
Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक सरकार वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख करने पर विचार कर रही है। इस मुद्दे पर राज्य कैबिनेट में विस्तार से चर्चा की गई है और सरकार अगले तीन से चार दिनों के भीतर अंतिम निर्णय लेने की तैयारी में है।
कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री एच के पाटिल ने बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने SIR प्रक्रिया से जुड़े सभी कानूनी और प्रशासनिक विकल्पों पर विचार किया है और अब अंतिम निर्णय पर पहुंचने की प्रक्रिया जारी है।
मंत्री के अनुसार, कैबिनेट बैठक में इस बात पर विस्तार से चर्चा हुई कि सरकार को इस मामले में तुरंत सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए या फिर अंतिम वोटर लिस्ट प्रकाशित होने के बाद कानूनी कदम उठाना अधिक उचित होगा। इस पर विभिन्न कानूनी पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है।
एच के पाटिल ने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी प्रक्रिया के तहत किसी मतदाता के अधिकारों को प्रभावित करने या कम करने की कोशिश होती है, तो सरकार उसे रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि अगले तीन से चार दिनों के भीतर सरकार इस मामले में अंतिम निर्णय ले लेगी। इसके बाद तय किया जाएगा कि सुप्रीम कोर्ट में याचिका कब और किस चरण में दायर की जाए।
सरकार का मानना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है, और इसी को ध्यान में रखते हुए सभी विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि SIR प्रक्रिया को लेकर विभिन्न पक्षों की अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रक्रिया वोटर डेटा अपडेट करने के लिए जरूरी है, जबकि सरकार इसे मतदाता अधिकारों से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा मान रही है।
फिलहाल राज्य सरकार कानूनी सलाह और प्रशासनिक समीक्षा के आधार पर आगे की रणनीति तय कर रही है। आने वाले दिनों में इस पर अंतिम निर्णय सामने आने की संभावना है, जिसके बाद मामले की दिशा स्पष्ट होगी।





