कर्नाटक

बेंगलुरु को ग्लोबल डीप-टेक हब बनाने के लिए प्रतिबद्ध है कर्नाटक सरकार: D.K. Shivakumar

Kavita2
4 Aug 2026 4:38 PM IST
बेंगलुरु को ग्लोबल डीप-टेक हब बनाने के लिए प्रतिबद्ध है कर्नाटक सरकार: D.K. Shivakumar
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बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा है कि राज्य सरकार बेंगलुरु को नैनोटेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, बायोटेक्नोलॉजी और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे उभरते 'डीप-टेक' क्षेत्रों का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य कर्नाटक को अगली तकनीकी क्रांति का नेतृत्व करने वाला राज्य बनाना है, जिसके लिए उद्योग, शिक्षा जगत, अनुसंधान संस्थानों और स्टार्टअप्स के बीच मजबूत साझेदारी को और प्रोत्साहित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री मंगलवार को बेंगलुरु के एक निजी होटल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा नैनोटेक्नोलॉजी विजन ग्रुप द्वारा आयोजित 14वें बैंगलोर इंडिया नैनो कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर देश-विदेश के वैज्ञानिक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, शोधकर्ता, नीति-निर्माता और तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद रहे। सम्मेलन का उद्देश्य नैनो विज्ञान, डीप-टेक अनुसंधान और अत्याधुनिक तकनीकों में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ नवाचार को नई दिशा देना है।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि बेंगलुरु ने पिछले कई दशकों में भारत को वैश्विक सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मानचित्र पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब समय आ गया है कि भारत केवल आईटी तक सीमित न रहे, बल्कि डीप-टेक के क्षेत्र में भी दुनिया का अग्रणी देश बने। उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक के नए क्षेत्रों में निवेश, अनुसंधान और नवाचार भविष्य की अर्थव्यवस्था को आकार देंगे और भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में नई पहचान दिलाएंगे।

शिवकुमार ने कहा, "बेंगलुरु ने भारत को ग्लोबल आईटी मैप पर स्थापित किया है। अब समय आ गया है कि भारत को ग्लोबल डीप-टेक मैप पर भी स्थापित किया जाए। यह तभी संभव होगा जब सरकार, शिक्षा जगत, उद्योग और उद्यमियों के बीच मजबूत सहयोग स्थापित हो। यही साझेदारी कर्नाटक की सबसे बड़ी ताकत है और इसी आधार पर राज्य भविष्य की तकनीकी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है।"

उन्होंने भारत रत्न प्रोफेसर सी.एन.आर. राव के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका दूरदर्शी नेतृत्व और वैज्ञानिक सोच देश के शोधकर्ताओं के लिए लगातार प्रेरणा का स्रोत रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रो. राव ने नैनो विज्ञान और उन्नत अनुसंधान के क्षेत्र में जो आधार तैयार किया, उसी का परिणाम है कि आज कर्नाटक इस क्षेत्र में राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक का अनुसंधान और नवाचार तंत्र देश के अन्य राज्यों की तुलना में काफी मजबूत है। यहां प्रमुख राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान, विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय, हजारों तकनीकी स्टार्टअप, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के अनुसंधान एवं विकास (R&D) केंद्र और उच्च प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हैं। यही कारण है कि राज्य के पास डीप-टेक इनोवेशन का वैश्विक नेतृत्व करने का एक विशेष अवसर मौजूद है।

उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, बायोटेक्नोलॉजी, क्वांटम कंप्यूटिंग और नैनोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्र आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेंगे। ऐसे में कर्नाटक सरकार इन क्षेत्रों में अनुसंधान, निवेश और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देने के लिए आवश्यक नीतिगत समर्थन और बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है।

शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं है, बल्कि ऐसा नवाचार-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है, जहां वैज्ञानिक शोध सीधे उद्योग और समाज की आवश्यकताओं से जुड़ सके। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों के विकास से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति प्राप्त होगी।

उन्होंने सम्मेलन में मौजूद वैज्ञानिकों और उद्योग प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अनुसंधान और नवाचार को प्रयोगशालाओं तक सीमित न रखें, बल्कि ऐसी तकनीकों का विकास करें जो स्वास्थ्य, कृषि, पर्यावरण, ऊर्जा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों की वास्तविक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत कर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञान और तकनीक का उद्देश्य केवल नई खोज करना नहीं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाना भी है।

बैंगलोर इंडिया नैनो कॉन्फ्रेंस को देश के प्रमुख विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आयोजनों में शामिल किया जाता है। इस सम्मेलन के माध्यम से हर वर्ष वैज्ञानिक, उद्योग जगत, निवेशक और नीति-निर्माता एक मंच पर आकर नई तकनीकों, अनुसंधान और संभावित सहयोग पर चर्चा करते हैं। इस वर्ष भी सम्मेलन में नैनो टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मटेरियल्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर जैसे विषयों पर विभिन्न तकनीकी सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर डीप-टेक क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहे निवेश और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच कर्नाटक के लिए यह महत्वपूर्ण अवसर है। राज्य पहले से ही सूचना प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप इकोसिस्टम में अग्रणी रहा है। यदि सरकार, उद्योग और अनुसंधान संस्थान मिलकर काम करते हैं तो बेंगलुरु आने वाले वर्षों में न केवल भारत बल्कि दुनिया के प्रमुख डीप-टेक नवाचार केंद्रों में अपनी जगह मजबूत कर सकता है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में विश्वास व्यक्त किया कि कर्नाटक का मजबूत अनुसंधान ढांचा, नवाचार को बढ़ावा देने वाली नीतियां और प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों तथा उद्यमियों का सहयोग राज्य को अगली तकनीकी क्रांति का नेतृत्व करने में सक्षम बनाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार भविष्य की तकनीकों में निवेश बढ़ाने और बेंगलुरु को वैश्विक डीप-टेक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लिए हर संभव कदम उठाती रहेगी।

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