
Karnataka कर्नाटक: केंद्रीय फंड को लेकर राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। राज्य सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि केंद्र की ओर से अपेक्षित वित्तीय सहायता नहीं मिल रही है। वहीं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कर्नाटक को यूपीए सरकार के 10 वर्षों की तुलना में वर्तमान में कहीं अधिक फंड प्राप्त हो रहा है।
बेंगलुरु में आयोजित भाजपा के “विकसित भारत संकल्प समावेश” कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के वित्त आयोग के आंकड़े इस बात को स्पष्ट करते हैं कि कर्नाटक को बड़े पैमाने पर धनराशि दी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2014 से 2026 के बीच कर्नाटक को टैक्स और अन्य हस्तांतरण के रूप में लगभग 4 लाख करोड़ रुपये दिए गए हैं, जो यूपीए सरकार के कार्यकाल की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक है।
निर्मला सीतारमण ने अपने संबोधन में कहा कि 2014 से पहले यूपीए सरकार के 10 वर्षों में कर्नाटक को मिलने वाली राशि की तुलना में वर्तमान में कई गुना अधिक फंड उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने बताया कि इसी अवधि में राज्य को 2.71 लाख करोड़ रुपये अनुदान और सहायता के रूप में दिए गए हैं, जबकि यूपीए के 10 वर्षों में यह राशि लगभग 60 हजार करोड़ रुपये के आसपास थी।
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि एक वर्ष के भीतर ही कर्नाटक को यूपीए सरकार के पूरे 10 साल के मुकाबले 76 प्रतिशत अधिक फंड प्राप्त हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार राज्यों को मजबूत करने के लिए पारदर्शी तरीके से संसाधनों का वितरण कर रही है।
इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में फिर से बहस तेज हो गई है। जहां केंद्र सरकार अपने आंकड़ों के जरिए यह साबित करने की कोशिश कर रही है कि कर्नाटक को पर्याप्त और बढ़ा हुआ फंड मिल रहा है, वहीं राज्य सरकार अपने वित्तीय दावों पर कायम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फंड आवंटन को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच अक्सर अलग-अलग व्याख्याएं सामने आती हैं, जिससे राजनीतिक विवाद पैदा होता है। कर्नाटक का मामला भी इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।
फिलहाल दोनों पक्षों के दावों के बीच सियासी बयानबाजी जारी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।





