
बेंगलुरु। कर्नाटक पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर होने के कारण भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। दोनों प्रमुख दल निर्दलीय उम्मीदवारों को चुनाव मैदान से हटने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि उनके उम्मीदवारों के वोटों का विभाजन रोका जा सके। नामांकन प्रक्रिया 6 अक्टूबर को समाप्त हुई थी। इस दौरान कुल 18 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्रों के 36 सेट दाखिल किए। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच के दौरान सभी उम्मीदवारों के कागजात वैध पाए गए थे।
नामांकन वापस लेने की दो दिवसीय अवधि के पहले दिन गुरुवार को किसी भी उम्मीदवार ने अपनी उम्मीदवारी वापस नहीं ली। अब शुक्रवार, 9 अक्टूबर को नामांकन वापस लेने का आखिरी दिन है। ऐसे में दोनों दलों की नजर उन उम्मीदवारों पर है, जिनके चुनाव मैदान में बने रहने से उनके प्रत्याशियों के वोट प्रभावित हो सकते हैं।
धारवाड़, गडग, हावेरी और उत्तर कन्नड़ जिलों में फैले इस निर्वाचन क्षेत्र में करीब 90 हजार मतदाता हैं। मतदाताओं की संख्या अपेक्षाकृत कम होने के कारण यहां उम्मीदवारों के बीच मुकाबले में वोटों का बंटवारा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसी वजह से BJP और कांग्रेस चुनाव मैदान में उम्मीदवारों की संख्या घटाने के प्रयास में जुटी हैं।
18 उम्मीदवारों ने दाखिल किए नामांकन
कर्नाटक पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया 6 अक्टूबर को पूरी हुई। इस दौरान 18 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्रों के कुल 36 सेट दाखिल किए। इसके अगले दिन 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच की गई, जिसमें सभी के दस्तावेज वैध पाए गए।
इसके बाद उम्मीदवारों को नामांकन वापस लेने का अवसर दिया गया। दो दिन की इस अवधि के पहले दिन, गुरुवार को किसी भी प्रत्याशी ने नाम वापस नहीं लिया। अब शुक्रवार को नाम वापसी की प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी और इसके बाद चुनाव मैदान में बने रहने वाले उम्मीदवारों की अंतिम तस्वीर स्पष्ट होगी।
दोनों प्रमुख राजनीतिक दल इस प्रक्रिया को महत्वपूर्ण मान रहे हैं। उनकी कोशिश है कि ऐसे उम्मीदवारों को मैदान से हटने के लिए राजी किया जाए, जिनकी मौजूदगी से उनके प्रत्याशियों के समर्थन में सेंध लग सकती है।
वोटों का बंटवारा रोकना BJP-कांग्रेस की प्राथमिकता
BJP और कांग्रेस दोनों इस चुनाव में अपने-अपने उम्मीदवारों की स्थिति मजबूत करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। राजनीतिक दलों को आशंका है कि निर्दलीय प्रत्याशियों के मैदान में बने रहने से मतदाताओं के वोट अलग-अलग उम्मीदवारों में बंट सकते हैं।
इसी कारण दोनों दल स्वतंत्र उम्मीदवारों से बातचीत कर उन्हें नामांकन वापस लेने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि अब तक कितने निर्दलीय उम्मीदवारों से संपर्क किया गया है और उनमें से किसी ने नाम वापस लेने का संकेत दिया है या नहीं।
नाम वापसी के अंतिम दिन दोनों पार्टियों के प्रयास तेज रहने की संभावना है। अंतिम सूची सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने उम्मीदवार मुकाबले में बने हुए हैं और चुनाव किस स्वरूप में आगे बढ़ेगा।
चार जिलों में फैला है निर्वाचन क्षेत्र
कर्नाटक पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में धारवाड़, गडग, हावेरी और उत्तर कन्नड़ जिले शामिल हैं। इस क्षेत्र में करीब 90 हजार मतदाता अपने प्रतिनिधि के चुनाव में भाग लेंगे।
यह एक अपेक्षाकृत छोटा निर्वाचन क्षेत्र है, जहां उम्मीदवारों के बीच मतों का अंतर चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए केवल अपने समर्थकों को एकजुट रखना ही नहीं, बल्कि संभावित वोट विभाजन को रोकना भी अहम माना जा रहा है।
BJP और कांग्रेस दोनों इस बात पर ध्यान दे रही हैं कि चुनाव में उनके उम्मीदवारों के सामने अनावश्यक प्रतिस्पर्धा कम हो सके। निर्दलीय प्रत्याशियों के चुनाव मैदान में बने रहने या हटने से मुकाबले की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
शुक्रवार को स्पष्ट होगी चुनावी तस्वीर
नामांकन वापसी की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर है। गुरुवार को किसी भी उम्मीदवार ने नामांकन वापस नहीं लिया था, इसलिए अब शुक्रवार की प्रक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
नामांकन वापसी समाप्त होने के बाद चुनाव में हिस्सा लेने वाले उम्मीदवारों की अंतिम संख्या सामने आएगी। इसके आधार पर BJP और कांग्रेस को अपने चुनावी मुकाबले की स्थिति का अधिक स्पष्ट आकलन करने का अवसर मिलेगा।
फिलहाल, दोनों प्रमुख दल निर्दलीय उम्मीदवारों को मनाने और संभावित वोट विभाजन रोकने के प्रयास में जुटे हैं। करीब 90 हजार मतदाताओं वाले इस निर्वाचन क्षेत्र में नामांकन वापसी के अंतिम दिन होने वाली गतिविधियां चुनावी समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती हैं। हालांकि, अंतिम परिणाम और उम्मीदवारों की स्थिति का आकलन मतगणना के बाद ही किया जा सकेगा।





