कर्नाटक

मेकेदातु प्रोजेक्ट पर कर्नाटक का बड़ा कदम

Kavita2
1 July 2026 3:24 PM IST
मेकेदातु प्रोजेक्ट पर कर्नाटक का बड़ा कदम
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Karnataka कर्नाटक: सरकार ने लंबे समय से चर्चा में रहे मेकेदातु बैलेंसिंग रिज़र्वॉयर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कावेरी वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी क्षेत्र के भीतर प्रस्तावित परियोजना के लिए बोरहोल सर्वे करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद परियोजना को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।

मंगलवार को आयोजित राज्य वन्यजीव बोर्ड (State Wildlife Board) की बैठक की अध्यक्षता स्वयं मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने की। बैठक में मेकेदातु प्रोजेक्ट से जुड़े विभिन्न तकनीकी और पर्यावरणीय पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बोरहोल सर्वे से संबंधित प्रस्ताव को बिना देरी के राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (National Board for Wildlife) को मंजूरी के लिए भेजा जाए।

यह परियोजना कावेरी नदी पर प्रस्तावित है और इसका उद्देश्य बैलेंसिंग रिज़र्वॉयर बनाकर जल प्रबंधन को बेहतर करना बताया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इस परियोजना से बेंगलुरु और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति को मजबूत किया जा सकेगा। हालांकि यह परियोजना लंबे समय से विवादों और राजनीतिक बहसों के केंद्र में रही है।

बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि मेकेदातु प्रोजेक्ट के लिए सभी आवश्यक अनुमतियों की प्रक्रिया को तेज किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर किसी भी प्रकार की देरी परियोजना की प्रगति को प्रभावित कर सकती है, इसलिए सभी विभाग समन्वय के साथ काम करें।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से यह भी कहा कि तमिलनाडु सरकार द्वारा इस परियोजना पर उठाई गई आपत्तियों के तकनीकी पहलुओं का गहराई से अध्ययन किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी विवादित बिंदुओं को वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर हल करने का प्रयास किया जाना चाहिए ताकि परियोजना को लेकर अनावश्यक बाधाएं न रहें।

मेकेदातु प्रोजेक्ट को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच पहले से ही जल बंटवारे और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर मतभेद रहे हैं। तमिलनाडु का कहना है कि इस परियोजना से कावेरी नदी के निचले क्षेत्रों में जल प्रवाह प्रभावित हो सकता है, जबकि कर्नाटक का तर्क है कि यह परियोजना केवल अतिरिक्त जल भंडारण और पेयजल आपूर्ति के उद्देश्य से बनाई जा रही है।

सरकार के अनुसार, बोरहोल सर्वे का उद्देश्य परियोजना स्थल की भूगर्भीय स्थिति और संरचनात्मक व्यवहार्यता का अध्ययन करना है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि प्रस्तावित रिज़र्वॉयर निर्माण क्षेत्र तकनीकी रूप से कितना उपयुक्त है और पर्यावरणीय दृष्टि से इसका क्या प्रभाव हो सकता है।

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने बैठक में कहा कि राज्य की जल सुरक्षा और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इस परियोजना को आगे बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सभी आवश्यक रिपोर्ट और अध्ययन समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं ताकि परियोजना के अगले चरणों को मंजूरी के लिए भेजा जा सके।

राज्य सरकार का मानना है कि मेकेदातु प्रोजेक्ट से बेंगलुरु महानगर क्षेत्र में जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। तेजी से बढ़ती आबादी और शहरीकरण के कारण पानी की मांग लगातार बढ़ रही है, ऐसे में यह परियोजना भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

वहीं पर्यावरण विशेषज्ञों और कुछ सामाजिक संगठनों ने इस परियोजना को लेकर पर्यावरणीय प्रभाव और वन्यजीव क्षेत्र पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि कावेरी वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी बड़े निर्माण कार्य से पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो सकता है।

इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने यह संकेत दिया है कि परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले सभी कानूनी, पर्यावरणीय और तकनीकी प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा। सरकार का कहना है कि किसी भी निर्णय में पारदर्शिता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी जाएगी।

अब सभी की नजर राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की मंजूरी और आगे की केंद्र सरकार की प्रक्रियाओं पर टिकी हुई है। यदि आवश्यक अनुमतियां समय पर मिल जाती हैं, तो मेकेदातु प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण प्रगति मानी जाएगी।

कुल मिलाकर, कर्नाटक सरकार का यह कदम मेकेदातु परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम प्रशासनिक पहल के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में राज्य की जल नीति और क्षेत्रीय राजनीति दोनों पर प्रभाव डाल सकता है।

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