
Bengaluru बेंगलुरु : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वच्छता अभियान में हिस्सा लेकर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इस दौरान उन्होंने मास्क और दस्ताने पहनकर स्वयं कूड़ा उठाकर साफ-सफाई में भागीदारी की और स्वच्छता के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।
अभियान के दौरान मंत्री ने आसपास के क्षेत्र में चल रहे सफाई कार्यों का निरीक्षण किया और स्वच्छता कर्मियों के साथ भी बातचीत की। उन्होंने साफ-सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने और नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के बाद निर्मला सीतारमण ने स्थानीय सब्जी ठेला विक्रेताओं और रेहड़ी-पटरी वालों से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं, विशेष रूप से स्वरोजगार और छोटे व्यवसायों के लिए उपलब्ध ऋण योजनाओं के बारे में जानकारी ली।
ಸ್ವಚ್ಛತಾ ಅಭಿಯಾನದಲ್ಲಿ ಕೇಂದ್ರ ಸಚಿವೆ ನಿರ್ಮಲಾ ಸೀತಾರಾಮನ್ ಭಾಗಿಯಾಗಿದ್ದು, ಮಾಸ್ಕ್, ಗ್ಲೌಸ್ ಹಾಕಿ ಕಸ ಗುಡಿಸುವ ಮೂಲಕ ಗಮನ ಸೆಳೆದಿದ್ದಾರೆ. ಬಳಿಕ ತಳ್ಳುವ ತರಕಾರಿ ಗಾಡಿ ವ್ಯಾಪಾರಿಗಳ ಬಳಿ ಮಾತನಾಡಿದ ಸಚಿವರು, ಕೇಂದ್ರ ಯೋಜನೆಯಡಿ ಲೋನ್ ಸಂಬಂಧ ವಿಚಾರಿಸಿದ್ದಾರೆ. ಈ ವೇಳೆ ನಮಗೆ ಲೋನ್ ಕೊಡಿಸಿ ಎಂದು ವ್ಯಾಪಾರಿಗಳು ಸಚಿವರನ್ನು… pic.twitter.com/Qb2QEE5uS0
— kannadaprabha (@KannadaPrabha) June 14, 2026
बातचीत के दौरान कई रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं ने मंत्री के सामने अपनी मांगें भी रखीं। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने और आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए आसान शर्तों पर ऋण की आवश्यकता है।
विक्रेताओं ने यह भी सुझाव दिया कि ऋण प्रक्रिया को और सरल बनाया जाए, ताकि छोटे कारोबारियों को समय पर वित्तीय सहायता मिल सके और वे अपने कामकाज को बेहतर तरीके से आगे बढ़ा सकें।
मंत्री ने उनकी बातों को ध्यानपूर्वक सुना और सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य छोटे व्यापारियों और असंगठित क्षेत्र के कामगारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री की सक्रिय भागीदारी और सीधे लोगों से संवाद की पहल को स्थानीय लोगों ने सकारात्मक रूप से देखा। स्वच्छता अभियान में उनकी भागीदारी ने न केवल स्वच्छता का संदेश दिया, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़ाव को भी दर्शाया।
कुल मिलाकर, इस कार्यक्रम में स्वच्छता और जनसंवाद दोनों पहलुओं पर जोर देखने को मिला, जहां एक ओर साफ-सफाई को बढ़ावा दिया गया, वहीं दूसरी ओर छोटे व्यापारियों की समस्याओं और जरूरतों को भी समझा गया।





