
बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में संसद में पारित किए गए ‘माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026’ को लेकर आपत्ति जताई है। राज्य सरकार ने मांग की है कि इस बिल को तुरंत वापस लिया जाए और इसमें शामिल प्रावधानों पर दोबारा विचार किया जाए।
कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय खान मंत्री जी. किशन रेड्डी को पत्र लिखा है। परमेश्वर, जो राज्य के राजस्व मंत्री भी हैं, ने पत्र के माध्यम से बिल के कुछ प्रावधानों को लेकर राज्य सरकार की चिंताएं सामने रखी हैं।
खनिज अधिकारों को लेकर जताई आपत्ति
डॉ. परमेश्वर ने पत्र में उन प्रावधानों का विरोध किया है, जिनसे राज्य सरकारों की खनिज अधिकारों और खनिज वाली जमीनों पर टैक्स और सेस लगाने की शक्तियां सीमित होने की आशंका जताई जा रही है।
उन्होंने कहा कि खनिज संसाधन राज्यों के विकास और आर्थिक मजबूती के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में राज्यों के अधिकारों और वित्तीय स्वायत्तता को बनाए रखना जरूरी है।
राज्य सरकार का कहना है कि खनिज संपदा वाले राज्यों को अपने संसाधनों से जुड़े फैसले लेने में पर्याप्त अधिकार मिलने चाहिए, ताकि वे स्थानीय विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें।
संघीय ढांचे का दिया हवाला
उप मुख्यमंत्री परमेश्वर ने अपने पत्र में केंद्र और राज्यों के बीच संतुलित संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मजबूत राज्य ही मजबूत केंद्र का आधार होते हैं।
उन्होंने कहा कि जब राज्यों को विकास के लिए जरूरी संसाधन और निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलती है, तो इससे पूरे देश की आर्थिक प्रगति को फायदा होता है।
उन्होंने कहा कि खनिज क्षेत्र से जुड़े फैसलों में राज्यों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
व्यापक चर्चा की मांग
परमेश्वर ने केंद्र सरकार से अपील की है कि बिल की समीक्षा राज्यों के साथ व्यापक चर्चा के बाद की जाए।
उन्होंने कहा कि देश में ऐसा खनिज टैक्स ढांचा होना चाहिए, जो संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप हो, आर्थिक रूप से उचित हो और भारत के संघीय ढांचे के अनुकूल हो।
उनका कहना है कि बिना राज्यों की पर्याप्त भागीदारी के बनाए गए नियमों से केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों को लेकर असंतुलन पैदा हो सकता है।
विवादित प्रावधान लागू न करने की अपील
कर्नाटक सरकार ने केंद्र से आग्रह किया है कि बिल के मौजूदा स्वरूप पर फिर से विचार किया जाए और ऐसे प्रावधानों को लागू न किया जाए, जिनसे राज्यों की वित्तीय क्षमता प्रभावित हो सकती है।
डॉ. परमेश्वर ने कहा कि राज्यों के अधिकारों की रक्षा करते हुए ही खनिज क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
खनिज संसाधनों का आर्थिक महत्व
भारत में खनिज संसाधन औद्योगिक विकास और आर्थिक गतिविधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। खनिजों से मिलने वाला राजस्व कई राज्यों के लिए आय का बड़ा स्रोत होता है।
विशेष रूप से खनिज संपदा वाले राज्यों में इन संसाधनों से मिलने वाली आय का इस्तेमाल सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य विकास कार्यों में किया जाता है।
कर्नाटक भी खनिज उत्पादन के मामले में महत्वपूर्ण राज्यों में शामिल है। ऐसे में राज्य सरकार खनिज संसाधनों से जुड़े अधिकारों को लेकर अपनी भूमिका को अहम मानती है।
केंद्र और राज्य के बीच बढ़ सकती है बहस
MMDR Amendment Bill 2026 को लेकर कर्नाटक सरकार की आपत्ति के बाद केंद्र और राज्य के बीच नई बहस शुरू हो सकती है।
राज्य सरकार जहां इसे राज्यों की आर्थिक स्वायत्तता से जोड़ रही है, वहीं केंद्र सरकार का उद्देश्य खनिज क्षेत्र में सुधार और बेहतर नियमन बताया जा सकता है।
अब देखना होगा कि केंद्र सरकार कर्नाटक सरकार की आपत्तियों पर क्या कदम उठाती है।
राज्यों की भूमिका पर फिर चर्चा
इस पूरे मामले ने एक बार फिर केंद्र-राज्य संबंधों और राज्यों की वित्तीय शक्तियों को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
कर्नाटक सरकार का कहना है कि विकास के लिए राज्यों को पर्याप्त संसाधन और अधिकार मिलना जरूरी है। वहीं, केंद्र के सामने चुनौती होगी कि खनिज क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाते हुए राज्यों की चिंताओं का भी समाधान किया जाए।
फिलहाल कर्नाटक सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस बिल के मौजूदा स्वरूप से संतुष्ट नहीं है और इसमें बदलाव की मांग जारी रखेगी।





