
Karnataka कर्नाटक: भाजपा में चल रही अंदरूनी खींचतान और नेताओं के बीच जारी बयानबाजी को लेकर पार्टी नेतृत्व ने सख्त रुख अपना लिया है। भाजपा के राज्य प्रभारी डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि संगठन की एकता और अनुशासन को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियां किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।
सूत्रों के अनुसार, उन्होंने नेताओं को चेतावनी दी कि या तो सभी नेता सार्वजनिक बयानबाजी और आपसी विवाद को खत्म कर पार्टी संगठन को मजबूत करने में जुटें, या फिर उन्हें अपने भविष्य को लेकर अलग रास्ता चुनना होगा। पार्टी प्रभारी ने साफ संकेत दिया कि भाजपा में अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी नेता को संगठन की छवि खराब करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
दरअसल, हाल के दिनों में कर्नाटक भाजपा के कई नेताओं के बीच मतभेद और आरोप-प्रत्यारोप सामने आए थे। विधान परिषद चुनाव के बाद पार्टी के कुछ नेताओं ने एक-दूसरे पर सवाल उठाए थे और सार्वजनिक रूप से बयान दिए थे। इन घटनाओं को लेकर पार्टी हाईकमान तक शिकायतें पहुंचीं, जिसके बाद केंद्रीय नेतृत्व ने मामले की जानकारी जुटाने के लिए राज्य प्रभारी को कर्नाटक भेजा।
इसी क्रम में डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल गुरुवार को बेंगलुरु पहुंचे और पार्टी कार्यालय में वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की। उन्होंने करीब तीन से चार घंटे तक चली बैठकों में पूरे मामले पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने उन नेताओं से अलग-अलग बातचीत की, जिनके नाम पार्टी के अंदरूनी विवाद से जुड़े बताए जा रहे थे।
बैठक के लिए जिन नेताओं को बुलाया गया, उनमें पूर्व मुख्यमंत्री डी.वी. सदानंद गौड़ा, येलहंका विधायक एस.आर. विश्वनाथ, चिक्कबल्लापुर सांसद के. सुधाकर और होन्नाली सांसद तथा पूर्व मंत्री रेणुकाचार्य शामिल थे।
राधा मोहन दास अग्रवाल ने सभी नेताओं से अलग-अलग मुलाकात की। बताया जा रहा है कि प्रत्येक नेता के साथ करीब आधे घंटे से अधिक समय तक बातचीत हुई। इस दौरान उनसे पार्टी के अंदर चल रहे विवाद, उनके बयानों और संगठन पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर जानकारी ली गई।
इसके बाद सभी नेताओं को एक साथ बैठाकर भी बातचीत की गई। बैठक में पार्टी की एकता बनाए रखने, कार्यकर्ताओं के बीच सकारात्मक संदेश देने और भविष्य में सार्वजनिक मंचों पर आपसी विवाद से बचने को लेकर चर्चा हुई।
भाजपा नेतृत्व का मानना है कि चुनावी राजनीति में संगठन की मजबूती सबसे महत्वपूर्ण होती है और नेताओं के बीच मतभेदों का असर कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ सकता है। इसलिए पार्टी ने समय रहते मामले को नियंत्रित करने की कोशिश शुरू कर दी है।
सूत्रों के मुताबिक, राज्य प्रभारी ने नेताओं को यह भी संदेश दिया कि पार्टी के अंदर किसी भी मुद्दे को संगठनात्मक मंच पर उठाया जाना चाहिए। सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप से पार्टी की छवि प्रभावित होती है और विपक्ष को राजनीतिक मुद्दा मिल जाता है।
विधान परिषद चुनाव के बाद कर्नाटक भाजपा में कई मुद्दों को लेकर नेताओं के बीच मतभेद सामने आए थे। कुछ नेताओं ने पार्टी की रणनीति और नेतृत्व को लेकर सवाल उठाए थे, जबकि कुछ ने एक-दूसरे की कार्यशैली पर टिप्पणी की थी। इन घटनाओं के बाद पार्टी हाईकमान ने स्थिति की समीक्षा करने का फैसला किया।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, भाजपा आगामी चुनावों और संगठनात्मक गतिविधियों को देखते हुए राज्य इकाई में किसी भी तरह की कमजोरी नहीं चाहती। यही कारण है कि केंद्रीय नेतृत्व ने वरिष्ठ नेताओं के बीच समन्वय बनाने और विवाद खत्म करने के लिए हस्तक्षेप किया है।
बैठक के बाद पार्टी की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन संकेत साफ हैं कि नेतृत्व अब अनुशासनहीनता और सार्वजनिक विवादों को लेकर सख्त रुख अपनाने के मूड में है।
कर्नाटक भाजपा में लंबे समय से गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में राधा मोहन दास अग्रवाल की बैठक को पार्टी के अंदर तालमेल सुधारने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा प्रभारी ने नेताओं को एकजुट होकर संगठन के लिए काम करने का संदेश दिया है। अब देखना होगा कि इस चेतावनी के बाद राज्य भाजपा में नेताओं के बीच मतभेद कितने कम होते हैं और पार्टी किस तरह आगामी राजनीतिक चुनौतियों का सामना करती है।
फिलहाल पार्टी नेतृत्व की प्राथमिकता यही है कि सभी वरिष्ठ नेता एक मंच पर रहें, कार्यकर्ताओं में स्पष्ट संदेश जाए और संगठनात्मक गतिविधियां बिना किसी विवाद के आगे बढ़ सकें।





