
Karnataka कर्नाटक: सरकार ने अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने पुलिस विभाग को निर्देश दिया है कि अब हर महीने के दूसरे रविवार को सभी पुलिस यूनिट्स में अनिवार्य रूप से SC-ST दिवस की बैठक आयोजित की जाए।
गृह मंत्री के निर्देश के अनुसार, ये बैठकें राज्य के सभी पुलिस कमिश्नरेट, जिला पुलिस कार्यालयों और पुलिस थानों के स्तर पर आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों का उद्देश्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों से जुड़ी कानून-व्यवस्था की समस्याओं, अत्याचारों, शिकायतों और पुलिस सेवाओं से संबंधित मुद्दों को सीधे वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाना है, ताकि उनका जल्द से जल्द समाधान किया जा सके।
प्रियांक खड़गे ने कहा कि SC और ST समुदायों के लोगों को कई बार अपनी समस्याओं के समाधान के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। ऐसे में पुलिस अधिकारियों और प्रभावित समुदायों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने से समस्याओं को समय पर समझने और कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने पुलिस महानिदेशक (DGP) और पुलिस महानिरीक्षक (IGP) को निर्देश दिए हैं कि इन बैठकों को सभी पुलिस यूनिट्स में अनिवार्य बनाया जाए। साथ ही अधिकारियों से कहा गया है कि बैठक में सामने आने वाली शिकायतों पर गंभीरता से विचार कर मौके पर ही समाधान निकालने की कोशिश की जाए।
गृह मंत्री ने कहा कि पुलिस विभाग की जिम्मेदारी केवल अपराधों की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों को न्याय और सुरक्षा का भरोसा देना भी उसकी अहम जिम्मेदारी है। SC और ST समुदायों के लोगों को यदि किसी तरह की परेशानी या भेदभाव का सामना करना पड़ता है तो उनकी शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाना चाहिए।
इन बैठकों में स्थानीय स्तर के पुलिस अधिकारी, वरिष्ठ अधिकारी और समुदाय के प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर की समस्याओं को समझना और प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी कदम उठाना है।
पुलिस विभाग के लिए यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि कई बार अत्याचार या भेदभाव से जुड़े मामलों में पीड़ित लोगों को शिकायत दर्ज कराने और न्याय पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। नियमित बैठकों के जरिए पुलिस और समुदायों के बीच विश्वास बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।
गृह मंत्री ने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि बैठक में मिलने वाली शिकायतों का केवल रिकॉर्ड तैयार न किया जाए, बल्कि उन पर कार्रवाई भी हो। संबंधित अधिकारियों को मामलों की निगरानी करने और शिकायतकर्ताओं को समाधान की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।
कर्नाटक में SC और ST समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए पहले से ही कई कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत ऐसे मामलों में विशेष कार्रवाई का प्रावधान है। गृह विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था से इन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में भी मदद मिलेगी।
प्रियांक खड़गे के इस निर्देश के बाद पुलिस विभाग में तैयारियां शुरू हो गई हैं। सभी पुलिस यूनिट्स को बैठक आयोजित करने और उसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजने के लिए कहा जा सकता है।
अधिकारियों का मानना है कि नियमित संवाद से पुलिस और आम जनता के बीच दूरी कम होगी। खासकर SC और ST समुदायों के लोगों को अपनी समस्याएं सीधे अधिकारियों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
राज्य सरकार का कहना है कि इन बैठकों का मुख्य लक्ष्य शिकायतों का समाधान करना, पुलिस सेवाओं को बेहतर बनाना और कमजोर वर्गों में सुरक्षा की भावना मजबूत करना है।
अब यह देखना होगा कि इन मासिक बैठकों के बाद SC और ST समुदायों से जुड़ी शिकायतों के निपटारे में कितना सुधार आता है। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से पुलिस व्यवस्था अधिक जवाबदेह और संवेदनशील बनेगी।





