
बेंगलुरु: गदग जिले की रोना विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक गुरुपादगौड़ा संगनागौड़ा पाटिल को कर्नाटक विधानसभा का नया स्पीकर चुन लिया गया है। जीएस पाटिल के नाम से मशहूर गुरुपादगौड़ा संगनागौड़ा पाटिल का चयन निर्विरोध हुआ। उनके नाम का प्रस्ताव मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रखा था, जिसका समर्थन उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने किया।
विधानसभा में चयन प्रक्रिया अंतरिम स्पीकर टीबी जयचंद्र की अध्यक्षता में पूरी की गई। इस दौरान जीएस पाटिल के नाम पर सभी पक्षों ने सहमति जताई और उन्हें विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी गई।
कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष का पद पिछले कुछ समय से खाली था। इससे पहले विधानसभा के पूर्व स्पीकर यूटी खादर ने 3 जून को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वह मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री के रूप में शामिल हो गए थे।
स्पीकर पद खाली होने के बाद विधानसभा की कार्यवाही संचालित करने के लिए अंतरिम स्पीकर की नियुक्ति की गई थी। अब जीएस पाटिल के निर्विरोध चुने जाने के बाद विधानसभा को स्थायी अध्यक्ष मिल गया है।
गुरुपादगौड़ा संगनागौड़ा पाटिल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। वह गदग जिले की रोना विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। विधायक के रूप में उन्होंने क्षेत्रीय मुद्दों और विकास कार्यों को लेकर लगातार सक्रिय भूमिका निभाई है।
विधानसभा अध्यक्ष का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। स्पीकर सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने, नियमों का पालन कराने और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच संतुलन बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाते हैं।
कर्नाटक विधानसभा में नए स्पीकर के चयन के बाद अब सदन की कार्यवाही नए नेतृत्व के तहत आगे बढ़ेगी। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, विधानसभा अध्यक्ष का पद निष्पक्ष भूमिका की मांग करता है और ऐसे में अध्यक्ष के फैसलों पर सभी की नजर रहती है।
जीएस पाटिल के सामने सदन में अनुशासन बनाए रखना, विधायी कार्यों को व्यवस्थित तरीके से संचालित करना और सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर देना प्रमुख चुनौतियां होंगी।
कांग्रेस सरकार ने उनके नाम को आगे बढ़ाते हुए विधानसभा में सहमति बनाने की कोशिश की। विपक्ष की ओर से भी उनके चयन पर कोई विरोध नहीं किया गया, जिसके बाद उनका निर्वाचन निर्विरोध हो गया।
विधानसभा अध्यक्ष के चयन के बाद कांग्रेस नेताओं ने जीएस पाटिल को बधाई दी और उम्मीद जताई कि वह सदन की गरिमा बनाए रखते हुए अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।
जीएस पाटिल ने भी पद संभालने के बाद सदन की परंपराओं और नियमों के अनुसार कार्य करने की बात कही। उन्होंने सभी सदस्यों के सहयोग से विधानसभा की कार्यवाही बेहतर तरीके से चलाने का भरोसा जताया।
कर्नाटक विधानसभा का यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब राज्य में राजनीतिक गतिविधियां लगातार जारी हैं। विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहने वाली है, क्योंकि सदन में कई अहम विधेयकों और मुद्दों पर चर्चा होनी है।
विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव आमतौर पर सदन में बहुमत के आधार पर होता है, लेकिन जब किसी उम्मीदवार के खिलाफ दूसरा नामांकन नहीं आता तो चयन निर्विरोध हो जाता है। जीएस पाटिल के मामले में भी यही स्थिति बनी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि निर्विरोध चयन से विधानसभा में सहमति का संदेश गया है। अब नए स्पीकर के नेतृत्व में सदन की कार्यवाही को प्रभावी और व्यवस्थित तरीके से चलाने की जिम्मेदारी होगी।





