कर्नाटक

कर्नाटक ने स्टार्टअप्स को सरकारी ऑर्डर दिलाने में मदद के लिए 25 करोड़ रुपये का प्रोग्राम शुरू किया

Tulsi Rao
12 Oct 2026 1:19 PM IST
कर्नाटक ने स्टार्टअप्स को सरकारी ऑर्डर दिलाने में मदद के लिए 25 करोड़ रुपये का प्रोग्राम शुरू किया
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बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने 'गवर्नमेंट फर्स्ट प्रोग्राम' शुरू किया है। इसका मकसद स्थानीय स्टार्टअप्स को सरकारी विभागों की कामकाज से जुड़ी चुनौतियों के समाधान विकसित करके सरकारी कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने में मदद करना है।

इलेक्ट्रॉनिक्स, IT, BT और S&T विभाग की ओर से शुरू की गई इस पहल में कर्नाटक के उन स्टार्टअप्स को बुलाया गया है जिनके पास इस्तेमाल के लिए तैयार समाधान (डिप्लॉयमेंट-रेडी सॉल्यूशंस) हैं। समस्याओं की पहली सूची 'प्रजा सेवा' और 'बैंगलोर वॉटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड' (BWSSB) से आई है। इसमें शिकायतों का समाधान, सिटिज़न कॉल सेंटर, ई-ऑफिस, नॉन-रेवेन्यू वॉटर, ट्रीटेड वेस्टवॉटर, एसेट मैनेजमेंट और डिजिटल ट्विन्स जैसे मुद्दे शामिल हैं।

25 करोड़ रुपये के बजट वाले इस प्रोग्राम का लक्ष्य तीन साल में लगभग 100 स्टार्टअप्स को मदद देना है। चुनी गई कंपनियों को सरकारी सिस्टम में अपने समाधानों को आज़माने (पायलट प्रोजेक्ट) के लिए 25 लाख रुपये तक के वर्क ऑर्डर मिलेंगे। सफल पायलट प्रोजेक्ट्स को बाद में अलग-अलग विभागों में बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है।

इस प्रोग्राम का मकसद सरकारी खरीद में नई कंपनियों के सामने आने वाली चुनौतियों (जैसे लंबी प्रक्रियाएं और स्थापित वेंडर्स को प्राथमिकता) को दूर करना है, साथ ही सरकारी विभागों को स्थानीय स्तर पर विकसित तकनीक तक पहुंच दिलाना है।

FKCCI के पूर्व अध्यक्ष जे. क्रास्टा ने इस पहल का स्वागत किया, लेकिन समय पर भुगतान की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

"यह एक बेहतरीन कॉन्सेप्ट है। हालांकि किसी सरकार ने पहली बार ऐसा करने की कोशिश की है, लेकिन मेरी सलाह यही होगी कि सरकार बिना देरी के समय पर भुगतान करे। क्योंकि अगर भुगतान में देरी हुई, तो स्टार्टअप्स टिक नहीं पाएंगे और बंद हो जाएंगे। सरकार को यह भी पक्का करना होगा कि भुगतान बिना किसी रिश्वत या 40 प्रतिशत कमीशन के दबाव के किया जाए।"

उन्होंने यह भी कहा कि स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने में FKCCI का 'मंथन' (MANTHAN) प्लेटफॉर्म बहुत सफल रहा है।

FKCCI की निवर्तमान अध्यक्ष उमा रेड्डी ने कहा, "इससे स्टार्टअप्स को बाज़ार तक ज़रूरी पहुंच मिलेगी, उन्हें अपने इनोवेशन को बड़े पैमाने पर ले जाने में मदद मिलेगी और रोज़गार के मौके पैदा होंगे। इस पहल को सफल बनाने के लिए पारदर्शी खरीद प्रक्रिया, आसान नियम-कानून और समय पर भुगतान बहुत ज़रूरी होंगे। मैं इसका स्वागत करती हूं।"

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