
Karnataka कर्नाटक: सरकार ने अपनी प्रमुख गारंटी योजनाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य में अब घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया जाएगा, ताकि वास्तविक लाभार्थियों की पहचान की जा सके और अयोग्य दावेदारों को योजनाओं से बाहर किया जा सके। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब नई आवेदनों और लाभार्थियों को लेकर विवाद और विरोध सामने आ रहा है।
विधान सौध में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने की। बैठक में गारंटी योजनाओं के क्रियान्वयन और उनसे जुड़ी तकनीकी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
D.K. Shivakumar ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी पात्र लाभार्थी को योजनाओं से बाहर नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन अपात्र व्यक्तियों और दुरुपयोग करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लाभार्थियों की आर्थिक स्थिति बेहतर है, उन्हें स्वेच्छा से योजनाओं से बाहर आने के लिए प्रेरित किया जाए।
बैठक में ‘गृह लक्ष्मी’ योजना के क्रियान्वयन से जुड़ी दो प्रमुख तकनीकी समस्याएं सामने आईं। इनमें मृत लाभार्थियों के खातों में राशि का ट्रांसफर और जीएसटी तथा आयकर (IT) भरने वाले लोगों के खातों में भी लाभ राशि जमा होना शामिल है।
Karnataka State Guarantee Implementation Authority के उपाध्यक्ष एस.आर. मेहरोज़ खान ने बताया कि इन गड़बड़ियों की जांच की जा रही है और कई मामलों में लाभ राशि वापस भी ली जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि सभी लाभार्थियों के बैंक खाते केवल कर्नाटक राज्य के भीतर ही होने चाहिए। समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में धनराशि अन्य राज्यों में ट्रांसफर की गई और कर्नाटक के बाहर के मतदाताओं को भी योजना का लाभ मिला।
इसके अलावा कुछ मामलों में यह भी पाया गया कि लाभार्थियों ने एयरटेल बैंक और अन्य माध्यमों से यूपीआई खाते खोलकर योजना का लाभ प्राप्त किया।
सरकार का मानना है कि इन सभी अनियमितताओं को रोकने के लिए लाभार्थी डेटाबेस की सख्त जांच और नियमित अपडेट जरूरी है। साथ ही घर-घर सर्वे से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल पात्र और जरूरतमंद लोगों को ही योजनाओं का लाभ मिले।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सभी योजनाओं की गहन समीक्षा करें और किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता को तुरंत रोकें। सरकार का कहना है कि इन सुधारों का उद्देश्य गारंटी योजनाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाना है।
कुल मिलाकर, यह कदम राज्य की कल्याणकारी योजनाओं में सुधार और लाभार्थी चयन प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।





