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कर्नाटक में किसानों को सूखा राहत देने के लिए कर्ज लेने को भी तैयार सरकार, डिप्टी सीएम का बयान

Kavita2
9 Oct 2026 10:43 AM IST
कर्नाटक में किसानों को सूखा राहत देने के लिए कर्ज लेने को भी तैयार सरकार, डिप्टी सीएम का बयान
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बेंगलुरु। कर्नाटक में सूखे और फसल नुकसान से जूझ रहे किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने हरसंभव कदम उठाने की बात कही है। उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने कहा कि सरकार को मुश्किल वित्तीय परिस्थितियों का सामना करना पड़े, तब भी किसानों को सूखा राहत और जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास जारी रहेंगे। आवश्यकता पड़ने पर इसके लिए कर्ज लेने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है।

डॉ. परमेश्वर ने बुधवार को येल्बुर्गा तालुक के गुन्नल गांव में फसल नुकसान का जायजा लेने के बाद पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही। उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के वित्तीय प्रबंधन का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अब तक 16 बजट पेश कर चुके हैं और उन्होंने वित्तीय अनुशासन से समझौता नहीं किया है।

उपमुख्यमंत्री के मुताबिक, कर्नाटक सरकार वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए सूखे से प्रभावित किसानों को सहायता देने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में सूखे की गंभीर स्थिति के बावजूद किसानों को राहत देने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फसल नुकसान और पानी की कमी के कारण प्रभावित किसानों को आवश्यक सहायता मिल सके।

सिद्धारमैया के बजट और वित्तीय अनुशासन का दिया हवाला

डॉ. जी. परमेश्वर ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के वित्तीय प्रबंधन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अब तक 16 बजट पेश किए हैं और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने पर जोर दिया है। उनके मुताबिक, कर्नाटक सरकार सूखे जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में भी आर्थिक अनुशासन का पालन करते हुए किसानों को राहत देने की कोशिश कर रही है।

उपमुख्यमंत्री ने दूसरे राज्यों की वित्तीय स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार मौजूदा कठिनाइयों के बावजूद विकास कार्यों और किसान सहायता के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास कर रही है। उनका कहना था कि जरूरत पड़ने पर किसानों को सहायता देने के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाए जा सकते हैं।

डीजल और बिजली सब्सिडी का किया जिक्र

परमेश्वर ने किसानों को मिलने वाली सरकारी सहायता का उल्लेख करते हुए डीजल सब्सिडी, बिजली सब्सिडी और गारंटी योजनाओं को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने दावा किया कि इन योजनाओं के संयुक्त लाभ से एक किसान को हर महीने एक लाख रुपये तक का फायदा मिल रहा है।

हालांकि, इस दावे में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि एक लाख रुपये के संभावित लाभ की गणना किन योजनाओं, पात्रता शर्तों और किस अवधि के आधार पर की गई है। इसे प्रत्येक किसान को प्रतिमाह मिलने वाली प्रत्यक्ष नकद राशि के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए।

कर्नाटक सरकार की गारंटी योजनाओं में अलग-अलग वर्गों के पात्र लाभार्थियों को विभिन्न प्रकार की सहायता दी जाती है। वहीं, किसानों को मिलने वाली सब्सिडी और सूखा राहत की पात्रता अलग-अलग नियमों पर निर्भर करती है। इसलिए सहायता के कुल संभावित मूल्य और किसान के खाते में सीधे पहुंचने वाली राशि में अंतर हो सकता है।

पांच साल तक कर्ज नहीं चुका पाने पर भी चिंता न करने की बात

उपमुख्यमंत्री ने किसानों के कर्ज को लेकर भी आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि यदि किसान पांच साल तक कर्ज नहीं चुका पाते हैं, तब भी उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब सूखे और फसल नुकसान के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

हालांकि, उनके इस बयान से यह स्पष्ट नहीं होता कि सरकार सभी किसानों के मौजूदा कृषि ऋण माफ करने जा रही है या कर्ज चुकाने के लिए कोई नई समयसीमा घोषित की गई है। किसी भी ऋण राहत, पुनर्गठन या कर्ज माफी का लाभ संबंधित योजना और उसके औपचारिक नियमों के अनुसार ही मिलेगा।

फिलहाल, परमेश्वर ने किसानों को संकट के समय सरकार की ओर से सहायता जारी रखने का भरोसा दिया है। अतिरिक्त कर्ज लेने की जरूरत पड़ने पर भी राहत उपायों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

फसल नुकसान का जायजा लेने पहुंचे थे गुन्नल गांव

डॉ. जी. परमेश्वर बुधवार को येल्बुर्गा तालुक के गुन्नल गांव पहुंचे थे। यहां उन्होंने फसल नुकसान का जायजा लिया और बाद में पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान सूखे से निपटने, किसानों को राहत देने और सरकार के वित्तीय प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी।

कर्नाटक में सूखे की स्थिति के कारण किसानों को राहत पहुंचाना सरकार के सामने बड़ी चुनौती है। राज्य सरकार ने पहले भी सूखाग्रस्त क्षेत्रों में सहायता देने की दिशा में कदम उठाए हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, राज्य में सूखे का असर व्यापक है और राहत उपायों के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत पर चर्चा चल रही है।

किसानों को राहत देने पर सरकार का जोर

उपमुख्यमंत्री के बयान का मुख्य संदेश यह है कि राज्य सरकार सूखे से प्रभावित किसानों को सहायता देने के लिए वित्तीय संसाधनों की कमी को बाधा नहीं बनने देना चाहती। उन्होंने कहा कि वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए राहत जारी रहेगी और आवश्यकता पड़ने पर कर्ज लेने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार सूखा प्रभावित किसानों के लिए राहत के किन उपायों को आगे बढ़ाती है, अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों की जरूरत कितनी पड़ती है और सहायता पात्र किसानों तक किस तरह पहुंचाई जाती है। फिलहाल, डॉ. जी. परमेश्वर ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद सरकार उन्हें राहत देने के लिए कदम उठाएगी।

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