
Karnataka कर्नाटक: हाई कोर्ट ने बेंगलुरु स्थित DRDO कैंपस से 21 आवारा कुत्तों के कथित रूप से गायब होने के मामले में जांच की अनुमति दे दी है। साथ ही अदालत ने जांच एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस मामले में नामजद DRDO के दो अधिकारियों के खिलाफ किसी प्रकार की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई न की जाए।
यह आदेश जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की अध्यक्षता वाली सिंगल-जज बेंच ने DRDO के एस्टेट मैनेजर राकेश कुमार साहू और सफाई सुपरवाइज़र टी.जी. सुधाकर की याचिका पर सुनवाई के बाद जारी किया। अदालत ने इस मामले में 25 मार्च को दिया गया अंतरिम रोक आदेश भी हटा दिया है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों का सामने आना जरूरी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अपराध की प्रकृति का निर्धारण केवल जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही किया जा सकता है।
हालांकि कोर्ट ने अधिकारियों को राहत देते हुए यह भी निर्देश दिया कि उनके खिलाफ कोई कठोर या जबरदस्ती की कार्रवाई नहीं की जाए, लेकिन साथ ही उन्हें जांच में पूरा सहयोग करने का आदेश दिया गया है। अदालत ने जांच एजेंसियों को यह भी निर्देश दिया है कि वे छह सप्ताह के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
मामला 9 मार्च का बताया जा रहा है, जब आरोप है कि DRDO कैंपस की अंदरूनी सड़कों से 21 आवारा कुत्तों को कथित रूप से बिना कानूनी प्रक्रिया के दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया था। इसके बाद से इन कुत्तों का कोई पता नहीं चल सका है, जिससे मामला गंभीर हो गया।
इस घटना को लेकर पशु अधिकार संगठनों और स्थानीय लोगों में भी चिंता जताई गई थी। आरोपों के बाद मामला कानूनी जांच के दायरे में आ गया और अब हाई कोर्ट की निगरानी में इसकी जांच आगे बढ़ेगी।
कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच का उद्देश्य सच्चाई सामने लाना है, न कि किसी को अनावश्यक रूप से परेशान करना। इसलिए जांच एजेंसियों को संतुलित और निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई करनी होगी।
फिलहाल इस मामले में DRDO की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कोर्ट के निर्देशों के बाद जांच प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, यह मामला अब न्यायिक निगरानी में आगे बढ़ेगा और आने वाले छह हफ्तों में जांच रिपोर्ट से स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।





