कर्नाटक

Karnataka : मेकेदातु बांध परियोजना में तेज़ी, 12,600 एकड़ भूमि की तलाश शुरू

Kavita2
19 Jun 2026 11:37 AM IST
Karnataka : मेकेदातु बांध परियोजना में तेज़ी, 12,600 एकड़ भूमि की तलाश शुरू
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Karnataka कर्नाटक:कर्नाटक में प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर काम में तेज़ी देखने को मिल रही है। राज्य की कमान D.K. Shivakumar के हाथ में आने के दो हफ्ते से भी कम समय में इस महत्वपूर्ण परियोजना से जुड़े प्रशासनिक कदम तेजी से आगे बढ़ाए जा रहे हैं। यह परियोजना उनके प्रमुख प्राथमिकता वाले विकास कार्यों में से एक मानी जा रही है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, राज्य प्रशासन ने राजस्व विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखकर कुल 12,600 एकड़ भूमि की पहचान करने के निर्देश दिए हैं। यह जमीन उस वन क्षेत्र के बदले में उपलब्ध कराई जाएगी, जो प्रस्तावित जलाशय (रिज़र्वॉयर) के निर्माण के दौरान डूब सकता है। इस प्रक्रिया को पर्यावरणीय संतुलन और वन संरक्षण नियमों के तहत एक अनिवार्य कदम माना जा रहा है।

मेकेदातु बांध परियोजना कावेरी नदी पर प्रस्तावित है और इसे राज्य के जल संसाधन प्रबंधन के लिहाज से एक महत्वपूर्ण योजना के रूप में देखा जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य बेंगलुरु और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति को मजबूत करना और जल भंडारण क्षमता को बढ़ाना बताया जाता है।

हालांकि, इस परियोजना को लेकर पहले भी कई पर्यावरणीय और अंतर-राज्यीय विवाद सामने आ चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े जलाशय परियोजना में वन क्षेत्र का नुकसान एक गंभीर मुद्दा होता है, जिसे संतुलित करने के लिए प्रतिपूरक वनीकरण (compensatory afforestation) जैसे उपाय अपनाए जाते हैं। इसी प्रक्रिया के तहत सरकार द्वारा 12,600 एकड़ भूमि की पहचान की जा रही है।

प्रशासनिक स्तर पर यह कदम यह संकेत देता है कि सरकार परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए ज़मीन और पर्यावरण संबंधी औपचारिकताओं को तेजी से पूरा करना चाहती है। राजस्व विभाग को दिए गए निर्देशों में उन क्षेत्रों की पहचान करने को कहा गया है, जहां वृक्षारोपण और हरित क्षेत्र विकसित कर पर्यावरणीय क्षति की भरपाई की जा सके।

सूत्रों के अनुसार, भूमि चयन की प्रक्रिया में स्थानीय प्रशासन, वन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों को शामिल किया जाएगा ताकि उपयुक्त और उपलब्ध भूमि का सही आकलन किया जा सके। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि चयनित भूमि परियोजना के उद्देश्यों के अनुरूप हो और दीर्घकालिक हरित विकास में योगदान दे सके।

मेकेदातु परियोजना को लेकर राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर लंबे समय से चर्चा चल रही है। अब हाल के घटनाक्रम से संकेत मिल रहे हैं कि सरकार इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाना चाहती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की बड़ी परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय संतुलन सबसे महत्वपूर्ण चरण होते हैं। यदि यह प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो जाती है, तो परियोजना के अगले चरणों को गति मिल सकती है।

फिलहाल सरकार की ओर से इस मामले पर विस्तृत आधिकारिक योजना जारी नहीं की गई है, लेकिन प्रशासनिक गतिविधियों से यह स्पष्ट है कि मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर काम अब तेजी पकड़ रहा है।

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