
Karnataka कर्नाटक : प्रदेश में सबसे ज्यादा भूस्खलन वाले जिले में बरसात का मौसम शुरू हो गया है, प्रशासन पर भूस्खलन रोकने के लिए स्थायी उपाय करने में विफल रहने के आरोप लग रहे हैं। पिछले साल हुई त्रासदियों के बाद भी जिला प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई न किए जाने से लोगों में नाराजगी है। पिछले एक दशक में जिले में 588 भूस्खलन हो चुके हैं। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के विशेषज्ञों ने जिले में 439 स्थानों पर भूस्खलन का खतरा होने की रिपोर्ट दिए तीन साल हो चुके हैं। हालांकि, अभी तक भूस्खलन वाले कुछ ही स्थलों पर अवरोधक बनाए गए हैं। इसके अलावा सुरक्षा के कोई उपाय नहीं हैं। करवार के मंड्राली में रिटेनिंग वॉल बनने के बावजूद पिछली बरसात में भूस्खलन हुआ, जिससे हाईवे और घरों पर मिट्टी के ढेर लग गए। वहां अभी भी चिंता बनी हुई है। अंशी घाट पर गेब्रियल वॉल बनने के बावजूद भी लगातार भूस्खलन हो रहा है। लोगों का आरोप है कि अधिकारियों द्वारा बैठकें कर भूस्खलन रोकने के उपायों पर चर्चा करने के बावजूद मौके पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।





