कर्नाटक

Karnataka : मुंह के कैंसर पर नई रिसर्च

Kavita2
3 July 2026 12:05 PM IST
Karnataka : मुंह के कैंसर पर नई रिसर्च
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Karnataka कर्नाटक: मुंह के कैंसर के इलाज को लेकर वैज्ञानिकों ने एक नई दिशा में शोध शुरू किया है। भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) और एम.एस. रमैया मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं ने लो-फ्रीक्वेंसी अल्ट्रासाउंड तकनीक के जरिए कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने की संभावना पर अध्ययन किया है। इस शोध को कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति माना जा रहा है।

शोध के अनुसार, मुंह के कैंसर की कोशिकाएं अल्ट्रासाउंड से उत्पन्न हल्के मैकेनिकल स्टिम्युलेशन के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं। जब इन कैंसर कोशिकाओं को इस प्रकार के अल्ट्रासाउंड प्रभाव के संपर्क में लाया जाता है, तो वे चुनिंदा रूप से नष्ट हो जाती हैं, जबकि स्वस्थ मुंह की एपिथेलियल कोशिकाएं इससे प्रभावित नहीं होतीं।

यह अध्ययन “3D कोकल्चर प्लेटफॉर्म और लो-फ्रीक्वेंसी अल्ट्रासाउंड का इस्तेमाल करके मुंह के कैंसर सेल्स में बायोकेमिकल कमजोरियों का पता लगाना” शीर्षक से प्रकाशित किया गया है। इसे अंतरराष्ट्रीय साइंस डायरेक्ट जर्नल में जगह मिली है, जिससे इस शोध को वैश्विक मान्यता प्राप्त हुई है।

IISc के बायोइंजीनियरिंग विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर अजय तिजोरे, जो इस अध्ययन के सह-लेखक भी हैं, ने बताया कि इस तकनीक की खासियत यह है कि यह कैंसर कोशिकाओं की यांत्रिक कमजोरी (mechanical weakness) का उपयोग करके उन्हें लक्ष्य बनाती है। पारंपरिक उपचार जैसे कीमोथेरेपी या गर्मी आधारित तकनीकों के बजाय, यह तरीका हल्के मैकेनिकल फोर्स का इस्तेमाल करता है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, इस तकनीक से कैंसर कोशिकाओं को नियंत्रित तरीके से नुकसान पहुंचाया जा सकता है, जिससे शरीर के स्वस्थ ऊतकों को कम से कम हानि होती है। यह विशेष रूप से मुंह के कैंसर जैसे मामलों में उपयोगी हो सकता है, जहां टारगेटेड ट्रीटमेंट की आवश्यकता होती है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह शोध भविष्य में कैंसर उपचार के लिए एक सुरक्षित और कम साइड इफेक्ट वाला विकल्प प्रदान कर सकता है। हालांकि, अभी यह अध्ययन शुरुआती चरण में है और इसे क्लिनिकल ट्रायल और आगे के शोध से गुजरना होगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर यह तकनीक सफल होती है, तो यह कैंसर के इलाज की मौजूदा विधियों में एक बड़ा बदलाव ला सकती है। इससे उन मरीजों को भी लाभ मिल सकता है जो पारंपरिक उपचारों के दुष्प्रभावों से परेशान रहते हैं।

कुल मिलाकर, IISc और रमैया मेडिकल कॉलेज की यह रिसर्च मुंह के कैंसर के इलाज में एक नई उम्मीद के रूप में देखी जा रही है, जो भविष्य में चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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