
Karnataka कर्नाटक: राज्य की ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन्स की ट्रेड यूनियनों की जॉइंट एक्शन कमेटी ने 20 मई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला किया है। यह निर्णय कर्मचारियों की वेतन बढ़ोतरी और सरकार की नीतियों से जुड़े विवाद के बाद लिया गया है।
KSRTC सहित राज्य की चारों ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन्स के कर्मचारी लंबे समय से वेतन संशोधन की मांग कर रहे हैं। यूनियनों का कहना है कि सरकार ने कर्मचारियों के बेसिक वेतन में केवल 12.5 प्रतिशत बढ़ोतरी का एकतरफा फैसला किया है, जबकि उनकी मांग 25 प्रतिशत वेतन वृद्धि की थी।
इस मुद्दे पर बुधवार को KSRTC स्टाफ एंड वर्कर्स फेडरेशन की अध्यक्ष ज्योति अनंतसुब्बाराव की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विभिन्न यूनियन प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक के बाद हड़ताल का औपचारिक ऐलान किया गया।
इस निर्णय की जानकारी बाद में जॉइंट एक्शन कमेटी के सदस्यों द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में ज्योति अनंतसुब्बाराव के साथ विजया भास्कर डीए और बी. जयदेवराज उर्स भी मौजूद रहे। उन्होंने सरकार के फैसले पर नाराजगी जताते हुए इसे कर्मचारियों के साथ अन्यायपूर्ण बताया।
यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने ट्रांसपोर्ट कर्मचारियों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया है। उनका कहना है कि चार साल पहले सरकार ने 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार अन्य सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में 27.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी, लेकिन ट्रांसपोर्ट कर्मचारियों के मामले में समान नीति लागू नहीं की गई।
इसके साथ ही यूनियनों ने यह भी मांग रखी है कि सरकार द्वारा 18 फरवरी को जारी आदेश में संशोधन किया जाए। उनका कहना है कि वेतन वृद्धि को 1 जनवरी 2025 के बजाय 1 जनवरी 2024 से प्रभावी किया जाना चाहिए, ताकि कर्मचारियों को बकाया लाभ मिल सके। लेकिन इस मांग पर सरकार की ओर से अब तक कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
यूनियन प्रतिनिधियों ने बताया कि कई दौर की बातचीत और ज्ञापनों के बावजूद सरकार ने उनकी मुख्य मांगों पर ध्यान नहीं दिया, जिसके कारण अब उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। जॉइंट एक्शन कमेटी का कहना है कि यह हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक सरकार उनकी मांगों पर स्पष्ट और संतोषजनक निर्णय नहीं लेती।
हड़ताल के ऐलान के बाद राज्य में परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। अगर 20 मई से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होती है, तो बस सेवाओं पर बड़ा असर पड़ सकता है, जिससे आम यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
फिलहाल सभी की निगाहें सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं, क्योंकि आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना है।





