
बेंगलुरु: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और मौसम विशेषज्ञों ने इसे मॉनसून का विफल दौर बताया है, क्योंकि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की शुरुआत के बाद पहले महीने में कर्नाटक में बारिश में 41% की कमी दर्ज की गई है।
विशेषज्ञ अल नीनो (El Nino) के असर को ही एकमात्र कारण नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में कम मौसमी सिस्टम बने। उन्होंने चेतावनी दी कि इसका असर राज्य और पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि 2023 में भी ऐसी ही स्थिति देखी गई थी और उसका असर 2024 तक बना रहा। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से सूखे से निपटने के लिए लंबी अवधि की योजनाएं बनाने का भी आग्रह किया, क्योंकि अल नीनो की घटनाएं और उनके असर अब ज़्यादा बार देखने को मिल रहे हैं।
IMD के आंकड़ों के अनुसार, 162.5 मिमी के सामान्य अनुमान के मुकाबले राज्य में केवल 95.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा, 89 मिमी के सामान्य अनुमान के मुकाबले बेंगलुरु में 25 जून तक केवल 66 मिमी बारिश हुई है।





