
Karnataka कर्नाटक: चामराजनगर जिले के प्रसिद्ध बांदीपुर टाइगर रिजर्व के मद्दूर जोन में वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अवैध शिकार विरोधी शिविर के पास एक पार्टी आयोजित की गई, जो रिजर्व के नियमों के अनुसार पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इस घटना ने वन्यजीवों के संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षा और निगरानी की प्रक्रियाओं की आलोचना को बढ़ा दिया है।
मद्दूर सेक्टर के हुलिकेट इलाके में यह घटना सामने आई, जो बाघ अभयारण्य का हिस्सा है और वन्यजीवों की आवाजाही के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है। स्थानीय निवासियों ने सवाल उठाया है कि किस तरह आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्र में प्रवेश कर पाए।
सूत्रों के अनुसार, गुंडलुपेट पुलिस स्टेशन के उपद्रवी सतीश ने अपने सहयोगियों गंगाधर और चेतन के साथ मद्दूर क्षेत्र में प्रवेश किया और अवैध शिकार विरोधी शिविर के पास शराब का सेवन किया। सोशल मीडिया और स्थानीय निगरानी टीमों द्वारा सामने आई तस्वीरों में तीनों व्यक्तियों को जंगल के अंदर शराब पीते हुए देखा गया। यह तस्वीरें जंगल में वन्यजीवों और अभयारण्य की सुरक्षा की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
वन विभाग के अधिकारियों ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी अनधिकृत गतिविधि को गंभीरता से लिया जाएगा और जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, इस घटना ने पर्यावरण और वन्यजीव सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी की कमी को उजागर किया है।
स्थानीय समुदाय और पर्यावरण कार्यकर्ता इस घटना से चिंतित हैं। उनका कहना है कि रिजर्व के नियमों का उल्लंघन वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन के लिए खतरनाक हो सकता है। उन्होंने वन विभाग से अपील की है कि ऐसे मामलों को दोबारा न होने देने के लिए निगरानी और सुरक्षा को और कड़ा किया जाए।
इस घटना ने बांदीपुर टाइगर रिजर्व के मद्दूर जोन में वन्यजीव संरक्षण के महत्व को भी सामने लाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि वन्यजीवों के आवास में किसी भी तरह की मनमानी गतिविधि उनकी सुरक्षा और जैव विविधता को खतरे में डाल सकती है। वन विभाग ने कहा है कि भविष्य में ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में अधिक गश्ती और निगरानी बढ़ाई जाएगी।
सामाजिक और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, स्थानीय लोगों ने वन विभाग और पुलिस प्रशासन दोनों से इस घटना की निष्पक्ष और कड़ी जांच की मांग की है। पर्यावरण कार्यकर्ता भी चाहते हैं कि जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो और भविष्य में रिजर्व में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।





