कर्नाटक

Karnataka : मंत्री ने की आम यात्री की तरह बस यात्रा, छुट्टे नहीं होने पर कंडक्टर ने उतारा

Kavita2
12 July 2026 10:30 AM IST
Karnataka : मंत्री ने की आम यात्री की तरह बस यात्रा, छुट्टे नहीं होने पर कंडक्टर ने उतारा
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Karnataka कर्नाटक: परिवहन मंत्री बायराथी सुरेश ने शनिवार रात आम यात्रियों की परेशानियों को समझने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया। मंत्री बिना किसी सरकारी पहचान के, मास्क पहनकर बेंगलुरु महानगर परिवहन निगम (BMTC) की बस में आम यात्री की तरह सफर करने पहुंचे। इस दौरान उन्हें शहर की बस सेवाओं की जमीनी हकीकत का सामना करना पड़ा।

मंत्री सुरेश का यह निरीक्षण किसी औचक जांच अभियान की तरह था, जिसमें वह यह जानना चाहते थे कि आम यात्रियों को रोजाना किन समस्याओं से गुजरना पड़ता है। हालांकि, मास्क की वजह से बस कंडक्टर उन्हें पहचान नहीं पाया और मंत्री को भी एक सामान्य यात्री की तरह ही व्यवहार का सामना करना पड़ा।

हेब्बल से नागाशेट्टीहल्ली तक किया सफर

जानकारी के मुताबिक, परिवहन मंत्री बायराथी सुरेश ने हेब्बल से नागाशेट्टीहल्ली जाने वाली BMTC बस में यात्रा की। वह बिना किसी सुरक्षा या अधिकारियों के साथ बस में पहुंचे। उन्होंने बस में चढ़कर दो टिकट मांगे और किराए के भुगतान के लिए कंडक्टर को 100 रुपये का नोट दिया।

कंडक्टर ने जब 100 रुपये का नोट देखा तो उसने मंत्री से छुट्टे पैसे मांगे। मंत्री ने बताया कि उनके पास छुट्टे पैसे नहीं हैं। इसके बाद कंडक्टर ने उनसे कहा कि अगर उनके पास सही पैसे नहीं हैं तो वह बस से उतर जाएं।

इस घटना ने मंत्री को भी आम यात्रियों की उस परेशानी का अनुभव करा दिया, जिसका सामना कई लोग रोजाना सार्वजनिक परिवहन में करते हैं।

मंत्री ने जाना यात्रियों का वास्तविक अनुभव

मंत्री बायराथी सुरेश ने बताया कि उनका उद्देश्य बस सेवाओं की वास्तविक स्थिति को समझना था। अक्सर अधिकारी और मंत्री केवल रिपोर्ट और शिकायतों के आधार पर समस्याओं का आकलन करते हैं, लेकिन आम यात्रियों को किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है, इसे जानने के लिए उन्होंने खुद यात्री बनकर सफर करने का फैसला किया।

इस दौरान उन्हें टिकट खरीदने से लेकर छुट्टे पैसों की समस्या तक का सामना करना पड़ा। मंत्री ने महसूस किया कि कई बार छोटी-छोटी परेशानियां यात्रियों के लिए बड़ी समस्या बन जाती हैं।

छुट्टे पैसे की समस्या पर उठे सवाल

बसों में छुट्टे पैसों की समस्या कोई नई बात नहीं है। कई बार यात्रियों और कंडक्टरों के बीच किराए के भुगतान को लेकर विवाद की स्थिति बन जाती है। डिजिटल भुगतान की सुविधा बढ़ने के बावजूद कई यात्री अब भी नकद भुगतान करते हैं।

मंत्री के साथ हुई घटना ने इस मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए क्या और कदम उठाए जाने चाहिए।

कंडक्टर ने नहीं पहचाना मंत्री को

मंत्री के मास्क पहनने की वजह से BMTC कंडक्टर उन्हें पहचान नहीं सका। अगर कंडक्टर को पता होता कि बस में सफर कर रहा व्यक्ति राज्य का परिवहन मंत्री है, तो शायद स्थिति अलग हो सकती थी। लेकिन मंत्री ने जानबूझकर अपनी पहचान छिपाई ताकि वह यात्रियों और कर्मचारियों के वास्तविक व्यवहार को समझ सकें।

इस तरह के निरीक्षण का उद्देश्य अक्सर यह पता लगाना होता है कि अधिकारी और कर्मचारी आम लोगों के साथ किस तरह पेश आते हैं।

परिवहन व्यवस्था सुधारने की कोशिश

कर्नाटक सरकार पिछले कुछ समय से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दे रही है। BMTC बेंगलुरु शहर की लाइफलाइन मानी जाती है और रोजाना लाखों लोग बसों से यात्रा करते हैं।

यात्रियों की सुविधा, समय पर बसों की उपलब्धता, कर्मचारियों का व्यवहार और टिकट व्यवस्था जैसे मुद्दे परिवहन विभाग के लिए लगातार प्राथमिकता बने हुए हैं।

मंत्री के इस निरीक्षण से यह संकेत मिलता है कि सरकार जमीनी स्तर पर समस्याओं को समझने की कोशिश कर रही है। आम तौर पर मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी योजनाओं की समीक्षा बैठकों के जरिए जानकारी लेते हैं, लेकिन इस बार मंत्री ने खुद यात्री बनकर वास्तविक अनुभव हासिल किया।

आगे हो सकती है समीक्षा

इस घटना के बाद परिवहन विभाग की ओर से बस सेवाओं और यात्रियों की समस्याओं को लेकर समीक्षा किए जाने की संभावना है। अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा जा सकता है कि यात्रियों के साथ बेहतर व्यवहार किया जाए और छोटी समस्याओं का समाधान किया जाए।

मंत्री बायराथी सुरेश का यह कदम सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। कई लोगों ने इसे आम जनता की समस्याओं को समझने की पहल बताया, जबकि कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि ऐसी समस्याओं को दूर करने के लिए स्थायी समाधान पर भी ध्यान देना जरूरी है।

फिलहाल, मंत्री का आम यात्री बनकर बस में सफर करना और खुद एक यात्री की परेशानी महसूस करना सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को लेकर एक अलग तरह का संदेश देता है। यह घटना बताती है कि जमीनी हकीकत जानने के लिए कभी-कभी अधिकारियों को खुद आम लोगों के बीच जाकर अनुभव लेना पड़ता है।

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