कर्नाटक

बेलगाम में पतंगबाजी बनी जानलेवा, दो दिन में दो हादसे और दो मौत

Kavita2
2 Oct 2026 2:25 PM IST
बेलगाम में पतंगबाजी बनी जानलेवा, दो दिन में दो हादसे और दो मौत
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बेलगाम। कर्नाटक के बेलगाम में पतंग उड़ाने और पकड़ने का शौक लोगों के लिए जानलेवा साबित होने लगा है। जिले में महज दो दिनों के भीतर पतंग से जुड़े दो अलग-अलग हादसों में दो लोगों की मौत हो गई। पहली घटना गांधीनगर के पास हुई, जहां पतंग की डोर में फंसने से टू-व्हीलर सवार एक युवक की जान चली गई। इसके अगले ही दिन वडागावी के निजामियानगर में पतंग पकड़ने की कोशिश में दूसरी मंजिल की छत से गिरने के कारण 9 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। लगातार हुई इन घटनाओं के बाद पतंगबाजी के दौरान सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

पहला हादसा गांधीनगर के पास हुआ था। जानकारी के अनुसार एक युवक दोपहिया वाहन से कहीं जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में पतंग की डोर उसके वाहन और शरीर के संपर्क में आ गई। अचानक सामने आई डोर से वह संभल नहीं सका और हादसे का शिकार हो गया। घटना में युवक गंभीर रूप से घायल हुआ। उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाने का प्रयास किया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

पतंग की डोर से जुड़े हादसे अक्सर सड़क पर चलने वाले लोगों के लिए गंभीर खतरा बन जाते हैं। विशेषकर जब धागा पतला हो और दूर से नजर न आए, तो बाइक या स्कूटर सवार को उसे पहचानने का मौका नहीं मिलता। तेज रफ्तार दोपहिया वाहन पर इस तरह की डोर अचानक सामने आने से चालक का संतुलन बिगड़ सकता है। इसके अलावा गर्दन या शरीर के किसी हिस्से में डोर फंसने की स्थिति में गंभीर चोट लगने का खतरा रहता है।

गांधीनगर के पास हुई घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी चिंता पैदा हुई। लोगों ने कहा कि सड़क और खुले स्थानों के आसपास पतंग उड़ाते समय इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि उसकी डोर वाहनों की आवाजाही वाले रास्तों तक न पहुंचे। वहीं सड़क किनारे पतंग उड़ाने वालों पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत भी बताई गई।

पहली घटना के ठीक बाद बेलगाम के वडागावी क्षेत्र के निजामियानगर में दूसरा दर्दनाक हादसा हो गया। यहां 9 वर्षीय एक बच्चे की दूसरी मंजिल की छत से गिरने के बाद मौत हो गई। बताया जा रहा है कि बच्चा पतंग पकड़ने की कोशिश कर रहा था। पतंग की ओर ध्यान केंद्रित करते हुए वह छत के किनारे तक पहुंच गया और संतुलन बिगड़ने से नीचे गिर पड़ा।

दूसरी मंजिल से गिरने के कारण बच्चे को गंभीर चोटें आईं। हादसे के बाद आसपास मौजूद लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और बच्चे को अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई। हालांकि उसकी हालत गंभीर थी और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। बच्चे की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया।

निजामियानगर की इस घटना ने बच्चों की पतंगबाजी को लेकर विशेष चिंता पैदा कर दी है। पतंग पकड़ने या उड़ाने के उत्साह में बच्चे कई बार छत की ऊंचाई और आसपास के खतरे को नजरअंदाज कर देते हैं। ऊंची इमारतों की छत पर बिना सुरक्षा दीवार या रेलिंग के पास जाना बेहद खतरनाक हो सकता है। ऐसे में अभिभावकों की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।

दो दिनों में हुई इन दो घटनाओं की प्रकृति अलग-अलग है, लेकिन दोनों का संबंध पतंगबाजी से है। एक मामले में सड़क पर पतंग की डोर जानलेवा बनी, जबकि दूसरे में पतंग पकड़ने की कोशिश में बच्चा छत से गिर गया। लगातार हुए हादसों के बाद स्थानीय स्तर पर पतंग उड़ाने के दौरान सावधानी बरतने की अपील की जा रही है।

