
Karnataka कर्नाटक: राजधानी बेंगलुरु के विकास को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मंगलवार को बीजेपी नेता और बेंगलुरु दक्षिण से सांसद तेजस्वी सूर्या ने राज्य की कांग्रेस सरकार से कई अहम मुद्दों पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि शहर के विकास के लिए केवल नारे नहीं, बल्कि ठोस प्रशासनिक सुधारों की जरूरत है।
बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा से मुलाकात के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए तेजस्वी सूर्या ने कहा कि राज्य सरकार को अधूरे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि नए प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले पहले से चल रहे कार्यों को पूरा करना जरूरी है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि सड़क निर्माण कार्यों और सड़कों के गड्ढों के रखरखाव को लेकर एक ‘श्वेत पत्र’ (white paper) जारी किया जाए, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके और जनता को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके।
सूर्या ने कहा कि बेंगलुरु के विकास के लिए केवल घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि संस्थागत तालमेल और प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार द्वारा घोषित 30 से अधिक परियोजनाओं के अधूरे होने पर चिंता जताई और कहा कि इन परियोजनाओं में देरी शहर के विकास को प्रभावित कर रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने राज्य सरकार को शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसपोर्ट, आवास, जल सुरक्षा और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े 15-सूत्रीय एजेंडा का एक विस्तृत प्रस्ताव सौंपा है। उनका कहना है कि यह प्रस्ताव बेंगलुरु के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी सूर्या ने कहा, “मैंने कृष्णा बायरे गौड़ा से कहा था कि अगर राज्य सरकार बेंगलुरु के हित में कोई भी सही कदम उठाती है, तो एक सांसद और नागरिक के रूप में हम पूरा सहयोग करेंगे।”
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि बेंगलुरु में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। उन्होंने बैंगलोर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMRCL), बैंगलोर डेवलपमेंट अथॉरिटी (BDA), बैंगलोर मेट्रोपॉलिटन लैंड ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (BMLTA) और कर्नाटक रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट लिमिटेड (KRIDL) जैसी संस्थाओं के बीच समन्वय की कमी को एक बड़ी समस्या बताया।
सूर्या ने कहा कि इन संस्थाओं के बीच एकीकृत व्यवस्था (unified mechanism) की कमी के कारण परियोजनाओं में देरी हो रही है और विकास कार्य बाधित हो रहे हैं।
उन्होंने मेट्रो विस्तार में तेजी लाने और सरकारी खर्च में पारदर्शिता बढ़ाने की भी मांग की। उनका कहना था कि बेंगलुरु जैसे तेजी से बढ़ते शहर में इंफ्रास्ट्रक्चर को समय पर पूरा करना बेहद जरूरी है, ताकि नागरिकों को बेहतर परिवहन और सुविधाएं मिल सकें।
राजनीतिक हलकों में उनके इस बयान को बेंगलुरु के विकास मॉडल पर एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से इन सुझावों पर आगे क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर भी नजर बनी हुई है।
फिलहाल, बेंगलुरु के विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार को लेकर दोनों पक्षों के बीच चर्चा जारी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और भी बयान सामने आने की संभावना है।





