
बेंगलुरु। कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष और सघन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि वोटर लिस्ट में सुधार का काम पूरी पारदर्शिता के साथ नहीं किया जा रहा है। कांग्रेस के संगठन महासचिव K.C. वेणुगोपाल ने बुधवार को दावा किया कि राज्य में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं और कई अन्य मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया है।
नए नियुक्त जिला कांग्रेस अध्यक्षों के साथ बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में वेणुगोपाल ने कहा कि कर्नाटक में कुल 5.54 करोड़ मतदाताओं में से 1,07,96,415 नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया बेहद गंभीर विषय है और कांग्रेस जिला स्तर पर इसकी निगरानी करेगी।
वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया के दौरान पर्याप्त जानकारी और पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतदाता सूची की शुद्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि चुनाव प्रक्रिया इसी आधार पर संचालित होती है।
उन्होंने कहा कि लगभग 43 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। कांग्रेस नेता ने आशंका जताई कि यदि प्रक्रिया इसी तरह आगे बढ़ती है तो इन मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और जिला स्तर पर नेताओं को इसकी जिम्मेदारी दी गई है।
चुनाव आयोग पर लगाया जवाब नहीं देने का आरोप
कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों की ओर से उठाए गए सवालों और शिकायतों पर चुनाव आयोग की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना सभी संस्थाओं की जिम्मेदारी है।
वेणुगोपाल ने कहा कि चुनाव जनता के विश्वास और जनादेश के आधार पर जीते जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर योग्य मतदाता का नाम मतदाता सूची में होना जरूरी है और किसी भी मतदाता को बिना उचित प्रक्रिया के सूची से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।
जिला स्तर पर कांग्रेस रखेगी नजर
कांग्रेस नेता ने बताया कि पार्टी ने नए जिला अध्यक्षों को मतदाता सूची सुधार प्रक्रिया पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिला स्तर के पदाधिकारी इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाएंगे और जहां भी किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका होगी, वहां पार्टी अपनी बात रखेगी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। नए जिला अध्यक्षों की कार्यप्रणाली की समीक्षा भी की जाएगी। वेणुगोपाल ने बताया कि करीब छह महीने बाद सभी जिला अध्यक्षों के काम की समीक्षा होगी और जिन नेताओं का प्रदर्शन अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं होगा, उनमें बदलाव किया जा सकता है।
कांग्रेस ने संगठन को मजबूत करने पर दिया जोर
बैठक के दौरान कांग्रेस ने आगामी राजनीतिक गतिविधियों और संगठन विस्तार को लेकर भी चर्चा की। वेणुगोपाल ने कहा कि जिला अध्यक्ष पार्टी की रीढ़ होते हैं और उन्हें जनता से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहना होगा।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और लोगों की समस्याओं को उठाने पर ध्यान देगी। उन्होंने जिला अध्यक्षों से कहा कि वे पार्टी संगठन के साथ-साथ लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दों पर भी सतर्क रहें।
मतदाता सूची सुधार को लेकर बढ़ी राजनीतिक गर्मी
कर्नाटक में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर कांग्रेस के आरोपों के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस जहां इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रही है, वहीं चुनाव से जुड़े मामलों में अंतिम निर्णय निर्वाचन अधिकारियों और चुनाव आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत होता है।
मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन की प्रक्रिया के दौरान दावे और आपत्तियों का प्रावधान होता है। राजनीतिक दल अक्सर चुनाव से पहले मतदाता सूची की समीक्षा करते हैं ताकि उनके समर्थकों और आम मतदाताओं के नाम सही तरीके से दर्ज रहें।
फिलहाल कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह कर्नाटक के सभी जिलों में इस प्रक्रिया पर नजर रखेगी और मतदाता सूची से जुड़े मामलों को संगठन स्तर पर उठाएगी। वहीं, इस मुद्दे पर आगे राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है।





