कर्नाटक

Karnataka : 13% से अधिक बच्चे स्टंटिंग के शिकार, आंगनवाड़ी सर्वे में खुलासा

Kavita2
4 April 2026 2:33 PM IST
Karnataka : 13% से अधिक बच्चे स्टंटिंग के शिकार, आंगनवाड़ी सर्वे में खुलासा
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Karnataka कर्नाटक: छह साल से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण और स्टंटिंग (ऊंचाई का उम्र के अनुसार कम रहना) एक गंभीर चिंता के रूप में सामने आया है। महिला और बाल विकास विभाग द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों में किए गए स्वास्थ्य परीक्षण में यह खुलासा हुआ कि राज्य के कुल 32,75,829 पंजीकृत बच्चों में से 4,25,827 बच्चे गंभीर स्टंटिंग से प्रभावित हैं। यह कुल बच्चों का लगभग 13.05 प्रतिशत है।

रिपोर्ट के अनुसार, मध्यम स्तर की स्टंटिंग से प्रभावित बच्चों की संख्या 5,52,606 है, जो कुल का 16.93 प्रतिशत है। ये आंकड़े बताते हैं कि राज्य में बच्चों के पोषण और समग्र विकास को लेकर अभी भी बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं।

राज्य के कई जिलों में यह समस्या अधिक गंभीर रूप में देखी गई है। बेल्लारी, बीदर, कलबुर्गी, यादगीर, बेलगाम, रायचूर, चित्रदुर्ग और विजयनगर जैसे जिलों में स्टंटिंग के मामलों की संख्या ज्यादा पाई गई है। इन क्षेत्रों में कुपोषण से निपटने के लिए ‘चिगुरु’ नामक एक विशेष सामुदायिक कार्यक्रम लागू किया गया है, जो कम्युनिटी-बेस्ड एक्यूट मालन्यूट्रिशन मैनेजमेंट पर आधारित है।

इस मुद्दे पर लक्ष्मी हेब्बालकर ने कहा कि बच्चों में बौनेपन और कुपोषण के पीछे सामाजिक, आर्थिक, स्वास्थ्य, पोषण और आनुवंशिक (जेनेटिक) कारण जिम्मेदार हैं। उन्होंने बताया कि आंगनवाड़ी केंद्रों में नामांकित बच्चों के लिए समग्र बाल विकास योजना के तहत कई कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि इस समस्या को रोका जा सके।

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल स्टंटिंग से प्रभावित बच्चों के लिए अलग से कोई विशेष अनुदान निर्धारित नहीं किया गया है। हालांकि, केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, छह महीने से छह साल तक के बच्चों को 300 दिनों तक पूरक पोषण आहार दिया जा रहा है।

आंगनवाड़ी केंद्रों में सामान्य बच्चों को प्रतिदिन 8 रुपये का पूरक पोषण दिया जाता है, जबकि गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को 12 रुपये का पोषण आहार दिया जाता है। इसके अलावा, सभी बच्चों को सप्ताह में दो बार अंडे दिए जा रहे हैं, जिससे उनके पोषण स्तर में सुधार हो सके।

राज्य सरकार की ‘क्षीर भाग्य’ योजना के तहत भी बच्चों को अतिरिक्त पोषण दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत छह महीने से छह साल तक के बच्चों को सप्ताह में पांच दिन 150 मिलीलीटर दूध उपलब्ध कराया जाता है। गंभीर और मध्यम कुपोषित बच्चों के लिए विशेष आहार व्यवस्था भी की गई है, जिसमें उन्हें सप्ताह में कई बार अंडे और दूध पाउडर दिया जाता है।

इसके अलावा, गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों का इलाज स्वास्थ्य विभाग के न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर (NRC) में किया जा रहा है, जहां उनके स्वास्थ्य और पोषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कुपोषण और स्टंटिंग को खत्म करने के लिए केवल पोषण आहार ही नहीं, बल्कि जागरूकता, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और सामाजिक-आर्थिक सुधार भी जरूरी हैं।

राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बावजूद, आंकड़े यह संकेत देते हैं कि इस दिशा में और अधिक प्रभावी और लक्षित प्रयासों की आवश्यकता है, ताकि बच्चों के समुचित विकास को सुनिश्चित किया जा सके।

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