कर्नाटक

Karnataka : कम लागत तकनीक से मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी

Kavita2
1 July 2026 12:21 PM IST
Karnataka : कम लागत तकनीक से मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी
x

Karnataka कर्नाटक: यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज, धारवाड़ (UAS) और गांधी कृषि विज्ञान केंद्र (GKVK), बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण और कम लागत वाली बायोचार तकनीक विकसित की है। इस तकनीक का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और उसमें पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाने में मदद करना है।

इस नई तकनीक को लेकर UAS के वाइस चांसलर एस.वी. सुरेश ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में आधे से अधिक कृषि भूमि में मिट्टी में मौजूद ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा आवश्यक स्तर से नीचे पहुंच चुकी है, जो कृषि उत्पादन के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि इस समस्या को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

वैज्ञानिकों के अनुसार, बायोचार तकनीक मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने का एक प्रभावी और टिकाऊ तरीका है। इसके जरिए किसानों को अपनी जमीन को फिर से उपजाऊ बनाने में सहायता मिल सकती है, जिससे लंबे समय में कृषि उत्पादन में सुधार होगा।

इस तकनीक की सबसे खास बात यह है कि इसमें किसानों को खेतों में बची हुई कृषि अवशेष सामग्री का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। इससे न केवल कचरे का सही उपयोग होता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है।

UAS के ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट – सॉइल टेस्टिंग एंड क्रॉप रिस्पॉन्स (STCR) डिवीजन के प्रमुख डॉ. आर. कृष्णमूर्ति ने बताया कि बायोचार बनाने की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के बाहरी रसायन या एडिटिव्स का उपयोग नहीं किया जाता है। यह पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया पर आधारित तकनीक है।

उन्होंने बताया कि इसके लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कृषि अवशेषों का उपयोग किया जाता है, जैसे कपास, मक्का और शहतूत के डंठल, सूरजमुखी और अन्य फसलों के बचे हुए हिस्से। इन अवशेषों को नियंत्रित प्रक्रिया के माध्यम से बायोचार में बदला जाता है, जिसे बाद में मिट्टी में मिलाया जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बायोचार मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ उसमें पोषक तत्वों को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करता है। इससे फसलों की उत्पादकता में सुधार होने की संभावना बढ़ जाती है।

कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक खासकर उन किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है जो सीमित संसाधनों के साथ खेती करते हैं। कम लागत में मिट्टी की उर्वरता बढ़ने से उनकी आय में भी वृद्धि हो सकती है।

इसके साथ ही यह तकनीक पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद मानी जा रही है, क्योंकि इससे खेतों में जलाए जाने वाले कृषि अवशेषों की समस्या कम होगी, जो वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण है।

कुल मिलाकर, यह बायोचार तकनीक कर्नाटक के कृषि क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण नवाचार के रूप में देखी जा रही है, जो किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के साथ-साथ मिट्टी और पर्यावरण दोनों के संरक्षण में मदद करेगी।

Next Story