कर्नाटक

पार्क विधेयक पर फिर चर्चा को तैयार कर्नाटक सरकार

Kavita2
1 Sept 2026 5:20 PM IST
पार्क विधेयक पर फिर चर्चा को तैयार कर्नाटक सरकार
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बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा है कि राज्य सरकार जरूरत पड़ने पर विधानसभा में ‘पार्क्स (संरक्षण) (संशोधन) विधेयक-2026’ पर दोबारा चर्चा कराने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि सरकार जनता के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए इस मामले में कोई भी फैसला लेने को तैयार है।

मुख्यमंत्री ने मंगलवार को बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बात कही। उन्होंने राज्य सरकार के इस विधेयक को लेकर चल रही चर्चाओं और आपत्तियों पर अपनी प्रतिक्रिया दी।

जनता के हित को प्राथमिकता देगी सरकार

डीके शिवकुमार ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी भी तरह से जनता के हितों को नुकसान पहुंचाना नहीं है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इस विधेयक को लेकर किसी तरह की चिंता या सुझाव सामने आते हैं तो सरकार उस पर विचार करने के लिए तैयार है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जरूरत पड़ने पर विधानसभा में इस विषय पर फिर से चर्चा की जा सकती है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा।

दोनों सदनों से पारित हो चुका है विधेयक

मुख्यमंत्री ने बताया कि पार्क्स (संरक्षण) (संशोधन) विधेयक-2026 को विधानसभा और विधान परिषद दोनों सदनों से मंजूरी मिल चुकी है।

इस विधेयक का उद्देश्य बेंगलुरु के प्रमुख हरित क्षेत्रों पर लागू पुराने कानून में संशोधन करना है।

उन्होंने कहा कि यह संशोधन वर्ष 1975 के कानून में बदलाव से जुड़ा हुआ है।

कब्बन पार्क और लालबाग से जुड़ा मामला

यह विधेयक बेंगलुरु के प्रमुख हरे-भरे क्षेत्रों में शामिल कब्बन पार्क और लालबाग जैसे स्थानों से जुड़ा है।

इन दोनों स्थानों को शहर के महत्वपूर्ण पर्यावरणीय और सार्वजनिक क्षेत्रों के रूप में देखा जाता है।

विधेयक को लेकर पर्यावरण प्रेमियों और कुछ संगठनों की ओर से चिंता जताई गई है कि इससे इन क्षेत्रों की सुरक्षा और संरक्षण प्रभावित हो सकता है।

सरकार ने दी सफाई

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य पार्कों और हरित क्षेत्रों को नुकसान पहुंचाना नहीं है।

उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।

सरकार जनता की जरूरतों और पर्यावरणीय हितों दोनों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना चाहती है।

विधेयक को लेकर उठे सवाल

विधेयक को लेकर कई लोगों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बेंगलुरु जैसे तेजी से बढ़ते शहर में हरित क्षेत्रों का संरक्षण बेहद जरूरी है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि शहर के पार्क और खुले स्थान प्रदूषण नियंत्रण, जैव विविधता और लोगों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सरकार करेगी सभी पक्षों पर विचार

डीके शिवकुमार ने कहा कि सरकार सभी पक्षों की बात सुनने के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई संशोधन या सुधार जरूरी होगा तो उस पर विचार किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि सरकार किसी भी निर्णय को जल्दबाजी में नहीं लेगी और व्यापक चर्चा के बाद ही आगे बढ़ेगी।

बेंगलुरु के हरित क्षेत्रों का महत्व

बेंगलुरु को लंबे समय से अपने पार्कों और हरियाली के लिए जाना जाता है।

कब्बन पार्क और लालबाग शहर की पहचान से जुड़े प्रमुख स्थान हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।

इन क्षेत्रों का संरक्षण शहर के पर्यावरण और नागरिक सुविधाओं के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

आगे की कार्रवाई पर नजर

अब सभी की नजर राज्य सरकार के अगले कदम पर है। यदि सरकार विधेयक पर दोबारा चर्चा कराती है तो इसमें विभिन्न पक्षों की राय शामिल की जा सकती है।

मुख्यमंत्री के बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक बहस फिर तेज होने की संभावना है।

फिलहाल सरकार ने साफ कर दिया है कि अंतिम फैसला जनता के हितों को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा।

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