
Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक हाई कोर्ट ने हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर डिपार्टमेंट के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एम.बी. नागराज का सस्पेंशन ऑर्डर रद्द कर दिया है। उन्हें बेंगलुरु के बोवरिंग हॉस्पिटल कंपाउंड की दीवार गिरने की घटना के बाद निलंबित किया गया था, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई थी। अदालत ने माना कि जांच रिपोर्ट आने से पहले किसी अधिकारी को सस्पेंड करना उचित नहीं था।
इस मामले की सुनवाई कर्नाटक हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच ने की, जिसमें जस्टिस सूरज गोविंदराज और जस्टिस के. मनमाधा राव शामिल थे। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि जब तक जांच कमेटियों की रिपोर्ट सामने नहीं आती, तब तक यह तय करना जल्दबाजी होगी कि किसी अधिकारी की लापरवाही थी या नहीं।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में पहले ही दो अलग-अलग जांच कमेटियां गठित की जा चुकी हैं। एक कमेटी प्रशासनिक जांच के लिए और दूसरी तकनीकी समीक्षा के लिए बनाई गई है। कोर्ट ने कहा कि इन कमेटियों को अपनी रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से बताना होगा कि याचिकाकर्ता की तरफ से कोई लापरवाही हुई है या नहीं। यदि रिपोर्ट में गड़बड़ी या जिम्मेदारी तय होती है, तो सरकार के पास कर्नाटक सिविल सेवा नियम (CCA Provisions) के तहत कार्रवाई करने का पूरा अधिकार रहेगा।
इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) ने पहले ही बेंगलुरु सिटी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में एक जांच टीम गठित कर दी है। इसके अलावा विभाग ने एक तकनीकी समीक्षा समिति भी बनाई है, जिसमें PWD के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। इस समिति को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
Karnataka High Court ने सुनवाई के दौरान यह भी टिप्पणी की कि किसी भी अनुशासनात्मक कार्रवाई से पहले तथ्यों और जांच रिपोर्ट का स्पष्ट होना जरूरी है। अदालत ने यह संकेत दिया कि प्रशासनिक कार्रवाई जल्दबाजी में नहीं की जानी चाहिए, खासकर तब जब जांच प्रक्रिया जारी हो।
बोवरिंग हॉस्पिटल परिसर की दीवार गिरने की घटना ने स्थानीय प्रशासन और निर्माण सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। इस हादसे में सात लोगों की मौत के बाद प्रशासनिक स्तर पर कई अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसी क्रम में एम.बी. नागराज को निलंबित किया गया था, जिसे अब अदालत ने रद्द कर दिया है।
कोर्ट के इस फैसले के बाद अब जांच समितियों की रिपोर्ट को मामले में अहम माना जा रहा है। रिपोर्ट के आधार पर ही आगे यह तय होगा कि किसी अधिकारी की जिम्मेदारी बनती है या नहीं। फिलहाल, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय तथ्यों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही लिया जाना चाहिए।





