
बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने सूखे की स्थिति से निपटने और प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं पुनर्वास कार्यों के लिए केंद्र सरकार से 7,142.64 करोड़ रुपये की सहायता की मांग की है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शनिवार को बताया कि राज्य ने यह मांग नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) के निर्धारित नियमों के अनुसार रखी है। उन्होंने कहा कि सूखे से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति और राज्य की जरूरतों का आकलन करने के लिए केंद्र की इंटर-मिनिस्टीरियल सेंट्रल टीम (IMCT) ने अपना फील्ड दौरा शुरू कर दिया है।
शनिवार को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने IMCT के सदस्यों के सामने राज्य में सूखे की स्थिति और उससे हुए नुकसान की जानकारी रखी। केंद्रीय टीम ने राज्य के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा शुरू करते हुए जमीनी हालात का आकलन करना शुरू किया है। टीम की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार की ओर से राज्य को मिलने वाली संभावित सहायता को लेकर आगे की प्रक्रिया बढ़ सकती है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, कर्नाटक ने NDRF के नियमों के तहत कुल 7,142.64 करोड़ रुपये की मांग की है। यह राशि सूखे के कारण प्रभावित लोगों, कृषि क्षेत्र और अन्य जरूरी राहत कार्यों के लिए मांगी गई है। राज्य सरकार का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में प्रभावित क्षेत्रों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की जरूरत है।
सूखे की स्थिति का आकलन करने के लिए केंद्र से आई इंटर-मिनिस्टीरियल सेंट्रल टीम का दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसी केंद्रीय टीमें प्रभावित राज्यों में जाकर नुकसान की वास्तविक स्थिति का जायजा लेती हैं और राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों और दावों की जमीनी स्तर पर समीक्षा करती हैं।
टीम के फील्ड दौरे के दौरान प्रभावित इलाकों में कृषि, जल उपलब्धता और आम लोगों पर पड़े असर जैसे पहलुओं का निरीक्षण किया जा सकता है। राज्य सरकार की ओर से केंद्रीय टीम को सूखे की गंभीरता और उससे जुड़ी आवश्यकताओं के बारे में जानकारी दी गई है।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने टीम के सामने राज्य की स्थिति रखी। सरकार की ओर से केंद्र को यह बताने की कोशिश की गई कि सूखे के कारण किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा है और राहत के लिए किन संसाधनों की आवश्यकता है।
कर्नाटक की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में बारिश की कमी या जल संकट का सीधा असर किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। सूखे की स्थिति में फसलों को नुकसान होने के साथ पशुपालन और ग्रामीण रोजगार पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए राज्य सरकार ने केंद्र से वित्तीय सहायता की मांग की है।
7,142.64 करोड़ रुपये की मांग NDRF के नियमों के अनुसार किए जाने की बात मुख्यमंत्री ने कही है। इसका मतलब है कि राज्य सरकार ने आपदा राहत के लिए निर्धारित मानकों और प्रक्रियाओं के तहत केंद्र से सहायता मांगी है। अब केंद्रीय टीम के आकलन और रिपोर्ट के आधार पर सहायता की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
राज्य सरकार के लिए केंद्रीय टीम का दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जमीनी स्थिति का स्वतंत्र आकलन राहत पैकेज पर निर्णय लेने में भूमिका निभा सकता है। टीम प्रभावित इलाकों में जाकर राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत नुकसान के आंकड़ों की वास्तविक स्थिति से तुलना कर सकती है।
सूखे के दौरान सबसे बड़ी चुनौती पानी की उपलब्धता को लेकर होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और सिंचाई दोनों पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा जलाशयों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में राहत कार्यों के लिए वित्तीय सहायता का उपयोग पेयजल और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं में किया जा सकता है।
