
बेंगलुरु : कर्नाटक में बारिश की कमी के कारण बने सूखे के हालात और पेयजल संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने गुरुवार को बताया कि सरकार ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र को 1 करोड़ रुपये की विशेष ग्रांट देने का निर्णय लिया है। इस राशि का उपयोग सूखे की स्थिति से निपटने और लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए किया जाएगा।
बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के कई हिस्सों में बारिश की कमी के कारण जल संकट की स्थिति पैदा हुई है। सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि लोगों को पीने के पानी की समस्या का सामना न करना पड़े, इसके लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
डॉ. जी. परमेश्वर ने बताया कि पेयजल आपूर्ति को बेहतर बनाए रखने के लिए सरकार पहले ही सभी जिलों को 5 करोड़ रुपये की राशि जारी कर चुकी है। इस राशि का इस्तेमाल पानी की व्यवस्था, टैंकरों के माध्यम से आपूर्ति और अन्य जरूरी कार्यों के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा सूखे से जुड़े राहत कार्यों के लिए पर्सनल डिपॉजिट (PD) अकाउंट में 329 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं। इस फंड का उपयोग स्थानीय स्तर पर जरूरत के अनुसार किया जा सकेगा, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द राहत पहुंचाई जा सके।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में जहां पानी की समस्या अधिक गंभीर हो सकती है, वहां प्रशासन को सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि विधानसभा क्षेत्रों को दी जाने वाली 1 करोड़ रुपये की राशि से स्थानीय स्तर पर जल संकट से जुड़े कार्य किए जा सकेंगे। इसमें पेयजल स्रोतों की मरम्मत, पानी की वैकल्पिक व्यवस्था और अन्य आवश्यक कदम शामिल हो सकते हैं।
कर्नाटक के कई जिलों में इस साल मानसून की कमजोर शुरुआत और कम बारिश के कारण कृषि और जल संसाधनों पर असर पड़ा है। किसानों को फसल नुकसान का सामना करना पड़ा है, वहीं कई क्षेत्रों में पीने के पानी की उपलब्धता भी चुनौती बनी हुई है।
सरकार ने सूखे की स्थिति की समीक्षा के लिए अलग-अलग स्तर पर बैठकें आयोजित करने की योजना बनाई है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 25 जुलाई को बेंगलुरु डिवीजन में सूखे के हालात को लेकर समीक्षा बैठक करने की बात कही है। इसके बाद मैसूर डिवीजन में भी ऐसी ही बैठक आयोजित की जाएगी।
इन बैठकों में जिलों की वास्तविक स्थिति, जल उपलब्धता, फसल नुकसान, राहत कार्यों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की जाएगी। अधिकारियों से सूखे प्रभावित क्षेत्रों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है, ताकि जरूरत के अनुसार कदम उठाए जा सकें।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार केवल तत्काल राहत पर ही नहीं, बल्कि लंबे समय के समाधान पर भी ध्यान दे रही है। जल संरक्षण, पेयजल स्रोतों को मजबूत करने और सूखे जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए स्थायी उपायों पर भी विचार किया जा रहा है।
उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता पर नजर रखें और जहां भी समस्या सामने आए, वहां तुरंत समाधान की व्यवस्था करें।
कर्नाटक में सूखे की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने पहले भी कई राहत उपायों की घोषणा की है। अब विधानसभा क्षेत्रों को अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराने के फैसले से स्थानीय प्रशासन को अधिक तेजी से काम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सूखे जैसी परिस्थितियों में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध फंड और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता बेहद महत्वपूर्ण होती है। विधानसभा क्षेत्रों को सीधे राशि उपलब्ध होने से स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाएं लागू की जा सकेंगी।
फिलहाल सरकार का पूरा ध्यान पेयजल संकट को नियंत्रित करने और सूखे से प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने पर है। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठकों के बाद सूखे से निपटने के लिए और कदमों की घोषणा होने की संभावना है।





