
बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने राज्य के टियर-2 और टियर-3 शहरों में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि सरकार का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को नौकरी के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन न करना पड़े।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ऐसी नीतियों पर काम कर रही है, जिनसे छोटे शहरों में उद्योग स्थापित हो सकें और युवाओं को उनके अपने क्षेत्रों में रोजगार मिल सके। उन्होंने कहा कि इससे न केवल पलायन कम होगा, बल्कि राज्य के सभी हिस्सों में आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।
छोटे शहरों में उद्योग लगाने पर सरकार का फोकस
डीके शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता टियर-2 और टियर-3 शहरों में उद्योगों को आकर्षित करना है। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए जरूरी है कि दूसरे शहरों में भी रोजगार और निवेश के अवसर विकसित किए जाएं।
उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य टियर-2 और टियर-3 शहरों में रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए उद्योगों को बढ़ावा देना है। हम चाहते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अपने घर के पास ही रोजगार हासिल कर सकें और उन्हें मजबूरी में शहरों की ओर न जाना पड़े।"
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए सरकार ने कई योजनाएं और नीतिगत कदम उठाए हैं।
उद्योगों को आकर्षित करने के लिए FAR में छूट
मुख्यमंत्री ने बताया कि कलबुर्गी सहित अन्य टियर-2 और टियर-3 शहरों में उद्योगों को आकर्षित करने के लिए सरकार ने विशेष रियायत देने का फैसला किया है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने उद्योगों के लिए 0.6 गुना प्रीमियम फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) की सुविधा देने और डबल FAR की अनुमति देने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि इस कदम से उद्योगों को कम लागत में जमीन का बेहतर उपयोग करने में मदद मिलेगी। इससे कंपनियों के लिए छोटे शहरों में निवेश करना आसान होगा और नए औद्योगिक केंद्र विकसित किए जा सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इन बदलावों को लागू करने के लिए जरूरी संशोधन शहरी विकास विभाग के माध्यम से किए जाएंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा सुधार पर भी जोर
डीके शिवकुमार ने कहा कि सरकार केवल रोजगार के अवसर बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के माध्यम से स्कूल स्थापित करने को प्राथमिकता दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छी शिक्षा से ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर अवसर मिलेंगे और वे भविष्य में रोजगार के लिए अधिक सक्षम बन सकेंगे।
पलायन रोकने की कोशिश
कर्नाटक के कई ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में लोग रोजगार और शिक्षा के लिए बड़े शहरों की ओर जाते हैं। सरकार का मानना है कि अगर छोटे शहरों में ही उद्योग और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तो इस पलायन को काफी हद तक रोका जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संतुलित विकास के लिए जरूरी है कि राज्य के सभी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ें। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों का उद्देश्य केवल राजधानी या बड़े शहरों तक विकास सीमित रखना नहीं है, बल्कि पूरे राज्य में समान अवसर उपलब्ध कराना है।
कलबुर्गी जैसे शहरों को मिलेगा फायदा
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से कलबुर्गी और अन्य उभरते शहरों का जिक्र करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश की काफी संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि बेहतर नीतियों और सुविधाओं के माध्यम से इन शहरों को नए औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।
सरकार का मानना है कि उद्योगों के आने से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, छोटे व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
सरकार की नई औद्योगिक रणनीति
कर्नाटक सरकार की यह पहल राज्य में रोजगार के विकेंद्रीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सरकार का प्रयास है कि उद्योगों को केवल बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तार दिया जाए।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि रोजगार, शिक्षा और औद्योगिक विकास को साथ लेकर चलने से ही राज्य का समग्र विकास संभव है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सरकार ऐसी और योजनाएं लाएगी, जिनसे राज्य के हर क्षेत्र में विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकें।





