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कर्नाटक के सड़क सुरक्षा अभियान को अवॉर्ड

Kavita2
19 Sept 2026 11:33 AM IST
कर्नाटक के सड़क सुरक्षा अभियान को अवॉर्ड
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बेंगलुरु। कर्नाटक राज्य सड़क सुरक्षा प्राधिकरण (KSRSA) को सड़क हादसों की रोकथाम और तेज रफ्तार के खिलाफ चलाए गए जागरूकता अभियान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। प्राधिकरण ने ‘इंटरनेशनल सेफ्टी मीडिया अवॉर्ड्स 2026’ में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया है। यह पुरस्कार कर्नाटक में वर्ष 2024-25 के दौरान चलाए गए तेज रफ्तार विरोधी अभियान के लिए दिया गया, जिसमें मास मीडिया कैंपेन के साथ सड़कों पर लक्षित और स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाली प्रवर्तन कार्रवाई को जोड़ा गया था।

यह पुरस्कार दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में आयोजित ‘इंजरी प्रिवेंशन एंड सेफ्टी प्रमोशन’ यानी Safety 2026 पर 16वें वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रदान किया गया। सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में कर्नाटक के लिए इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है क्योंकि अभियान में केवल जागरूकता संदेश देने के बजाय व्यवहार में बदलाव लाने के लिए मीडिया और जमीनी प्रवर्तन को एक साथ इस्तेमाल किया गया।

KSRSA की ओर से चलाए गए मास मीडिया अभियान का नाम ‘मोटरसाइकिल रिकंस्ट्रक्शन’ रखा गया था। इसका उद्देश्य वाहन चालकों, खासकर दोपहिया वाहन सवारों को यह समझाना था कि तेज रफ्तार केवल यातायात नियमों के उल्लंघन का मामला नहीं है, बल्कि दुर्घटना होने पर गंभीर चोट और मौत के जोखिम को भी बढ़ाती है।

अभियान में तेज रफ्तार के पीछे के विज्ञान को आम लोगों की समझ में आने वाले तरीके से पेश करने की कोशिश की गई। इसमें यह बताया गया कि वाहन की गति बढ़ने के साथ उसे नियंत्रित करने और सुरक्षित तरीके से रोकने के लिए अधिक दूरी की जरूरत होती है। इसी तरह दुर्घटना की स्थिति में अधिक गति से टक्कर होने पर शरीर पर पड़ने वाला प्रभाव भी गंभीर हो सकता है।

‘मोटरसाइकिल रिकंस्ट्रक्शन’ अभियान के जरिए सड़क दुर्घटना और तेज गति के बीच संबंध को दृश्य माध्यमों से समझाने का प्रयास किया गया। अभियान का मुख्य संदेश वाहन चालकों को निर्धारित स्पीड लिमिट का पालन करने और सुरक्षित गति बनाए रखने के लिए प्रेरित करना था।

KSRSA ने मीडिया अभियान को अकेले नहीं चलाया। इसके साथ राज्य के चयनित इलाकों में तेज रफ्तार के खिलाफ लक्षित और लोगों को साफ तौर पर दिखाई देने वाली प्रवर्तन कार्रवाई भी की गई। इसका उद्देश्य यह संदेश देना था कि स्पीड लिमिट का उल्लंघन करने पर कार्रवाई होने की वास्तविक संभावना है।

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार केवल जागरूकता अभियान चलाने से हमेशा वाहन चालकों के व्यवहार में अपेक्षित बदलाव नहीं आता। वहीं केवल चालान या प्रवर्तन पर निर्भर रहने से भी दीर्घकालिक व्यवहार परिवर्तन चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में जागरूकता और प्रवर्तन को एक साथ लागू करने की रणनीति को महत्वपूर्ण माना जाता है।

कर्नाटक में भी इसी मॉडल पर अभियान तैयार किया गया। एक तरफ लोगों को तेज रफ्तार के जोखिम के बारे में बताया गया, वहीं दूसरी तरफ सड़क पर स्पीड नियमों के पालन की निगरानी बढ़ाई गई। इस संयुक्त रणनीति का बाद में मूल्यांकन भी किया गया ताकि यह समझा जा सके कि अभियान का वाहन चालकों के व्यवहार पर क्या प्रभाव पड़ा।

अभियान की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसका ‘एविडेंस-बेस्ड’ यानी साक्ष्य आधारित दृष्टिकोण रहा। सड़क सुरक्षा संदेश तैयार करने से पहले तेज रफ्तार से जुड़े जोखिम, वाहन चालकों के व्यवहार और दुर्घटनाओं के प्रभाव जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा गया। इसके बाद मीडिया संदेश और प्रवर्तन रणनीति को एक साथ लागू किया गया।

कर्नाटक राज्य सड़क सुरक्षा प्राधिकरण का फोकस सड़क हादसों में होने वाली मौतों और गंभीर चोटों को कम करने पर है। राज्य में तेज रफ्तार, हेलमेट नहीं पहनना, सीट बेल्ट का इस्तेमाल नहीं करना, गलत दिशा में वाहन चलाना और यातायात नियमों का उल्लंघन सड़क सुरक्षा के लिए प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं।

