
Karnataka कर्नाटक: इस मॉनसून सीजन के दौरान किसानों को दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ राज्य के लगभग 20 जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है, वहीं दूसरी तरफ बुवाई के पीक सीजन से पहले खाद (फर्टिलाइज़र) की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार बिगड़ते हालात ने कृषि कार्यों पर गंभीर असर डाला है।
कर्नाटक स्टेट नेचुरल डिज़ास्टर मॉनिटरिंग सेंटर (KSNDMC) के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में इस समय तक औसतन 191 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक केवल 105 मिमी बारिश दर्ज की गई है। यह सामान्य से करीब 45 प्रतिशत की बड़ी कमी को दर्शाता है, जिससे राज्य के कई हिस्सों में सूखा जैसी स्थिति बनने की आशंका बढ़ गई है।
क्षेत्रवार स्थिति को देखें तो मलनाड क्षेत्र में सबसे अधिक 62 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है। इसके बाद कोस्टल कर्नाटक में 54 प्रतिशत और नॉर्थ इंटीरियर में लगभग 30 प्रतिशत बारिश कम हुई है। वहीं साउथ इनलैंड क्षेत्र में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, जहां केवल 6 प्रतिशत का अंतर दर्ज किया गया है।
राज्य के 18 जिले ऐसे हैं जिन्हें कम या बहुत कम बारिश की श्रेणी में रखा गया है। वहीं 10 जिले ऐसे हैं जहां बारिश सामान्य श्रेणी में दर्ज की गई है, लेकिन इन जिलों के कई तालुकों और होबली क्षेत्रों में भी वर्षा की कमी बनी हुई है। इस असमान बारिश के कारण कृषि गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं और कई इलाकों में बुवाई कार्य धीमा पड़ गया है।
किसानों के लिए एक और बड़ी समस्या खाद की कमी के रूप में सामने आई है। विशेषकर बुवाई के महत्वपूर्ण समय में उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। राज्य में जून के अंत तक 11.53 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों की बिक्री हो चुकी है, जबकि मौजूदा स्टॉक 10.93 लाख मीट्रिक टन बताया गया है।
हालांकि सबसे बड़ी चिंता DAP (डायमोनियम फॉस्फेट) को लेकर है, जिसकी भारी मांग के मुकाबले आपूर्ति कम है। उपलब्ध 84,000 मीट्रिक टन DAP स्टॉक राज्य की लगभग 4 लाख मीट्रिक टन की जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। इससे आने वाले दिनों में खाद संकट और गहरा सकता है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द बारिश की स्थिति में सुधार नहीं हुआ और खाद की आपूर्ति सुचारु नहीं की गई, तो राज्य में खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर धान, मक्का और अन्य प्रमुख फसलों की पैदावार पर पड़ सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में किसान पहले ही बारिश की अनिश्चितता से परेशान हैं। कई इलाकों में खेत सूखे पड़े हैं और बुवाई का काम या तो रुका हुआ है या धीमी गति से चल रहा है। खाद की कमी ने उनकी मुश्किलों को और बढ़ा दिया है, क्योंकि खेती का पूरा चक्र समय पर संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर करता है।
सरकारी स्तर पर हालात पर नजर रखी जा रही है और संबंधित विभागों को स्थिति सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि जमीनी स्तर पर किसानों को अभी तत्काल राहत मिलती नहीं दिख रही है।
कुल मिलाकर, कर्नाटक में इस मॉनसून सीजन में बारिश की भारी कमी और खाद संकट ने कृषि क्षेत्र के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। यदि जल्द ही मौसम और आपूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं होता, तो इसका व्यापक असर राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।





