
बेंगलुरु: प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर बढ़ते विरोध के बीच कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बुधवार को बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार इस परियोजना की समीक्षा के लिए एक विशेष कमेटी का गठन करेगी। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी किसान की जमीन जबरन अधिग्रहित नहीं की जाएगी।
डीके शिवकुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि बिदादी टाउनशिप परियोजना से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य विकास के साथ-साथ किसानों के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग अपनी इच्छा से जमीन देना चाहते हैं, केवल उन्हीं की जमीन लेने पर विचार किया जाएगा।
दो महीने में रिपोर्ट देगी कमेटी
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि प्रस्तावित कमेटी की संरचना को लेकर अंतिम फैसला राज्य मंत्रिमंडल करेगा। उन्होंने कहा कि कमेटी में राजनेताओं, नौकरशाहों, न्यायिक क्षेत्र से जुड़े लोगों या सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को शामिल किया जाएगा या नहीं, इसका निर्णय कैबिनेट स्तर पर लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहती। कमेटी को पूरे मामले का अध्ययन करने और अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए करीब दो महीने का समय दिया जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
किसानों की आपत्तियों पर सरकार का ध्यान
बिदादी टाउनशिप परियोजना को लेकर कई किसानों और स्थानीय लोगों ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पर चिंता जताई है। किसानों का कहना है कि उनकी कृषि भूमि उनके जीवनयापन का मुख्य आधार है और किसी भी निर्णय से पहले उनकी सहमति जरूरी है।
वहीं, सरकार का कहना है कि क्षेत्र के विकास, रोजगार के अवसरों और बेहतर बुनियादी ढांचे को ध्यान में रखते हुए टाउनशिप परियोजना की योजना बनाई जा रही है। हालांकि, सरकार ने यह भी कहा है कि किसानों के हितों की अनदेखी नहीं की जाएगी।
जबरन अधिग्रहण नहीं होगा
डीके शिवकुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी किसान की जमीन जबरन नहीं ली जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की सहमति और उनकी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए ही आगे बढ़ेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि विकास परियोजनाओं के लिए जमीन की जरूरत होती है, लेकिन इसके लिए उचित प्रक्रिया और लोगों का विश्वास जरूरी है। सरकार किसी भी वर्ग के साथ अन्याय नहीं करेगी।
बिदादी टाउनशिप को लेकर क्यों है विवाद
बिदादी क्षेत्र बेंगलुरु के नजदीक स्थित एक महत्वपूर्ण इलाका है और यहां तेजी से शहरी विकास हो रहा है। प्रस्तावित टाउनशिप परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में आवास, उद्योग, व्यापार और अन्य सुविधाओं का विस्तार करना है।
हालांकि, परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की बात सामने आने के बाद स्थानीय किसानों में असंतोष बढ़ गया। किसानों को आशंका है कि जमीन जाने से उनकी आजीविका प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से परियोजना को लेकर सरकार और स्थानीय लोगों के बीच बातचीत की जरूरत महसूस की जा रही है।
सरकार ने बातचीत का दिया संकेत
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सभी पक्षों से बातचीत करेगी और सभी पहलुओं को समझने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति तय होगी।
सरकार का प्रयास है कि विकास परियोजना और किसानों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाया जाए। अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि स्थानीय लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए।
राजनीतिक दबाव के बीच फैसला
बिदादी टाउनशिप परियोजना को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने किसानों की चिंताओं को लेकर सरकार से स्पष्ट नीति की मांग की है। वहीं, सरकार का कहना है कि परियोजना को लेकर सभी निर्णय पारदर्शी तरीके से लिए जाएंगे।
डीके शिवकुमार के बयान के बाद अब सभी की नजरें बनने वाली समीक्षा कमेटी और उसकी रिपोर्ट पर हैं। अगले दो महीनों में कमेटी परियोजना, जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया और किसानों की चिंताओं का अध्ययन करेगी।
फिलहाल सरकार ने साफ कर दिया है कि बिदादी टाउनशिप परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले सभी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी। किसानों की सहमति और हितों को प्राथमिकता देने के आश्वासन के बाद अब कमेटी की रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है।





