
कर्नाटक: कावेरी जल बंटवारे को लेकर जारी विवाद के बीच कर्नाटक सरकार ने राज्य की आगे की रणनीति तय करने के लिए रविवार को सर्वदलीय उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राज्य के किसानों और आम नागरिकों के हितों की रक्षा करना सरकार की पहली जिम्मेदारी है।
बैठक के दौरान कावेरी नदी के पानी के बंटवारे से जुड़े कानूनी और राजनीतिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का रुख पूरी तरह स्पष्ट है और वह कर्नाटक के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगी। उन्होंने जोर दिया कि पीने के पानी की जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी, साथ ही किसानों की आजीविका को भी सुरक्षित रखा जाएगा।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक बयान जारी कर सरकार की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि कावेरी जल विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होकर राज्य के हितों के लिए काम करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कावेरी केवल एक नदी का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह लाखों लोगों के जीवन, खेती और राज्य की जल सुरक्षा से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के लोगों को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध हो और किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार जल संसाधन मिल सकें।
कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी जल बंटवारे का विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। दोनों राज्य नदी के पानी के इस्तेमाल को लेकर अपने-अपने दावे और चिंताएं सामने रखते रहे हैं। बारिश की स्थिति, जलाशयों में पानी की उपलब्धता और किसानों की जरूरतों के आधार पर समय-समय पर यह विवाद फिर उभरता रहा है।
सर्वदलीय बैठक में राज्य के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया और कावेरी मुद्दे पर सरकार की रणनीति को लेकर अपने सुझाव दिए। बैठक का उद्देश्य राज्य के राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाना और केंद्र सरकार तथा संबंधित संस्थाओं के सामने कर्नाटक का पक्ष मजबूती से रखने के लिए साझा रणनीति तैयार करना था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कानूनी प्रक्रिया का भी पूरी तरह पालन करेगी और जरूरत पड़ने पर अदालतों तथा संबंधित प्राधिकरणों के सामने कर्नाटक के हितों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं कर सकती और जल उपलब्धता को लेकर हर जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
कावेरी जल विवाद को लेकर कर्नाटक में किसानों की चिंता लगातार बनी हुई है। कई किसान संगठन यह मांग करते रहे हैं कि राज्य में उपलब्ध जल संसाधनों का उपयोग पहले स्थानीय जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाए। उनका कहना है कि सिंचाई और खेती के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होना जरूरी है, क्योंकि बड़ी संख्या में किसान कावेरी नदी और उससे जुड़े जल स्रोतों पर निर्भर हैं।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री के बयान को राज्य में राजनीतिक एकजुटता की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। कावेरी जैसे अंतरराज्यीय मुद्दे पर अक्सर राज्य सरकारों को राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सभी दलों को साथ लेकर चलने की कोशिश को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डी.के. शिवकुमार ने यह भी संकेत दिया कि सरकार किसानों और आम लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य के अधिकारों की रक्षा करना और लोगों की जरूरतों को पूरा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
फिलहाल, कर्नाटक सरकार कावेरी जल विवाद को लेकर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर अपनी रणनीति तैयार कर रही है। सर्वदलीय बैठक के बाद अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि राज्य सरकार आगे कौन से कदम उठाती है और केंद्र तथा संबंधित जल प्राधिकरणों के समक्ष अपना पक्ष किस तरह रखती है।





