
Karnataka कर्नाटक: प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज लेक्चरर्स एसोसिएशन ने राज्य सरकार से अपील की है कि उन्हें इस वर्ष होने वाली जनगणना के काम से छूट दी जाए। एसोसिएशन ने यह मांग स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को भेजे गए एक रिप्रेजेंटेशन के जरिए की है।
एसोसिएशन ने अपने पत्र में बताया कि प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों के हजारों लेक्चरर्स पर पहले से ही अलग-अलग ट्रेनिंग, इवैल्यूएशन और एग्जामिनेशन के काम का दबाव है। ऐसे में उन्हें जनगणना के एन्यूमरेटर के तौर पर शामिल करना उनके नियमित काम में बाधा डाल सकता है।
इसमें कहा गया है कि मास्टर ट्रेनर्स की ट्रेनिंग मार्च में पूरी की जा चुकी है और एन्यूमरेटर्स की ट्रेनिंग तीन फेज़ में जारी है। इस ट्रेनिंग का हिस्सा बनने के बाद भी, लेक्चरर्स को नियमित पढ़ाई और कॉलेज प्रशासन के कामों से अलग करना मुश्किल हो रहा है।
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि यह कदम केवल शैक्षणिक कार्य और विद्यार्थियों की पढ़ाई की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उठाया गया है। उनका कहना है कि अगर लेक्चरर्स को जनगणना में लगाया गया तो उन्हें समय और ऊर्जा दोनों का बड़ा नुकसान होगा, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।
कर्नाटक में इस बार हजारों प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज लेक्चरर्स को जनगणना में एन्यूमरेटर के रूप में तैनात किया गया है। उनका प्रशिक्षण तीन चरणों में किया जा रहा है, जिसमें उन्हें जनगणना के सभी पहलुओं की जानकारी दी जाती है। मास्टर ट्रेनर्स ने मार्च में प्रशिक्षण पूरा कर लिया है, जबकि एन्यूमरेटर्स की ट्रेनिंग अभी भी जारी है।
एसोसिएशन का कहना है कि उनके सदस्यों को छूट मिलने से शैक्षणिक कैलेंडर में व्यवधान नहीं आएगा और छात्रों को पढ़ाई में बाधा नहीं होगी। उन्होंने विभाग से अनुरोध किया है कि उन्हें इस बार की जनगणना से मुक्त किया जाए ताकि वे अपने कॉलेज और शिक्षण कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
लेखक ने यह भी जोर दिया कि प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज लेक्चरर्स का योगदान शिक्षा और छात्रों के भविष्य में महत्वपूर्ण है। जनगणना में उनकी भागीदारी से निश्चित रूप से डेटा संग्रह में मदद मिलेगी, लेकिन शैक्षणिक जिम्मेदारियों के कारण उन्हें इस बार से छूट देना आवश्यक है।
एसोसिएशन ने सरकार से तेज़ निर्णय लेने की अपील की है, ताकि ट्रेनिंग और जनगणना की तैयारियों में किसी तरह की दिक्कत न आए और शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो। उनका कहना है कि यह अनुरोध केवल शैक्षणिक कार्य की प्राथमिकता और विद्यार्थियों के हित में किया गया है।





