
Karnataka कर्नाटक: बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड ने राज्य में प्रवासी निर्माण श्रमिकों की सुविधा के लिए छह ट्रांजिट आवास तैयार किए हैं। इन आवासों को ‘श्रमिक निवास’ नाम दिया गया है, जिनका उद्देश्य श्रमिकों को सुरक्षित और सुविधाजनक रहने की जगह उपलब्ध कराना है।
इन आवासों में डॉरमेट्री और रिहायशी फ्लैट ब्लॉकों की व्यवस्था की गई है, ताकि श्रमिकों और उनके परिवारों को बेहतर रहने की सुविधा मिल सके। बोर्ड का कहना है कि इस पहल से निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों को स्थायी और सुरक्षित आवास का विकल्प मिलेगा।
पहला हाउसिंग कॉम्प्लेक्स मार्च 2023 में बेंगलुरु ग्रामीण जिले के डोड्डाबल्लापुर तालुक के बडानाहल्ली में 19 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया गया था। यह परियोजना राज्य सरकार की उस योजना का हिस्सा है, जिसकी घोषणा 2021-22 के बजट में की गई थी।
इस पूरे प्रोजेक्ट के तहत राज्य के 10 जिलों में ऐसे आवास बनाने के लिए 215 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य प्रवासी श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार करना और उन्हें सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना था।
हालांकि, बेंगलुरु शहर में इस परियोजना के लिए जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी, जिसके कारण विभाग ने कर्नाटक इंडस्ट्रियल एरियाज़ डेवलपमेंट बोर्ड को भूमि आवंटन के लिए पत्र लिखा है।
दूसरी ओर, डोड्डाबल्लापुर, चामराजनगर, बेलगावी और शिवमोग्गा जैसे जिलों में बने आवासों में रहने वालों की संख्या अपेक्षा से काफी कम है। इन भवनों की औसत ऑक्यूपेंसी दर सालाना 30 प्रतिशत से भी कम बताई गई है, जबकि कुल मिलाकर इन आवासों में 3,432 श्रमिकों और उनके आश्रितों के रहने की क्षमता मौजूद है।
यह स्थिति योजना के क्रियान्वयन और उपयोगिता पर सवाल खड़े करती है, क्योंकि बड़ी संख्या में सीटें खाली रह जा रही हैं।
कुल मिलाकर, ‘श्रमिक निवास’ योजना प्रवासी निर्माण श्रमिकों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है, लेकिन कम उपयोग और भूमि संबंधी चुनौतियों के कारण इसके प्रभावी संचालन पर अभी भी ध्यान देने की जरूरत है।





