कर्नाटक

जेल में मोबाइल मिलने पर किरण बेदी ने उठाई जवाबदेही

Ratna Netam
12 Aug 2026 2:23 PM IST
जेल में मोबाइल मिलने पर किरण बेदी ने उठाई जवाबदेही
x
बेंगलुरु : दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा केंद्रीय कारागार में केंद्रीय अपराध शाखा यानी सीसीबी की छापेमारी के दौरान उनकी बैरक से एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किया गया है। हाई सिक्योरिटी जेल में बंद एक कैदी के पास स्मार्टफोन मिलने के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था और तलाशी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने भी जेल प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल उठाते हुए तलाशी व्यवस्था में संभावित लापरवाही को इसकी बड़ी वजह बताया है।
किरण बेदी के मुताबिक किसी कैदी के पास स्मार्टफोन पहुंचना सामान्य स्थिति नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि जेल में प्रवेश के दौरान कैदियों और उनसे मिलने आने वाले लोगों की तलाशी की व्यवस्था होती है। इसके अलावा आधुनिक जेलों में इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम भी लगाए जाते हैं, जिनके जरिए प्रतिबंधित सामान की पहचान की जा सकती है। ऐसे में यदि कोई कैदी एंड्रॉयड फोन लेकर जेल के अंदर पहुंच गया, तो यह तलाशी प्रक्रिया में हुई चूक की ओर इशारा करता है।
उन्होंने इस बात की संभावना जताई कि फोन को किसी तरह छिपाकर जेल के अंदर ले जाया गया होगा। बेदी ने कहा कि यदि किसी प्रतिबंधित वस्तु को छिपाकर अंदर ले जाने में सफलता मिलती है तो यह सवाल उठता है कि उस समय तलाशी की जिम्मेदारी किन अधिकारियों की थी। उनके मुताबिक किसी कैदी के पास ऐसी वस्तु मिलना सीधे तौर पर तलाशी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा दौर में जेलों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा प्रणालियों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में स्मार्टफोन जैसे उपकरण को जेल के अंदर पहुंचाना आसान नहीं होना चाहिए। यदि फिर भी ऐसा हुआ है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उनका कहना था कि किसी कैदी के पास प्रतिबंधित सामान मिलने की स्थिति में यह देखना जरूरी है कि प्रवेश के समय किस स्तर पर सुरक्षा जांच हुई और वहां तैनात अधिकारियों ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया या नहीं।
प्रज्वल रेवन्ना की बैरक से फोन बरामद होने की जानकारी पुलिस महानिदेशक जेल एवं सुधार सेवाएं आलोक कुमार ने दी। उनके अनुसार केंद्रीय अपराध शाखा ने मंगलवार को परप्पना अग्रहारा केंद्रीय जेल में करीब चार से पांच घंटे तक तलाशी अभियान चलाया। यह अभियान हाई प्रोफाइल और अन्य कैदियों की बैरकों को ध्यान में रखते हुए चलाया गया था। इसी तलाशी के दौरान प्रज्वल रेवन्ना की बैरक से एक एंड्रॉयड फोन बरामद किया गया।
जेल प्रशासन के मुताबिक इससे पहले छह अगस्त को भी रेवन्ना की बैरक की तलाशी ली गई थी। उस समय तलाशी के दौरान कोई प्रतिबंधित वस्तु नहीं मिली थी। इसके कुछ ही दिनों बाद दोबारा तलाशी में मोबाइल फोन बरामद होने से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं।
फोन बरामद होने के बाद जेल प्रशासन ने कार्रवाई भी शुरू कर दी है। पुलिस महानिदेशक दक्षिण की रिपोर्ट के आधार पर सहायक अधीक्षक इरन्ना रंगापुर को कर्तव्य में लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। वहीं, बेंगलुरु केंद्रीय कारागार के अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अब यह जांच का विषय है कि फोन जेल के अंदर कैसे पहुंचा, इसका इस्तेमाल किसने किया और क्या इसमें किसी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका रही।
जांच एजेंसियां फोन से जुड़े तकनीकी पहलुओं की भी पड़ताल कर सकती हैं। मोबाइल कब से जेल में था, उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया और उसमें किन लोगों से संपर्क हुआ, इन सवालों के जवाब जांच के दौरान सामने आ सकते हैं। चूंकि मामला एक हाई प्रोफाइल कैदी से जुड़ा है, इसलिए जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष निगरानी की जा रही है।
प्रज्वल रेवन्ना को यौन उत्पीड़न के मामलों के सिलसिले में मई 2024 में गिरफ्तार किया गया था। बाद में एक दुष्कर्म मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया। बेंगलुरु की विशेष अदालत ने अगस्त 2025 में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद से वह परप्पना अग्रहारा केंद्रीय कारागार में बंद हैं।
अब उनकी बैरक से एंड्रॉयड फोन बरामद होने के बाद जेल प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि हाई सिक्योरिटी जेल में बंद कैदी तक मोबाइल फोन कैसे पहुंचा। किरण बेदी ने जिस तलाशी व्यवस्था की ओर इशारा किया है, उस पर भी अब जांच की नजर है। फिलहाल एक अधिकारी के निलंबन और जेल अधीक्षक को नोटिस के बाद यह स्पष्ट है कि मामले को जेल प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। आगे की जांच में यह पता चलेगा कि यह केवल तलाशी में हुई लापरवाही थी या इसके पीछे कोई संगठित व्यवस्था काम कर रही थी।
Next Story