
Karnataka कर्नाटक: आगामी डी.के. शिवकुमार की नई कैबिनेट में अनुसूचित जाति (SC) नेताओं की हिस्सेदारी को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। हालांकि कुछ सीनियर SC नेताओं को कैबिनेट में जगह मिलने की संभावना लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन बाकी पदों के लिए जोरदार जोड़-तोड़ और लॉबिंग जारी है।
जानकारों के अनुसार, पिछली सिद्धारमैया कैबिनेट में कुल 6 SC मंत्री शामिल थे। इसमें जी. परमेश्वर, प्रियांक खड़गे, डॉ. एच.सी. महादेवप्पा (SC राइट), एच. मुनियप्पा, आर.बी. तिम्मापुर (SC लेफ्ट) और शिवराज तंगडागी (भोवी) शामिल थे। नई कैबिनेट में इन नेताओं की जगह और अन्य SC नेताओं की हिस्सेदारी को लेकर पार्टियों के अंदर गहन विचार-विमर्श चल रहा है।
सूत्रों के अनुसार, डी.के. शिवकुमार की कैबिनेट में SC समुदाय के लिए पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न फ्रैक्शन्स में कड़े राजनीतिक समीकरण चल रहे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच इस बात पर चर्चा हो रही है कि किस नेता को कौन सा मंत्रालय दिया जाए ताकि समुदाय में संतुलित प्रतिनिधित्व के साथ-साथ राजनीतिक संतुलन भी बना रहे।
विशेषज्ञों का कहना है कि SC नेताओं की हिस्सेदारी केवल राजनीतिक संतुलन के लिए ही नहीं, बल्कि राज्य में समुदाय की महत्वाकांक्षाओं और पार्टी की सामाजिक छवि को मजबूत करने के लिए भी अहम है। इसके अलावा, चुनावी लाभ के दृष्टिकोण से भी इस समूह को उचित प्रतिनिधित्व देना पार्टी के लिए जरूरी माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि नई कैबिनेट में SC नेताओं के लिए कुल 5 से 6 पद आरक्षित रह सकते हैं। हालांकि, अंतिम सूची तैयार होने से पहले कई नेताओं और उनके समर्थकों के बीच अंदरूनी लॉबिंग और बातचीत जारी रहेगी। इसमें कुछ नए चेहरों को मौका मिलने की भी संभावना जताई जा रही है।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि कैबिनेट गठन में मुख्य फोकस नेतृत्व के समीकरण, अनुभव और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर किया जाएगा। इससे पहले, सिद्धारमैया के कार्यकाल में SC मंत्रियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही थी और उन्होंने अपने-अपने मंत्रालय में कई विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाया था। नई कैबिनेट में भी इसी तरह की उम्मीद की जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, डी.के. शिवकुमार की कैबिनेट गठन प्रक्रिया में SC नेताओं की हिस्सेदारी राज्य की राजनीतिक दिशा और आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी की सफलता के लिए अहम भूमिका निभा सकती है। इसके लिए पार्टी नेतृत्व हर संभव सावधानी और रणनीति अपनाकर निर्णय ले रहा है।





