कि पूरे कावेरी बेसिन के लिए भी सकारात्मक संकेत है। अच्छी बारिश जारी रहने पर आने वाले दिनों में जल उपलब्धता और बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है।
फिलहाल किसानों की नजर सरकार के अगले फैसले पर है। यदि नहरों में जल्द पानी छोड़ा जाता है, तो मांड्या जिले में खेती की गतिविधियां दोबारा तेज हो सकती हैं और किसानों को इस सीजन में बेहतर उत्पादन की उम्मीद बंध सकती है।





