कर्नाटक

कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले को रद्द किया

Subhi
13 Oct 2026 9:42 AM IST
कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले को रद्द किया
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बेंगलुरु: राज्य सरकार को एक बड़ा झटका देते हुए, कर्नाटक हाई कोर्ट ने सोमवार को 'कर्नाटक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (शैक्षणिक संस्थानों में सीटों का आरक्षण और राज्य के तहत सेवाओं में नियुक्तियों या पदों पर आरक्षण) अधिनियम, 2022' की धारा 3 और 4 को रद्द कर दिया। इस अधिनियम के ज़रिए अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लोगों के लिए आरक्षण को क्रमशः 15% से बढ़ाकर 17% और 3% से बढ़ाकर 7% कर दिया गया था।

अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण 32% पर ही बनाए रखा गया, लेकिन फिर भी कुल कोटा तय सीमा 50% से ज़्यादा हो गया। चीफ जस्टिस विभु बाखरू और जस्टिस के.एस. हेमलेखा की डिवीज़न बेंच ने कहा, "धारा 3, जहाँ तक यह कुल आरक्षण को 50% की सीमा से ऊपर ले जाती है, उसे रद्द किया जाता है क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन करती है।

बेंच ने यह आदेश कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया, जिनमें महेंद्र कुमार मित्रा और अन्य द्वारा दायर एक PIL भी शामिल थी। इन याचिकाओं में संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 (समान सुरक्षा और समान अवसर के प्रावधान) के तहत आरक्षण देने की राज्य की शक्ति के दायरे पर सवाल उठाया गया था। यह अधिनियम 12 जनवरी, 2023 को लागू हुआ था।

सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों (जिनमें इंदिरा साहनी मामला भी शामिल है) का ज़िक्र करते हुए, हाई कोर्ट ने कहा कि भले ही राज्य के पास यह अधिनियम बनाने की विधायी क्षमता थी, लेकिन राज्य सरकार के लिए SC और ST के राष्ट्रीय आयोगों से सलाह-मशविरा करना ज़रूरी था। अधिनियम बनाने के बाद सिर्फ़ एक पत्र लिख देने को संविधान के अनुच्छेद 338 (9) और 338A(9) के तहत ज़रूरी सलाह-मशविरा नहीं माना जा सकता। राज्य ने 10 दिसंबर, 2025 और 20 जनवरी, 2026 की तारीख वाले पत्र आयोगों को तब लिखे, जब यह कानून बने लगभग तीन साल हो चुके थे और अदालत में इसकी वैधता पर सवाल उठाए जा चुके थे।

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