बेलगाम में पतंगबाजी का शौक खासतौर पर त्योहारों और छुट्टियों के दौरान बढ़ जाता है। इस दौरान घरों की छतों, खुले मैदानों और सड़कों के आसपास पतंग उड़ाते लोग नजर आते हैं। कई बार पतंग की डोर बिजली की तारों, पेड़ों और सड़क मार्गों तक पहुंच जाती है। इससे न केवल पतंग उड़ाने वाले बल्कि राहगीरों और वाहन चालकों के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है।

दो हादसों के बाद लोगों का ध्यान इस ओर गया है कि पतंग उड़ाने के लिए सुरक्षित स्थान का चयन कितना जरूरी है। खुले मैदानों में भीड़ और बिजली के तारों से दूर पतंग उड़ाना अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है। वहीं ऊंची छतों पर पतंग उड़ाते समय बच्चों को विशेष निगरानी में रखना जरूरी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क के आसपास पतंग उड़ाने से बचना चाहिए। यदि पतंग की डोर वाहन मार्ग तक पहुंचती है तो राह चलते लोगों के लिए अचानक खतरा पैदा हो सकता है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह जोखिम और बढ़ जाता है, क्योंकि वे कार की तरह बंद वाहन के भीतर सुरक्षित नहीं होते।

बेलगाम में हुई पहली घटना ने सड़क सुरक्षा का मुद्दा सामने रखा है, जबकि दूसरी घटना ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पतंगबाजी को मनोरंजन तक सीमित रखते हुए सुरक्षा मानकों का पालन करना जरूरी है। खासतौर पर बच्चों को छत के किनारों और ऊंचाई वाले स्थानों से दूर रखना चाहिए।

पुलिस और प्रशासन की ओर से इन घटनाओं के बाद पतंग उड़ाने के स्थानों और इस्तेमाल की जा रही डोर को लेकर भी निगरानी बढ़ाई जा सकती है। स्थानीय स्तर पर लोगों को जागरूक करने और जोखिम वाले स्थानों पर पतंगबाजी रोकने के उपाय किए जा सकते हैं।

इन हादसों ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि पतंग उड़ाने वाले लोग डोर को लेकर कितनी सावधानी बरत रहे हैं। सड़क पर चलने वालों के लिए खतरा पैदा करने वाली डोर से बचाव की जिम्मेदारी केवल वाहन चालकों की नहीं, बल्कि पतंग उड़ाने वालों की भी है। इसी तरह बच्चों की सुरक्षा के लिए परिवार की निगरानी जरूरी है।

निजामियानगर में 9 वर्षीय बच्चे की मौत के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। कुछ ही पल पहले पतंग पकड़ने की कोशिश कर रहा बच्चा हादसे का शिकार हो गया। वहीं गांधीनगर के पास डोर की चपेट में आए युवक की मौत ने सड़क पर पतंग की डोर के खतरे को उजागर कर दिया है।

दोनों घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों में शोक और चिंता का माहौल है। लोगों का कहना है कि पतंगबाजी खुशी और मनोरंजन का जरिया है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही इसे गंभीर दुर्घटना में बदल सकती है।

फिलहाल बेलगाम में दो दिनों में पतंग से जुड़े दो अलग-अलग हादसों में दो लोगों की मौत हो चुकी है। एक युवक की जान डोर की चपेट में आने से गई, जबकि 9 वर्षीय बच्चे की मौत छत से गिरने के कारण हुई। लगातार हुई इन घटनाओं ने पतंगबाजी के दौरान सुरक्षा को लेकर लोगों को सतर्क कर दिया है। खासतौर पर सड़क पर दोपहिया चलाने वालों और छत पर पतंग उड़ाने वाले बच्चों के लिए अतिरिक्त सावधानी जरूरी हो गई है।

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