कर्नाटक

कर्नाटक की ग्राम पंचायतों को मिलेगी आर्थिक मजबूती

Ratna Netam
14 Oct 2026 9:19 PM IST
कर्नाटक की ग्राम पंचायतों को मिलेगी आर्थिक मजबूती
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बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने राज्य की ग्राम पंचायतों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने की घोषणा की है। बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पंचायतों को वित्तीय रूप से सक्षम बनाने और विकेंद्रीकृत शासन को मजबूत करने के लिए आवश्यक सुधार लागू करेगी। इसके लिए पांचवें राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों की समीक्षा की जाएगी और ग्रामीण विकास मंत्री की अध्यक्षता में एक विशेष समिति गठित की जाएगी। यह समिति वित्तीय संसाधनों के बंटवारे और प्रशासनिक सुधारों से संबंधित सिफारिशों का अध्ययन करके अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने अपने आधिकारिक आवासीय कार्यालय 'कृष्णा' में कर्नाटक राज्य विकेंद्रीकरण योजना एवं विकास समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है, ताकि स्थानीय विकास कार्यों के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता बेहतर हो सके।मुख्यमंत्री ने बताया कि पांचवें राज्य वित्त आयोग की रिपोर्ट में पंचायतों की आर्थिक स्थिति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। इन सिफारिशों में से कौन से प्रस्ताव व्यावहारिक रूप से लागू किए जा सकते हैं, इसकी जांच के लिए ग्रामीण विकास मंत्री के नेतृत्व में समिति बनाई जाएगी।
समिति वित्तीय बंटवारे, प्रशासनिक सुधारों और स्थानीय निकायों की कार्यक्षमता से जुड़े मुद्दों का अध्ययन करेगी। इसके बाद सरकार को रिपोर्ट सौंपी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे के निर्णय लिए जाएंगे।मुख्यमंत्री शिवकुमार ने पांचवें राज्य वित्त आयोग की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए बताया कि ग्राम पंचायतों के लिए 1,261 करोड़ रुपये, तालुक पंचायतों के लिए 557 करोड़ रुपये और जिला पंचायतों के लिए 183 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पंचायतों की वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए संसाधनों का उचित बंटवारा आवश्यक है।
बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी स्थानीय निकायों के कामकाज को बेहतर बनाने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी स्थानीय निकायों को संविधान के 74वें संशोधन के प्रावधानों के अनुसार प्रभावी ढंग से कार्य करना चाहिए। इसके लिए संबंधित कानूनों में आवश्यक बदलावों पर विशेषज्ञों से विचार-विमर्श किया जाएगा।शिवकुमार ने बताया कि राष्ट्रीय विधि महाविद्यालय के विशेषज्ञों से कानूनी संशोधनों को लेकर परामर्श लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार ग्राम सभाओं के माध्यम से ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं पर विचार किया जाता है, उसी तरह शहरी क्षेत्रों में वार्ड सभाओं की भागीदारी बढ़ाई जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिला, तालुक और ग्राम स्तर पर योजना समितियों की बैठकें हर तीन महीने में आयोजित की जाएं। इन बैठकों के बाद संबंधित रिपोर्ट भी प्रस्तुत की जाए, ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा हो सके।उन्होंने जिला और तालुक स्तर पर परियोजना प्रबंधन इकाइयां स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की बात भी कही। इन इकाइयों का उद्देश्य विकास योजनाओं की निगरानी और उनके बेहतर क्रियान्वयन में सहायता करना होगा।
मुख्यमंत्री ने राज्य बजट में घोषित 'जनरा योजना' का भी उल्लेख किया। इस पहल के तहत स्थानीय स्तर पर लोगों की जरूरतों और मांगों को एकत्र करके उन्हें राज्य की बजट प्रक्रिया में शामिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।इसके लिए ग्रामीण विकास और शहरी विकास विभागों को आवश्यक दिशानिर्देश जारी करने तथा सॉफ्टवेयर विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली जरूरतों को योजनाओं और बजट से जोड़ना है।बैठक के दौरान शिवकुमार ने सभी विभागों को अपनी जिम्मेदारियों का स्पष्ट विवरण तैयार करने के निर्देश भी दिए। इसके तहत ग्राम पंचायतों, तालुक पंचायतों और जिला पंचायतों से जुड़ी योजनाओं को लागू करने में किस विभाग की क्या भूमिका होगी, इसका निर्धारण किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कर्नाटक पंचायत प्रशासनिक सेवा स्थापित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस संबंध में संबंधित विभाग के मंत्री से प्रस्ताव मांगा जाएगाइसके अलावा राज्य सरकार ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों को वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी राजस्व में हिस्सेदारी दिलाने के लिए जीएसटी परिषद के समक्ष प्रस्ताव रखने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।शिवकुमार ने अधिकारियों को केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना से उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर गांवों की आबादी क्षेत्र की सीमाएं निर्धारित करने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए। इसके लिए पंचायत राज और राजस्व विभाग को आपसी समन्वय से काम करने को कहा गया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा उद्योगों से कर वसूलने का अधिकार ग्राम पंचायतों से वापस लिए जाने के बाद पंचायतों की आय प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि संबंधित कानून के अनुसार बोर्ड द्वारा एकत्र संपत्ति कर का 30 प्रतिशत ग्राम पंचायतों के साथ साझा किया जाना है।उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अब तक वसूले गए कर और ग्राम पंचायतों को दी गई राशि का पूरा विवरण प्रस्तुत किया जाए। इससे राजस्व बंटवारे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि सरकार पंचायतों की आर्थिक मजबूती और स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं को प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। ग्रामीण विकास मंत्री की अध्यक्षता में गठित होने वाली समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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