कृषि क्षेत्र में सूखे का असर फसल उत्पादन पर पड़ सकता है। किसानों को फसल नुकसान, सिंचाई की कमी और कृषि लागत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। राज्य सरकार द्वारा केंद्र से मांगी गई सहायता का एक प्रमुख उद्देश्य प्रभावित कृषि क्षेत्र को राहत पहुंचाना भी हो सकता है।
केंद्रीय टीम के दौरे के दौरान स्थानीय प्रशासन की ओर से भी प्रभावित क्षेत्रों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। स्थानीय स्तर पर नुकसान का आकलन, प्रभावित परिवारों की संख्या और उपलब्ध राहत व्यवस्था जैसे मुद्दे टीम की समीक्षा का हिस्सा हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार ने केंद्र से निर्धारित नियमों के तहत सहायता मांगी है। अब राज्य सरकार की नजर केंद्रीय टीम के आकलन पर है। टीम की रिपोर्ट आने के बाद केंद्र सरकार की ओर से राहत सहायता को लेकर निर्णय लिया जा सकता है।
इंटर-मिनिस्टीरियल सेंट्रल टीम में विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल होते हैं, ताकि आपदा से हुए नुकसान के अलग-अलग पहलुओं की समीक्षा की जा सके। सूखे के मामले में कृषि, जल संसाधन, ग्रामीण विकास और अन्य संबंधित क्षेत्रों की स्थिति को देखा जा सकता है।
कर्नाटक सरकार की ओर से केंद्रीय टीम को राज्य की जरूरतों से अवगत कराने के बाद अब टीम का फील्ड दौरा शुरू हो चुका है। जमीनी निरीक्षण के दौरान टीम प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर हालात का जायजा लेगी। इसके बाद तैयार की जाने वाली रिपोर्ट केंद्र के स्तर पर आगे की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हो सकती है।
राज्य सरकार का कहना है कि सूखे से प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए केंद्र से आर्थिक मदद जरूरी है। 7,142.64 करोड़ रुपये की मांग इसी उद्देश्य से की गई है। हालांकि केंद्र की ओर से कितनी राशि स्वीकृत की जाएगी, यह केंद्रीय आकलन और निर्धारित प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की केंद्रीय टीम के साथ बैठक इस लिहाज से महत्वपूर्ण रही कि इसमें राज्य सरकार ने सीधे तौर पर अपनी मांग और सूखे की स्थिति से संबंधित जानकारी रखी। राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों और दस्तावेजों के आधार पर टीम आगे जमीनी सत्यापन करेगी।
सूखे की स्थिति का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहता। ग्रामीण इलाकों में पानी की उपलब्धता कम होने से आम परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो सकती है। पशुओं के लिए चारा और पानी की व्यवस्था भी चुनौती बन सकती है। इसलिए आपदा राहत के तहत विभिन्न स्तरों पर सहायता की जरूरत पड़ती है।
राज्य सरकार को उम्मीद है कि केंद्रीय टीम वास्तविक स्थिति को देखते हुए अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके बाद केंद्र की ओर से राहत सहायता को लेकर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल टीम का फील्ड दौरा जारी है और राज्य सरकार ने अपनी ओर से 7,142.64 करोड़ रुपये की मांग रखी है।
यह मांग ऐसे समय की गई है जब राज्य में सूखे की स्थिति का आकलन किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि NDRF के नियमों के तहत सहायता मांगी गई है। अब केंद्रीय टीम के निरीक्षण के बाद स्थिति की आधिकारिक समीक्षा पूरी होने की दिशा में आगे बढ़ेगी।
कुल मिलाकर कर्नाटक सरकार ने सूखे से प्रभावित क्षेत्रों के लिए केंद्र से 7,142.64 करोड़ रुपये की सहायता की मांग की है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने शनिवार को इंटर-मिनिस्टीरियल सेंट्रल टीम के सामने राज्य की स्थिति रखी। केंद्रीय टीम ने भी जमीनी स्तर पर सूखे की स्थिति और नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। अब टीम की रिपोर्ट और उसके बाद केंद्र सरकार के फैसले पर राज्य की राहत व्यवस्था की अगली दिशा निर्भर करेगी।





