
Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक में सीनियर विधायक रामलिंगा रेड्डी ने शुक्रवार को डी.के. शिवकुमार की कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। यह कदम 13 मंत्रियों को विभागों का बंटवारा किए जाने के केवल एक दिन बाद आया। रेड्डी को जल संसाधन विभाग दिया गया था, जबकि उनका प्राथमिक अनुरोध बेंगलुरु विकास विभाग था, जो कृष्णा बायरे गौड़ा को सौंप दिया गया।
रेड्डी ने कहा कि वह अपनी “अंतरात्मा” के खिलाफ काम नहीं कर सकते और इसलिए इस्तीफा देना उनके लिए अनिवार्य हो गया। उन्होंने शुक्रवार सुबह बेंगलुरु में आयोजित प्रेस मीटिंग में बताया कि उन्हें दो बार विभाग देने का वादा किया गया था। पहली बार यह वादा 2023 में सिद्धारमैया सरकार के दौरान किया गया था, और दूसरी बार डी.के. शिवकुमार ने 2023 और 2026 में इसे दोहराया था। हालांकि, दोनों बार ऑफिशियल सूची में उनके विभाग को बदल दिया गया।
रामलिंगा रेड्डी ने कहा, “मैं अपना इस्तीफा तुषार गिरिनाथ (मुख्यमंत्री कार्यालय) को भेज रहा हूं। मैं प्रेस से सिर्फ अपने इस्तीफे का कारण साफ करना चाहता हूं। मैंने कभी किसी से कोई विभाग मांगा नहीं था। मैं सिर्फ वह विभाग लेना चाहता था जिसे पहले वादा किया गया था।”
इस इस्तीफे से मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को कार्यालय में पहली चुनौती का सामना करना पड़ा। राज्य की राजधानी बेंगलुरु में यह घटना कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के आगमन के दिन हुई, जो AICC चीफ मल्लिकार्जुन खड़गे के राज्यसभा नॉमिनेशन फाइलिंग के लिए बेंगलुरु में मौजूद थे।
विश्लेषकों के अनुसार, रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा शिवकुमार कैबिनेट के भीतर संतुलन और विभागों के आवंटन को लेकर शुरुआती तनाव का संकेत है। रेड्डी बेंगलुरु के आठ बार के विधायक हैं और पार्टी में उनकी राजनीतिक पकड़ मजबूत मानी जाती है। उनके जाने से कैबिनेट के भीतर अन्य वरिष्ठ नेताओं की प्रतिक्रिया और मंत्रियों के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने कहा कि बेंगलुरु विकास विभाग जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी न मिलने पर रेड्डी का नाराज होना सामान्य था। उनका कहना था कि यह विभाग बेंगलुरु शहर के विकास और नगर प्रशासन के लिए अत्यधिक प्रभावशाली माना जाता है, और इसका जिम्मा मिलने से उनकी राजनीतिक और प्रशासनिक योजना को मजबूती मिलती।
कांग्रेस पार्टी के अंदर इस घटना पर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, कई वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि इस्तीफे की प्रक्रिया शांतिपूर्ण और अनुशासनपूर्वक हो रही है, और पार्टी हाईकमान इसे संवेदनशील तरीके से देख रहा है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस इस्तीफे का असर शिवकुमार सरकार के प्रारंभिक महीनों में नीति निर्माण और विभागीय कामकाज पर पड़ सकता है। इसके साथ ही, राज्य की राजधानी और राजनीतिक केंद्र बेंगलुरु में कांग्रेस के नेताओं की आपसी तालमेल पर भी इसका प्रभाव देखा जा रहा है।
इस तरह, रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा न केवल व्यक्तिगत नाराजगी का परिणाम है, बल्कि यह डी.के. शिवकुमार कैबिनेट की शुरुआती चुनौतियों और विभागीय आवंटन में संतुलन बनाए रखने की जरूरत को भी दर्शाता है।





