
बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की ओर से आयोजित होने वाली केंद्रीकृत NEET परीक्षा के विकल्प के तौर पर राज्य स्तर पर प्रवेश परीक्षा कराने के लिए तैयार है। राज्य के चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. शरण प्रकाश पाटिल ने रविवार को यह जानकारी दी।
मंत्री ने कहा कि कर्नाटक के पास राज्य स्तरीय प्रवेश परीक्षा आयोजित करने के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी क्षमता और विशेषज्ञता मौजूद है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक एग्जामिनेशन अथॉरिटी (KEA) की ओर से आयोजित किया जाने वाला कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) राज्य की परीक्षा व्यवस्था की सफलता का उदाहरण है।
डॉ. शरण प्रकाश पाटिल ने कहा कि अगर केंद्र या संबंधित संस्थाओं की ओर से राज्य स्तर पर मेडिकल प्रवेश परीक्षा आयोजित करने का अवसर दिया जाता है तो कर्नाटक इसके लिए पूरी तरह तैयार है।
CET मॉडल का दिया उदाहरण
मंत्री ने कहा कि कर्नाटक लंबे समय से पारदर्शी और व्यवस्थित प्रवेश परीक्षाओं के आयोजन में अग्रणी रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) प्रणाली को पूर्व मुख्यमंत्री वीरप्पा मोइली के कार्यकाल में लागू किया गया था।
उन्होंने कहा कि CET के जरिए राज्य ने वर्षों से सफलतापूर्वक परीक्षाएं आयोजित की हैं। इससे यह साबित होता है कि कर्नाटक बड़े स्तर की प्रवेश परीक्षा को बिना किसी परेशानी के संचालित करने की क्षमता रखता है।
मंत्री ने कहा कि परीक्षा संचालन के लिए जरूरी तकनीकी व्यवस्था, केंद्रों का प्रबंधन और विशेषज्ञों की टीम राज्य के पास उपलब्ध है।
NEET सिलेबस को लेकर भी तैयारी
डॉ. पाटिल ने कहा कि वर्तमान में NEET परीक्षा का पाठ्यक्रम नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) द्वारा तय किया जाता है और यह CBSE सिलेबस पर आधारित है।
उन्होंने बताया कि कर्नाटक सरकार पहले ही राज्य के प्री-यूनिवर्सिटी (PU) कॉलेजों में CBSE पैटर्न के अनुसार पाठ्यक्रम लागू करने की दिशा में कदम उठा चुकी है। ऐसे में यदि राज्य स्तर पर मेडिकल प्रवेश परीक्षा आयोजित करने के लिए NMC के निर्धारित सिलेबस का पालन करने का निर्देश दिया जाता है तो इसमें कोई कठिनाई नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए हर जरूरी तैयारी करने के लिए तैयार है।
NEET व्यवस्था को लेकर पहले भी उठे सवाल
NEET परीक्षा को लेकर देशभर में समय-समय पर बहस होती रही है। कुछ राज्य सरकारें केंद्रीकृत परीक्षा प्रणाली को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर करती रही हैं। उनका कहना है कि अलग-अलग राज्यों के शिक्षा बोर्ड और पाठ्यक्रम में अंतर होने के कारण छात्रों को समान अवसर देने के लिए परीक्षा व्यवस्था पर विचार जरूरी है।
वहीं, NEET समर्थकों का कहना है कि एक समान प्रवेश परीक्षा से मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होती है और छात्रों को समान मंच मिलता है।
छात्रों के हित पर सरकार का जोर
कर्नाटक सरकार का कहना है कि किसी भी परीक्षा व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य छात्रों के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करना होना चाहिए। मंत्री शरण प्रकाश पाटिल ने कहा कि राज्य सरकार मेडिकल शिक्षा में गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि यदि राज्य स्तरीय परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी मिलती है तो कर्नाटक इसे सफलतापूर्वक पूरा कर सकता है।
मेडिकल शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश
कर्नाटक देश के प्रमुख मेडिकल शिक्षा केंद्रों में शामिल है। राज्य में बड़ी संख्या में सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेज हैं, जहां हर साल हजारों छात्र दाखिले के लिए आवेदन करते हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि मेडिकल शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता और छात्रों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
फिलहाल, NEET के विकल्प के रूप में राज्य स्तरीय प्रवेश परीक्षा को लेकर चर्चा जारी है। हालांकि, अंतिम फैसला केंद्र सरकार और संबंधित चिकित्सा शिक्षा संस्थाओं के निर्देशों पर निर्भर करेगा। कर्नाटक सरकार ने साफ कर दिया है कि जरूरत पड़ने पर वह ऐसी परीक्षा आयोजित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।





