कर्नाटक

Karnataka : अन्नभाग्य योजना में बदलाव के संकेत

Kavita2
23 Jun 2026 10:11 AM IST
Karnataka : अन्नभाग्य योजना में बदलाव के संकेत
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Karnataka कर्नाटक: सरकार की पांच गारंटी योजनाओं में शामिल 'अन्नभाग्य' योजना को लेकर बड़े बदलाव के संकेत सामने आए हैं। इससे पहले 'गृहलक्ष्मी' और 'गृहज्योति' योजनाओं में कुछ संशोधन किए जा चुके हैं और अब सरकार ‘अन्नभाग्य’ योजना में भी लाभार्थियों की संख्या को लेकर सख्ती बरतने की तैयारी में है।

राज्य के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री के.एच. मुनियप्पा ने इस योजना में संभावित बदलावों का संकेत दिया है। बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ‘अन्नभाग्य’ योजना का लाभ वास्तव में जरूरतमंद और पात्र गरीब परिवारों तक ही पहुंचे।

मंत्री के.एच. मुनियप्पा ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में राज्य में लगभग 13 से 14 लाख ऐसे लोग हैं, जिनके पास बीपीएल (BPL) कार्ड हैं, जबकि वे इस श्रेणी के लिए पात्र नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे अपात्र लाभार्थियों की पहचान की जा रही है और उन्हें जल्द ही सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

उन्होंने बताया कि सरकार पहले ही ऐसे लोगों से स्वेच्छा से अपील कर चुकी है कि जो पात्रता मानकों को पूरा नहीं करते, वे अपने बीपीएल कार्ड को एपीएल (APL) श्रेणी में बदलवा लें। इसके बावजूद कई लोगों ने ऐसा नहीं किया, जिसके बाद अब प्रशासनिक स्तर पर जांच तेज कर दी गई है।

मंत्री ने कहा कि अब सरकार को अपात्र लाभार्थियों की विस्तृत रिपोर्ट मिल चुकी है और इस पर अंतिम निर्णय जल्द ही लिया जाएगा। आने वाले दिनों में इस योजना के क्रियान्वयन में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

'अन्नभाग्य' योजना कर्नाटक सरकार की एक प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजना है, जिसके तहत गरीब और जरूरतमंद परिवारों को खाद्य सुरक्षा प्रदान की जाती है। इस योजना का उद्देश्य राज्य में कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे, यह सुनिश्चित करना है।

सरकार का मानना है कि यदि अपात्र लोग इस योजना का लाभ लेते रहेंगे, तो वास्तविक जरूरतमंदों तक इसका पूरा लाभ नहीं पहुंच पाएगा। इसी कारण लाभार्थियों की सूची को अपडेट करने और पात्रता की पुनः जांच करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

सूत्रों के अनुसार, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग डिजिटल डेटा और फील्ड वेरिफिकेशन के आधार पर लाभार्थियों की जांच कर रहा है। इसमें आय, संपत्ति और अन्य सामाजिक-आर्थिक मानकों को आधार बनाया जा रहा है।

मंत्री मुनियप्पा ने यह भी कहा कि सरकार की मंशा किसी भी गरीब परिवार को नुकसान पहुंचाने की नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे।

इस बीच, राजनीतिक हलकों में इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार गारंटी योजनाओं में धीरे-धीरे कटौती कर रही है, जबकि सत्ताधारी पक्ष का कहना है कि यह केवल योजना को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की प्रक्रिया है।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि सूची से अपात्र लोगों को हटाने के बाद योजना का बजट अधिक प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जा सकेगा और वास्तविक लाभार्थियों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी।

फिलहाल विभाग अंतिम रिपोर्ट और सत्यापन प्रक्रिया पूरी करने में जुटा हुआ है, जिसके बाद सरकार इस पर अंतिम निर्णय की घोषणा करेगी।

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