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Bengaluru बेंगलुरु। सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद सिद्धारमैया सरकार ने शुक्रवार को मेकेदाटु बैलेंस्ड रिजरवायर प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए कर्नाटक इंजीनियरिंग रिसर्च स्टेशन (केईआरएस) के निदेशक के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित करने का आदेश जारी किया है। सरकारी आदेश के अनुसार, यह टीम उप मुख्य अभियंता और अन्य सहयोगी कर्मचारियों से बनेगी और बेंगलुरु दक्षिण जिले के रामनगर में कार्य करेगी, जिसे परियोजना का केंद्रीय आधार बनाया गया है। सरकार ने यह भी पुष्टि की है कि मेकेदाटु परियोजना का एक समर्पित कार्यालय रामनगर में स्थापित किया जाएगा।
इससे पहले 18 नवंबर को उपमुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री डी.के. शिवकुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में परियोजना को गति देने के लिए मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता के कार्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया था। हालांकि, इन नए पदों और कार्यालयों के निर्माण के लिए वित्त विभाग की मंजूरी आवश्यक है, जिसमें समय लग सकता है। इसी वजह से परियोजना कार्यान्वयन की जिम्मेदारी केईआरएस के निदेशक को सौंपी गई है। केईआरएस को निर्देश दिया गया है कि वह अपनी मौजूदा टीम से ही एक विशेष इकाई तैयार करे। आदेश में कहा गया है कि टीम में एक कार्यकारी अभियंता, तीन तकनीकी सहायक, छह सहायक अभियंता, एक सहायक प्रशासनिक अधिकारी, एक लेखा अधिकारी, अधीक्षक और अन्य कर्मचारी शामिल होंगे।
परियोजना कार्यालय के भवन की व्यवस्था कावेरी निरावरी निगम लिमिटेड (सीएनएनएल) द्वारा की जाएगी। नई टीम सीएनएनएल के प्रबंध निदेशक के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करेगी और कार्यालय संचालन, बुनियादी ढांचे और अन्य जरूरतों से जुड़े सभी खर्च सीएनएनएल वहन करेगा। आदेश में सीएनएनएल के प्रबंध निदेशक को यह भी निर्देश दिया गया है कि मेकेदाटु परियोजना से संबंधित सभी फाइलें, पत्राचार और दस्तावेज केईआरएस के निदेशक को सौंप दिए जाएं। गौरतलब है कि मेकेदाटु कर्नाटक के रामनगर जिले के कनकपुरा के पास कावेरी नदी पर प्रस्तावित बहुउद्देशीय बांध और बैलेंसिंग रिजरवायर परियोजना है।
यह परियोजना लगभग 67 टीएमसी पानी संग्रहित कर बेंगलुरु और आसपास के इलाकों को पेयजल उपलब्ध कराने और करीब 400 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन का लक्ष्य रखती है। हालांकि, तमिलनाडु इस परियोजना का लगातार विरोध कर रहा है, यह कहते हुए कि इससे उसके किसानों और कावेरी डेल्टा क्षेत्र में पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की वह याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें कर्नाटक को डीपीआर तैयार करने से रोकने की मांग की गई थी। अदालत ने इसे ‘असमय और गलत’ बताया, साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि कर्नाटक को कावेरी जल बंटवारे के तहत तमिलनाडु का हिस्सा देना जारी रखना होगा।
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