इनमें तेज रफ्तार को विशेष रूप से गंभीर जोखिम माना जाता है। सड़क की स्थिति अच्छी होने या वाहन में आधुनिक सुरक्षा सुविधाएं होने के बावजूद अत्यधिक गति चालक को अचानक पैदा होने वाली स्थिति में प्रतिक्रिया के लिए कम समय देती है।

उदाहरण के तौर पर सड़क पर अचानक कोई पैदल यात्री, पशु या दूसरा वाहन सामने आने की स्थिति में अधिक गति से चल रहे वाहन को रोकना मुश्किल हो सकता है। प्रतिक्रिया समय और ब्रेक लगाने की दूरी मिलकर वाहन की कुल रुकने की दूरी तय करते हैं। गति बढ़ने के साथ यह दूरी भी बढ़ती जाती है।

इसी वैज्ञानिक पहलू को ‘मोटरसाइकिल रिकंस्ट्रक्शन’ अभियान में प्रमुखता से शामिल किया गया। अभियान ने दुर्घटना के बाद होने वाले नुकसान को केवल भावनात्मक संदेश के रूप में दिखाने के बजाय गति और टक्कर के प्रभाव के बीच संबंध को समझाने का प्रयास किया।

अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिलने से KSRSA के इस मॉडल को वैश्विक मंच पर पहचान मिली है। इंटरनेशनल सेफ्टी मीडिया अवॉर्ड्स का उद्देश्य ऐसे मीडिया और संचार अभियानों को पहचान देना है जो चोटों और दुर्घटनाओं की रोकथाम तथा सुरक्षित व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी तरीके अपनाते हैं।

केप टाउन में आयोजित Safety 2026 सम्मेलन में विभिन्न देशों से सड़क सुरक्षा, चोटों की रोकथाम, सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों तथा संस्थाओं ने भाग लिया। ऐसे मंच पर कर्नाटक के अभियान को ब्रॉन्ज मेडल मिलना राज्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

यह सम्मान ऐसे समय मिला है जब देश में सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली मौतों को कम करना बड़ी चुनौती बना हुआ है। सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें बेहतर सड़क डिजाइन, वाहन सुरक्षा, प्रवर्तन, आपातकालीन चिकित्सा और जन जागरूकता जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही हैं।

कर्नाटक का अभियान इस व्यापक रणनीति में वाहन चालकों के व्यवहार को बदलने पर केंद्रित रहा। सड़क सुरक्षा में चालक का व्यवहार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि वाहन चालक स्पीड लिमिट, हेलमेट, सीट बेल्ट और अन्य यातायात नियमों का पालन करें तो गंभीर दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

KSRSA के अभियान में ‘दिखाई देने वाला प्रवर्तन’ भी एक महत्वपूर्ण पहलू था। इसका अर्थ है कि सड़क पर नियमों के अनुपालन की निगरानी और कार्रवाई ऐसी हो कि वाहन चालकों को स्पष्ट रूप से महसूस हो कि स्पीड लिमिट की जांच की जा रही है। इससे नियमों के पालन को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।

इसके साथ मीडिया के जरिए लोगों को यह समझाने की कोशिश की गई कि स्पीड लिमिट केवल जुर्माने से बचने के लिए नहीं बल्कि खुद और सड़क पर मौजूद दूसरे लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी है।

अभियान के मूल्यांकन ने भी पुरस्कार के लिए इसकी दावेदारी को मजबूत किया। किसी सड़क सुरक्षा अभियान की सफलता केवल उसके विज्ञापन की पहुंच से नहीं बल्कि इस बात से भी तय होती है कि उसने लोगों के ज्ञान, सोच और वास्तविक व्यवहार पर कितना प्रभाव डाला।

‘इंटरनेशनल सेफ्टी मीडिया अवॉर्ड्स 2026’ में मिला ब्रॉन्ज मेडल अब कर्नाटक के लिए इस मॉडल को और व्यापक स्तर पर इस्तेमाल करने का अवसर भी देता है। भविष्य में तेज रफ्तार के अलावा हेलमेट, सीट बेल्ट, नशे में वाहन चलाने और अन्य जोखिम वाले व्यवहारों पर भी इसी तरह जागरूकता और प्रवर्तन को जोड़कर अभियान चलाए जा सकते हैं।

कर्नाटक राज्य सड़क सुरक्षा प्राधिकरण के लिए यह सम्मान केवल एक मीडिया कैंपेन की उपलब्धि नहीं बल्कि सड़क सुरक्षा में साक्ष्य आधारित रणनीति को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान के रूप में देखा जा रहा है। ‘मोटरसाइकिल रिकंस्ट्रक्शन’ के जरिए दिया गया संदेश स्पष्ट है कि सड़क पर गति का चुनाव सीधे सुरक्षा से जुड़ा है और निर्धारित स्पीड लिमिट का पालन गंभीर दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने में अहम भूमिका निभाता है।

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